भारत-चीन सीमा विवाद में नहीं थमी है बातचीत.. विदेश मंत्री ने कहा- टेंशन प्वाइंट्स पर आगे बढ़ी बात
India-China S jaishankar: भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने सोमवार को कहा है, कि भारत और चीन के बीच सीमा वार्ता रुकी नहीं है और दोनों देशों ने पिछले तीन सालों में टेंशन वाले प्रमुख प्वाइंट्स पर बातचीत में प्रगति की है।
भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने आज पत्रकारों से बातचीत में कहा, कि पिछले तीन वर्षों में दोनों देशों के बीच प्रमुख तनाव बिंदुओं पर प्रगति हुई है। उन्होंने आगे बताया, कि सीमा वार्ता पर जल्द ही एक और बैठक होगी। और उन्होंने कहा, कि "भारत-चीन सीमा वार्ता नहीं रुकी है और जल्द बैठक होने वाली है।"

भारत-चीन के बीच जारी है तनाव
भारत और चीन को बार-बार सीमा विवादों का सामना करना पड़ा है और वे 1962 के बाद से ये पहली बार है, जब ये तनाव काफी बढ़ा हुआ है। सबसे हालिया झड़प जून 2020 में हुई थी, जब भारतीय और चीनी सैनिक गलवान घाटी में विवाद में शामिल हो गए थे।
दोनों देश सीमावर्ती क्षेत्रों में मुद्दों को हल करने के लिए सैन्य स्तर की कई दौर की वार्ता कर रहे हैं।
इस साल 23 अप्रैल को, भारत-चीन कोर कमांडर स्तर की बैठक का 18वां दौर, चीनी पक्ष के चुशुल-मोल्डो सीमा बैठक प्वाइंट पर आयोजित किया गया था।
भारतीय विदेश मंत्री जयशंकर ने आज कहा है, कि पिछले नौ वर्षों में प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार "उत्तरी सीमा से लगे क्षेत्रों सहित सीमा पर बुनियादी ढांचे में उल्लेखनीय वृद्धि" कर रही है। उन्होंने आगे कहा,"2014 के बाद, जब सीमा पर बुनियादी ढांचे पर काफी जोर दिया गया, तो चीन की ओर से प्रतिस्पर्धा और गश्त बढ़ गई है।"
विदेश मंत्री ने कहा, कि भारत असम के साथ रेलवे कनेक्टिविटी के लिए भूटान से बातचीत कर रहा है।
जयशंकर ने कहा, कि "हम भूटान और असम के बीच रेल लिंक पर बातचीत कर रहे हैं, भूटान पर्यटकों के लिए और अधिक प्वाइंट खोलने के लिए बहुत उत्सुक है और यह असम के लिए बहुत अच्छा है।"
इस बीच, भूटान और चीन के बीच बातचीत पर जयशंकर ने कहा, "...वे बातचीत कर रहे हैं, और 24 दौर पूरे हो चुके हैं। वे और दौर आयोजित करेंगे। हम ध्यान से ट्रैक करते हैं, कि उनकी बातचीत से हम पर क्या प्रभाव पड़ता है। गति निर्धारित करना उनका काम है।"
वहीं, कैलाश मानसरोवर यात्रा पर बोलते हुए जयशंकर ने कहा, कि "कैलाश मानसरोवर में बुनियादी ढांचे का निर्माण हो रहा है, वहां एक सुरंग की जरूरत है, सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) इस पर काम कर रहा है और योजना बना रहा है। लेकिन, चीन की तरफ से इस प्रोजेक्ट में वापस लौटने का फिलहाल कोई संकेत नहीं मिला है।"
वहीं, म्यांमार त्रिपक्षीय राजमार्ग को वहां की मौजूदा कानून व्यवस्था की स्थिति के कारण एक बड़ी चुनौती बताते हुए जयशंकर ने कहा, कि प्रोजेक्ट को पूरा करने और सिटवे बंदरगाह तक पहुंच पाने के लिए भारत को म्यांमार में अधिकारियों के साथ जुड़ना होगा।
भारतीय विदेश मंत्री ने आगे कहा, कि "म्यांमार के साथ सीमा की स्थिति चुनौतीपूर्ण है। सिटवे बंदरगाह चालू है और हमें उम्मीद है, कि इस साल तटीय शिपिंग समझौता संपन्न हो जाएगा। कानून व्यवस्था की स्थिति के कारण म्यांमार त्रिपक्षीय राजमार्ग एक बड़ी चुनौती है। लेकिन, हम चुनौतियों से निपटने के लिए म्यांमार के अधिकारियों के साथ बातचीत कर रहे हैं।"
आपको बता दें, कि भारत से होते हुए थाईलैंड तक सड़क मार्ग से पहुंचने के लिए एक हाईवे का निर्माण किया जा रहा है, जो म्यांमार से होकर गुजरती है। इस हाईवे का निर्माण, म्यांमार में सैन्य सत्ता स्थापित होने के बाद रूका हुआ है और इस हाईवे की लंबाई 1400 किलोमीटर है।












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