UNSC: भारत ने यूएनएससी को दी सुधरने की सलाह, कहा-'मौजूदा संरचना दुनिया की वास्तविकताओं से मेल नहीं खाती'

भारत लंबे समय से यूएनएसी में सुधार की मांग करता आया है। फिलहाल, यूएनएससी के पांच स्थाई और 10 अस्थाई सदस्य होते हैं। अस्थाई सदस्य देशों का कार्यकाल 2 सालों का होता है।

India in UNSC

India in UNSC: संयुक्त राष्ट्र में भारत की स्थायी प्रतिनिधि रुचिरा कंबोज ने गुरुवार को कहा, कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की वर्तमान संरचना अब हमारी आपस में जुड़ी और बहु-ध्रुवीय दुनिया की वास्तविकताओं के अनुरूप नहीं है।

संयुक्त राष्ट्र में भारत की स्थायी प्रतिनिधि ने यूएनएससी में बदलाव लाने की जोरदार मांग की है और उन्होंने कहा, कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद विकृत और अमैतिक है, क्योंकि इसका कामकाज अभी भी पुराने उपनिवेशवाद की सोच के तहत चल रहा है।

यूएनएससी पर बरसा भारत

दरअसल, संयुक्त राष्ट्र के हेडक्वार्टर में यूएनएससी में सुधार को लेकर एक राउंड टेबल बैठक का आयोजन किया गया था। इस चर्चा का आयोजन ब्राजील, भारत, दक्षिण अफ्रीका और सेंट विंसेंट और ग्रेनेडाइंस के मिशन की तरफ से किया गया था।

इस बैठक को भारत की तरफ से यूएन में स्थाई प्रतिनिधि रुचिरा कंबोज ने हिस्सा लिया और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के आकार, उसकी कार्यशैली और उसके काम करने की प्रभावी क्षमता पर गंभीर सवाल उठाए। भारतीय प्रतिनिधि ने स्पष्ट शब्दों में कहा, कि दुनिया बदल गई है और संयुक्त राष्ट्र का मौजूदा स्वरूप, नई ताकतों के उभार का प्रतिनिधित्व करने में नाकाम रहा है।

कंबोज ने जोर देकर कहा, कि UNSC सुधार की तात्कालिकता सीमाओं को पार करने वाली अभूतपूर्व वैश्विक चुनौतियों से भी रेखांकित होती है।

उन्होंने कहा, कि "जलवायु परिवर्तन, आतंकवाद, महामारी और मानवीय संकटों के लिए सामूहिक प्रयासों और साझा जिम्मेदारियों की आवश्यकता होती है।" और अगर यूएनएसी में रिफॉर्म लाए जाते हैं, तो फिर यूएनएससी प्रभावी तरीके से वैश्विक मुद्दों को एकता के साथ संबोधित करने में कारगर होगा।

भारत की दूत ने बदलाव की मांग के साथ कहा, कि संयुक्त राष्ट्र में गंभीर सुधारों की जरूरत है, क्योंकि ये अपने मौजूदा प्रारूप के साथ वैश्विक आतंकवाद, जलवायु परिवर्तन, आपदा, मानवीय संकट को संबोधित करने में कारगर नहीं रहा है, लिहाजा इन मुद्दों पर एकजुट होकर जिम्मेदारी से चलने की जरूरत है।

इसके साथ ही रुचिरा कंबोज ने सभी देशों से संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधारों के लिए प्रयास करने की अपील की है, ताकि इसे सभी देशों की जरूरतों और आकांक्षाओं के लिए अधिक समावेशी, प्रतिनिधि और उत्तरदायी बनाया जा सके।

सुधार की मांग करता रहा है भारत

आपको बता दें, कि भारत यूएनएससी में सुधार की मांग के साथ साथ स्थायी सदस्य बनने को लेकर भी अपनी दावा जताता है, लेकिन चीन के वीटो की वजह से ऐसा नहीं हो पा रहा है। जबकि, वीटो पावर वाले चार और देश, रूस, अमेरिका, ब्रिटेन और फ्रांस भारत की स्थायी सदस्यता का समर्थन करते हैं।

वहीं, भारत के प्रमुख थिंक टैंक ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन (ओआरएफ) के अध्यक्ष समीर सरन ने कहा, कि इस बात का कतई समर्थन नहीं किया जा सकता है, कि पिछली सदी में जंग जीतने वाले कुछ देश, आज भी दुनिया का प्रबंधन करें।

उन्होंने कहा, कि युद्ध अब इतिहास की बात हो चुकी है और युद्ध को जीतने वाले कुछ देशों का प्रभाव भी अब इतिहास की बातें हो चुकी हैं। इसीलिए मुझे लगता है कि यूएनएससी की मौजूदा संरचना विकृत और अनैतिक है"।

उन्होंने कहा, कि "उपनिवेशीकरण परियोजना के ग्लोबल साउथ से हम में से कई लोगों के लिए यह एक निरंतरता है। युद्ध का बोझ उपनिवेशों द्वारा वहन किया गया, जबकि शांति के विशेषाधिकारों से उपनिवेशवादियों और उनके सहयोगियों को फायदा हुआ।"

सरन ने कहा, कि पिछले दशकों में, "हमने देखा है कि परिषद के एक या अधिक स्थायी सदस्यों द्वारा राष्ट्रों और समुदाय की इच्छा को कैसे नकारा गया है"।

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    आपको बता दें, कि चीन, फ्रांस, रूस, ब्रिटेन और अमेरिका 15 देशों वाले सुरक्षा परिषद के पांच स्थायी सदस्य हैं, जबकि बाकी के 10 देश हर दो सालों पर बदलते रहते हैं। इन्हीं पांच स्थाई सदस्य देशों के पास वीटो पावर है, जिसे वो अपने अपने फायदे के लिए इस्तेमाल करते हैं।

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