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क्या मार्क कार्नी भरेंगे भारत-कनाडा रिश्ते के बीच की दरार? जानें ‘चरमपंथियों को लाइसेंस’ कैसे बना तनाव की वजह?

India Canada Relations: भारत और कनाडा के बीच बीते कुछ सालों में रिश्ते तनावपूर्ण रहे हैं, खासकर जस्टिन ट्रूडो के कार्यकाल में। लेकिन अब, जब मार्क कार्नी कनाडा के नए प्रधानमंत्री बने हैं, तो दोनों देशों के बीच संबंधों को सुधारने की संभावनाएं देखी जा रही हैं।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत-कनाडा संबंधों में गिरावट की मुख्य वजह कनाडा में चरमपंथी और अलगाववादी तत्वों को दी गई छूट है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत को उम्मीद है कि अब आपसी विश्वास और संवेदनशीलता के आधार पर दोनों देशों के रिश्ते बेहतर हो सकते हैं।

India Canada relations

तनाव की असली वजह क्या है?

भारत का आरोप है कि कनाडा में खालिस्तानी समर्थक तत्वों को खुली छूट दी गई है। ये अलगाववादी न केवल भारत विरोधी गतिविधियों को अंजाम देते हैं, बल्कि भारत की अखंडता और संप्रभुता के लिए खतरा भी पैदा कर रहे हैं।

भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि कनाडा में ऐसे तत्वों को संरक्षण मिलने से रिश्ते खराब हुए हैं। भारत ने बार-बार कनाडा से इन तत्वों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।

क्या कहते हैं कनाडा के नए प्रधानमंत्री?

मार्क कार्नी (Mark Carney), जिन्होंने 15 मार्च को प्रधानमंत्री पद संभाला, पहले ही संकेत दे चुके हैं कि वह भारत के साथ संबंध सुधारना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि कनाडा समान विचारधारा वाले देशों के साथ व्यापारिक रिश्ते मजबूत करना चाहता है और भारत के साथ नए अवसर तलाशने का इच्छुक है।

ट्रूडो के कार्यकाल में क्यों बिगड़े थे रिश्ते?

2023 में, जस्टिन ट्रूडो ने भारत पर खालिस्तानी आतंकी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या में शामिल होने का आरोप लगाया था। भारत ने इसे बेबुनियाद बताया और जवाब में दोनों देशों ने एक-दूसरे के राजनयिकों को निष्कासित कर दिया। इससे पहले भी, ट्रूडो की नीतियां और खालिस्तानी समर्थकों को मिली छूट भारत-कनाडा संबंधों में तनाव बढ़ाने का कारण बनी।

क्या अब रिश्तों में सुधार संभव है?

मार्क कार्नी की सरकार के रुख से संकेत मिल रहे हैं कि वे भारत के साथ संबंधों को सुधारने की दिशा में काम करना चाहते हैं। लेकिन असली सवाल यह है कि क्या कनाडा अपनी पुरानी नीतियों में बदलाव करेगा और भारत की चिंताओं को गंभीरता से लेगा?

अगर कनाडा खालिस्तानी तत्वों के खिलाफ ठोस कदम उठाता है और भारत के साथ व्यापारिक व कूटनीतिक स्तर पर सहयोग बढ़ाता है, तो दोनों देशों के बीच रिश्ते फिर से मजबूत हो सकते हैं। हालांकि, यह सब कार्नी सरकार की नीतियों और उनके भविष्य के फैसलों पर निर्भर करेगा।

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