भारत ने चीन के BRI प्रोजेक्‍ट को मानने से किया साफ इनकार, पाकिस्‍तान ने किया समर्थन

भारत ने एक बार फिर चीन के प्रोजेक्‍ट बेल्ट एंड रोड इनीशिएटिव (बीआरआई) पर को मानने और इसका समर्थन करने से इनकार कर दिया है। बीजिंग में खत्‍म हुए शंघाई कोऑपरेशन ऑर्गनाइजेशन (एससीओ) के विदेश मंत्रियों की बैठक में भारत ने इस प्रोजेक्‍ट की पुष्टि से खुद को अलग रखा है।

बीजिंग। भारत ने एक बार फिर चीन के प्रोजेक्‍ट बेल्ट एंड रोड इनीशिएटिव (बीआरआई) पर को मानने और इसका समर्थन करने से इनकार कर दिया है। बीजिंग में खत्‍म हुए शंघाई कोऑपरेशन ऑर्गनाइजेशन (एससीओ) के विदेश मंत्रियों की बैठक में भारत ने इस प्रोजेक्‍ट की पुष्टि से खुद को अलग रखा है। जबकि संगठन के बाकी आठ सदस्यों ने इसका समर्थन किया। एससीओ विदेश मंत्रियों की एक दिवसीय बैठक के बाद जारी ज्‍वॉइन्‍ट स्‍टेटमेंट में 24 अप्रैल को कहा गया है, ''कजाखिस्तान, कीर्गिस्‍तान, पाकिस्तान, रूस, ताजिकिस्तान और उजबेकिस्तान ने चीन के बीआरआई प्रोजेक्‍ट को अपना समर्थन दोहराया है।

सुषमा की चीन को खरी-खरी

बीआरआई पर सहमति जताने वाले देशों की सूची में भारत का नाम साफ तौर पर नहीं था। बीआरआई चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरीडोर (सीपीईसी)का हिस्सा है। बयान में आगे कहा गया है कि पक्षों ने एससीओ क्षेत्र में एक व्यापक, खुली और आपसी लाभ की भागीदारी के लिए क्षेत्र के देशों, अंतरराष्टूीय संगठनों और बहुपक्षीय संस्थानों की क्षमता के इस्तेमाल का समर्थन किया है। पिछले वर्ष भारत और पाकिस्तान को इस संगठन में शामिल किया गया है। जबकि चीन और रूस प्रभावशाली सदस्य हैं। सोमवार को विदेश मंत्री सुषमा स्‍वराज ने यहां पर एससीओ देशों के अंदर जारी 'कनेक्टिविटी' के मुद्दे पर भी बात की। उन्‍होंने चीन के बेल्‍ट एंड रोड इनीशिएटिव यानी बीआरआई का जिक्र किए बगैर साफ कर दिया कि इस प्रोजेक्‍ट पर भारत की कौन सी चिंताएं जुड़ी हैं। सुषमा ने कहा, 'एससीओ देशों के बीच में संपर्क भारत की प्राथमिकता है। हम चाहते हैं कि इस संपर्क से आपसी सहयोग और भरोसे का निर्माण हो। इसके लिए संप्रभुता का सम्‍मान करना काफी जरूरी है।' भारत ने बीआरआई का हिस्‍सा बनने से साफ इनकार कर दिया है। बीआरआई चीन-पाकिस्‍तान इकोनॉमिक कॉरीडोर (सीपीइसी) का हिस्‍सा है।

भारत पहले भी कर चुका है इनकार

भारत इस माह की शुरुआत में कहा था कि बीआरआई संप्रभुता और अखंडता के खिलाफ है। विदेश मंत्रालय की ओर से कुछ मीडिया रिपोर्ट्स पर यह प्रतिक्रिया दी गई थी। मीडिया रिपोर्ट्स में कहा गया था नई दिल्‍ली, इस प्रोजेक्‍ट का हिस्‍सा बन सकता है। सीपीईसी का हिस्‍सा बीआरआई का नाम पहले वन बेल्‍ट वन रोड था। चीन का यह प्रोजेक्‍ट सिल्‍क रोड का जवाब माना जा रहा है। कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में कहा गया था कि चीन, भारत पर बीआरआई में शामिल होने के लिए दबाव डाल रहा है। बीआरआई, सीपीईसी का ही हिस्‍सा है और भारत हमेशा से ही इस प्रोजेक्‍ट का विरोध करता आया है क्‍योंकि यह पीओके से होकर गुजरता है और भारत, पीओके को कश्‍मीर का ही हिस्‍सा बताता है। वहीं चीन का कहना है कि वह सभी देशों की सीमाओं का सम्‍मान करता है और पीओके का मसला भारत-पाकिस्‍तान का आपसी मसला है।

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