चीन के साथ LAC पर बढ़ी टेंशन, भारत ने बड़ी संख्या में सैनिकों को सरहद पर भेजा, सर्दी में क्या होगा?
सर्दी से पहले भारत और चीन ने भारी संख्या में सैनिकों की तैनाती एलएसी पर शुरू कर दी है। ऐसे में आशंका जताई जा रही है सीमा पर दोनों देश फिर आमने-सामने हो सकते हैं।
नई दिल्ली, अक्टूबर 04: पिछले साल जून में भारत और चीन के सैनिकों के बीच पूर्वी लद्दाख में भीषण झड़प हुई थी, जिसके बाद दोनों देशों के बीच का अविश्वास इतना ज्यादा बढ़ चुका है कि, इस साल सर्दी में दोनों ही देशों ने भारी संख्या में सैनिकों को एलएसी पर भेजना शुरू कर दिया है। जिसके बाद आशंका जताई जा रही है कि एक बार फिर से भारत और चीन के बीच तनाव काफी ज्यादा बढ़ सकता है। द प्रिंट की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत और चीन, दोनों ही देश इस बार सर्दियों में एलएसी पर भारी संख्या में सैनिकों की तैनाती कर रहे हैं। (सभी तस्वीर फाइल)

सरहद पर चरम पर तनाव
द प्रिंट ने डिफेंस स्टेब्लिशमेंट के हवाले से रिपोर्ट दी है कि इस महीने फिर से भारत और चीन के सैनिकों के बीच कमांडर स्तरीय बातचीत होने वाली है, जिसमें अंतिम विवादित क्षेत्र हॉट स्प्रिंग को लेकर सहमति बन सकती है, जो अब तक दोनों ही देशों के बीच अनसुलक्षा मामला है। रक्षा सूत्रों के अनुसार, सैनिकों की निरंतर तैनाती दोनों पक्षों के बीच "विश्वास की कमी" का नतीजा है। वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) के पश्चिमी क्षेत्र पर तनाव पिछले साल अप्रैल में गतिरोध के बाद शुरू हुआ था और 18 महीने के बाद भी दोनों ही देशों के बीच तनाव बना हुआ है।

पैंगोंग-त्सो से हटे दोनों देश
दोनों ही देशों के सैनिकों के बीच कई दौर की बातचीत के बाद भारत और चीन दोनों पैंगोंग त्सो के उत्तरी और दक्षिणी किनारे पर आमने-सामने की साइटों से हट गए हैं, लेकिन दोनों ही देश गोगरा और गलवान घाटी में बहु-स्तरीय अतिरिक्त सैनिकों की तैनाती को बनाए रखना चाहते हैं। वहीं, डेमचोक और देपसांग मैदानों में भी अतिरिक्त सैनिकों की तैनाती की गई है। जबकि भारतीय और चीनी सैनिक संघर्ष के इन बिंदुओं पर आमने-सामने नहीं हैं, लेकिन दोनों ही देशों के सैनिक एक दूसरे पर लगातार नजर रख रहे हैं और किसी भी हरकत का प्रतिकार करने के लिए तैयार हैं।

भारत तैनात करेगा एस-400 मिसाइल सिस्टम
रक्षा प्रतिष्ठान के एक सूत्र ने द प्रिंट को कहा कि, "हालांकि हम लद्दाख में लड़ाई की गर्मी को महसूस कर सकते हैं, हालांकि, हमने पीएलए (पीपुल्स लिबरेशन आर्मी) को और ज्यादा सैनिकों की तैनाती के लिए मजबूर कर दिया है और चीन को यहां पर सैनिकों की उपस्थिति बनाए रखने के लिए काफी ज्यादा पैसा तो खर्च करना पड़ ही रहा है, साथ ही उनका मनोबल प्रभावित हो रहा है।" वहीं, इस साल भारत एलएसी पर रूस से आयातित एस-400 मिसाइलों की तैनाती भी करेगा। वहीं, भारत ने किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए लद्दाख के एक नजदीकी इलाके में हवाई बेस पर राफेल विमानों की तैनाती भी कर रखी है, ऐसे में माना जा रहा है कि इस बार सर्दियों में सरहद पर भारी तनाव बन सकता है।

लद्दाख में प्रचंड सर्दी
लद्दाख में सर्दी के मौसम में पारा -30 डिग्री सेल्सियस तक गिर जाता है, लिहाजा सैनिकों की तैनाती काफी ज्यादा मुश्किल हो जाती है। लद्दाख में न्यूनतम तापमान पहले ही 0 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच चुका है, आने वाले हफ्तों के पूर्वानुमान में और गिरावट की भविष्यवाणी की गई है। पिछले साल पहली बार लद्दाख की कड़ाके की सर्दी के दौरान एलएसी के अग्रिम क्षेत्रों में सैनिकों को तैनात किया गया था। 2020 तक चीनी सैनिकों को, जो परंपरागत रूप से अपनी गश्त के बाद अपने बैरक में लौट जाते थे, अब उन्हें सर्दियों के दौरान आगे के क्षेत्रों में रहने के लिए मजबूर किया गया है। भारतीय सैन्य अधिकारियों का कहना है कि यह एक ऐसा घटनाक्रम है जिस पर चीनियों ने ध्यान नहीं दिया। उन्होंने कहा कि जब चीन ने पहली बार एलएसी का उल्लंघन करके भारतीय क्षेत्र में घुसने की कोशिश की थी, तो उन्हें अंदाजा नहीं था कि इस बार का गतिरोध इतना ज्यादा लंबा चलने वाला है।

सर्दी में चीनियों के छूट रहे पसीने
पिछले साल गतिरोध शुरू होने के बाद से, चीनियों ने सर्दियों के दौरान अपने सैनिकों के रहने के लिए पूर्वी लद्दाख में एलएसी के नजदीक दर्जनों बड़े सर्दियों से बचने के लिए मजबूत तंबुओं का निर्माण तेजी से कर रहा है। सूत्रों ने कहा कि कुछ फिक्शन प्वाइंट्स से चीनी सैनिक पीछे तो हट गये हैं, लेकिन अभी तक वो पूर्ववर्ती स्थानों पर नहीं गये हैं और वो लगातार एलएसी के करीब बने हुए हैं। इसके साथ ही चीन ने एलएसी पर नये हेलीपैड का निर्माण, हवाई पट्टियों को चौड़ा करने का काम, नये बैरकों के निर्माण का काम तेजी से जारी रखा है। वहीं चीन की तरफ से सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल साइट और रडार भी सीमा पर लगाए गये हैं।

भारत ने कर रखी है स्थिति काफी मजबूत
वहीं, चीन की किसी भी हरकत को जवाब देने के लिए भारत ने भी अपनी तैयारी पूरी कर रखी है। भारत ने पूर्वी लद्दाख के लिए अपने बढ़े हुए शीतकालीन स्टॉकिंग्स को पूरा कर लिया है, सूत्रों ने कहा कि पिछले कुछ महीनों में और काफी बुनियादी ढांचों का निर्माण किया गया है। भारत ने ना सिर्फ भारी संख्या में अतिरिक्त सैनिकों की भी तैनाती कर रखी है, बल्कि भारत की तरफ से 155 मिमी वज्र K9 स्व-चालित ट्रैक हॉवित्जर की एक पूरी रेजिमेंट को भी एलएससी पर तैनात किया गया है। वहीं, सूत्रों के मुताबिक, भारत ने अमेरिका से 155 मिमी अल्ट्रा-लाइट वेट हॉवित्जर की एक रेजिमेंट की भी खरीद की है। जबकि वज्र रेगिस्तान और मैदानी इलाकों के लिए ऑर्डर किए गए थे, उनमें से तीन को परीक्षण के लिए इस साल की शुरुआत में लद्दाख लाया गया था।












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