भारत-चीन के बीच सैन्य कमांडरों के बीच 10 घंटों तक चली बातचीत, फिर भी नहीं मिली कोई खास सफलता
लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (LAC) पर जारी तनाव के बीच भारत और चीन के बीच चार महीने बाद सोमवार को कोर लद्दाख सेक्टर के चुशुल- मोल्दो में कमांडर स्तर की 19वें दौर की बातचीत हुई।
इस अहम बैठक में दोनों पक्षों के बीच पश्चिमी क्षेत्र में एलएसी पर शेष मुद्दों के समाधान पर सकारात्मक और गहन चर्चा हुई। दोनों देशों के बीच दूरदर्शी तरीके से विचारों का आदान-प्रदान किया गया।

विदेश मंत्रालय के मुताबिक, बैठक के दौरान चीन शेष मुद्दों को जल्द से जल्द हल करने पर सहमत हुआ है। इस दौरान दोनों देश सैन्य और राजनयिक चैनलों के माध्यम से बातचीत जारी रखने पर भी सहमत हुए। दोनों पक्षों ने सीमावर्ती क्षेत्रों में जमीन पर शांति बनाए रखने पर भी सहमति जताई है।
इससे पहले सूत्रों के हवाले से भी यह बताया गया था कि दोनों पक्षों ने पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा पर सैनिकों की वापसी से संबंधित मुद्दों पर चर्चा की। भारत ने बैठक में देपसांग और डेमचोक समेत अन्य टकराव वाले बिंदुओं से सैनिकों की जल्द से जल्द वापसी का चीन पर दबाव डाला।
रक्षा सूत्रों के मुताबिक दोनों पक्षों की बातचीत सोमवार सुबह 9.30 बजे भारतीय सीमा पर चुशूल सीमा बैठक बिंदु पर शुरू हुई और शाम 5.30 बजे समाप्त हुई। यह मीटिंग लगभग 10 घंटे तक चली।
इस दौरान भारतीय पक्ष का नेतृत्व लेह स्थित 14-कॉर्प्स के कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल राशिम बाली ने किया। वहीं चीनी पक्ष की अगुवाई साउथ शिनजियांग मिलिट्री डिस्ट्रिक्ट चीफ ने की। इससे पहले 18वें दौर की वार्ता 23 अप्रैल को हुई थी। इसमें भी भारत ने देपसांग और डेमचोक से सेना हटाने पर जोर दिया था।
हिन्दुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक भारतीय और चीनी पक्षों के बीच हुई 19 दौर की वार्ता में कोई बड़ी सफलता नहीं मिली है। गलवान घाटी, पैंगोंग त्सो, गोगरा (पीपी-17ए) और हॉट स्प्रिंग्स (पीपी-15) से सैनिकों की वापसी के चार दौर के बावजूद, दोनों पक्षों के पास 60,000 से अधिक सैनिक और उन्नत हथियार तैनात हैं।
2020 में कोर कमांडर-स्तरीय वार्ता शुरू होने के बाद से, दोनों पक्षों ने पांच फ्रिक्शन प्वाइंट - गलवान, पैंगोंग सो के उत्तर और दक्षिण तट, और गोगरा-हॉट स्प्रिंग्स क्षेत्र में पेट्रोलिंग पॉइंट (पीपी) 15 और 17 ए से सैनिकों को पीछे हटाने का काम किया है।












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