India-Canada Row: जस्टिन ट्रूडो ने UK प्रधानमंत्री से की भारत की शिकायत, 'Five Eyes' से मांगी मदद, क्या है ये?
India-Canada Row: भारत-कनाडा संबंधों में बढ़ती कूटनीतिक परेशानियों के बीच, कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने कहा है, कि उनकी सरकार ने अपने फाइव आईज (Five Eyes) साझेदारों, विशेष रूप से संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ, पिछले वर्ष एक कनाडाई नागरिक की हत्या में भारतीय अधिकारियों की संलिप्तता के आरोपों से संबंधित सभी सूचनाएं शेयर की हैं।
भारत सरकार द्वारा छह कनाडाई राजनयिकों को निष्कासित करने और अपने उच्चायुक्त और अन्य "लक्षित" अधिकारियों को कनाडा से वापस बुलाने की घोषणा के कुछ घंटों बाद, जस्टिन ट्रूडो ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की, जिसमें उन्होंने कहा, कि इस घटनाक्रम पर कनाडा के सहयोगियों के साथ चर्चा की गई।

यूके के प्रधानमंत्री से जस्टिन ट्रूडो ने की बात
जस्टिन ट्रूडो ने यूनाइटेड किंगडम (UK) के प्रधानमंत्री कीर स्टारमर के साथ भारत-कनाडा संबंधों में आए नये विवाद पर चर्चा की है।
प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो के आधिकारिक एक्स अकाउंट पर शेयर किए गये एक पोस्ट में कहा गया है, कि "प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने भारत सरकार से जुड़े एजेंटों द्वारा कनाडाई नागरिकों के खिलाफ लक्षित अभियान के बारे में यूनाइटेड किंगडम के प्रधानमंत्री सर कीर स्टारमर से बात की।"
यह घटनाक्रम दोनों देशों के बीच पहले से ही ठंडे संबंधों में एक बड़ी गिरावट है।
ओटावा में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान जस्टिन ट्रूडो ने कहा, "शुरुआत से ही, पिछली गर्मियों से, हमने अपने फाइव आईज भागीदारों, विशेष रूप से संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ मिलकर काम किया है, जहां उन्हें न्यायेतर हत्या के प्रयास के संबंध में भारत के समान व्यवहार का सामना करना पड़ा है।"
उन्होंने कहा कि हम अपने सहयोगियों के साथ मिलकर काम करना जारी रखेंगे, क्योंकि हम कानून के शासन के लिए एक साथ खड़े हैं।
अमेरिकी विदेश विभाग ने अभी तक अपने दो करीबी सहयोगियों और भागीदारों के बीच राजनयिक संकट पर कोई बयान नहीं दिया है।
वहीं भारतीय विदेश मंत्रालय ने कहा, कि "2018 में, भारत की उनकी (जस्टिन ट्रूडो) यात्रा, जिसका उद्देश्य वोट बैंक को लुभाना था, उनकी बेचैनी का कारण बनी। उनके मंत्रिमंडल में ऐसे व्यक्ति शामिल हैं जो भारत के संबंध में चरमपंथी और अलगाववादी एजेंडे से खुले तौर पर जुड़े हुए हैं। दिसंबर 2020 में भारतीय आंतरिक राजनीति में उनके हस्तक्षेप से पता चलता है, कि वे इस संबंध में किस हद तक जाने को तैयार हैं।"
ट्रूडो ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा कि यह स्थिति बेहद 'अवांछनीय' है।
जस्टिन ट्रूडो के भारत पर सनसनीखेज आरोप
उन्होंने कहा, "हम नहीं चाहते, कि कनाडा के लोगों को उनके समुदायों और उनके घरों में हिंसा का सामना करना पड़े, बल्कि हम यह भी नहीं चाहते कि भारत के साथ संबंधों में भी तनाव पैदा हो।"
उन्होंने कहा, कि "इसलिए पिछले सप्ताह हमने अपनी सुरक्षा एजेंसियों, राजनयिकों और पुलिस एजेंसियों के माध्यम से भारत सरकार से संपर्क किया, ताकि इस गहरे मतभेद को दूर करने का कोई रास्ता निकाला जा सके... कनाडा के लोगों की सुरक्षा की जा सके... और भारत और कनाडा के बीच अच्छे संबंधों को नष्ट न किया जाए।"
उन्होंने आगे आरोप लगाते हुए कहा, "दुर्भाग्य से, भारत ने हमारे साथ काम करने का विकल्प नहीं चुना है। उन्होंने इस सरकार के खिलाफ व्यक्तिगत हमले करने, उसे नकारने, पीछे हटाने और हमारी एजेंसियों और हमारे संस्थानों की ईमानदारी पर सवाल उठाने का विकल्प चुना है, और हमें कनाडाई लोगों की सुरक्षा के लिए जवाब देना पड़ा है।"
ट्रूडो ने आरोप लगाया, "मेरा मानना है कि भारत ने कनाडाई लोगों पर हमला करने, उन्हें अपने घर में असुरक्षित महसूस कराने और इससे भी ज्यादा हिंसा और यहां तक कि हत्या की घटनाओं को अंजाम देने के लिए अपने राजनयिकों और संगठित अपराध का इस्तेमाल करके एक बड़ी गलती की है। यह अस्वीकार्य है।"
ट्रूडो ने आगे कहा, कि उन्होंने पिछले सप्ताह इस संबंध में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की और उनसे बात की।
उन्होंने कहा, कि "जैसा कि संघीय रॉयल कैनेडियन माउंटेड पुलिस (RCMP) कमिश्नर ने पहले कहा था, उनके पास स्पष्ट और मजबूत सबूत हैं, कि भारत सरकार के एजेंट ऐसी गतिविधियों में शामिल रहे हैं और अभी भी शामिल हैं जो सार्वजनिक सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा हैं, जिसमें गुप्त सूचना एकत्र करने की तकनीक, दक्षिण एशियाई कनाडाई लोगों को लक्षित करने वाला बलपूर्वक व्यवहार और हत्या सहित एक दर्जन से अधिक धमकी भरे और हिंसक कृत्यों में शामिल होना शामिल है।"
उन्होंने दावा किया, "भारत से बार-बार अनुरोध करने के बावजूद, उसने सहयोग नहीं करने का फैसला किया है।"
जस्टिन ट्रूडो पर भारत का पलटवार
वहीं, जस्टिन ट्रूडो के आरोपों पर भारतीय विदेश मंत्रालय (MEA) ने एक बयान में कहा, कि भारत के पास ट्रूडो सरकार द्वारा भारत के खिलाफ उग्रवाद, हिंसा और अलगाववाद को समर्थन दिए जाने के जवाब में आगे कदम उठाने का अधिकार है।
एमईए ने कहा कि पीएम ट्रूडो की भारत के प्रति शत्रुता लंबे समय से देखी जा रही है।
भारत ने ट्रूडो के इन आरोपों को खारिज कर दिया है और कनाडाई राजनयिकों को 19 अक्टूबर को रात 11:59 बजे तक या उससे पहले देश छोड़ने के लिए कहा है।
फाइव आइज क्या है? What is Five Eyes
फाइव आईज का मलतब पांच खुफिया तंत्रों के बीच सहयोग का गठबंधन है, यानी पांच देशों के खुफिया विभागों की आपसी तालमेल और नेटवर्क का सहयोग। ये पांच देश कनाडा के साथ अमेरिका, आस्ट्रेलिया, ब्रिटेन और न्यूजीलैंड हैं।
इन सभी देशों के अपने अपने स्वतंत्र खुफिया तंत्र हैं। लेकिन स्वतंत्र इकाई होते हुए भी ये सभी आपस में एक मजबूत सहयोग और तालमेल रखते हैं और एक दूसरे के लिए जरूरी सूचनाओं का आपस में आदान प्रदान करते रहते हैं। इन पांचों देशों की खुफिया एजेंसियां एक दूसरे देश के कानून, शासन के सामान्य सिद्धांत और साझा मुद्दों पर नजर रखते हैं और आवश्यक जानकारी तुरंत एक दूसरे तक पहुंचाते हैं। इनके आपसी समन्वय को ही फाइव आईज कहा जाता है।
फाइव आइज अलायंस की जरूरत विश्व युद्ध के समय हुई जब ब्रिटेन और अमेरिका ने जर्मन और जापानी कोड को तोड़ने के बाद गुप्त जानकारी साझा करने का फैसला लिया। अमेरिका और ब्रिटेन की इस साझा कोशिश में कनाडा 1949 में शामिल हुआ, और बाद में न्यूजीलैंड और ऑस्ट्रेलिया 1956 में शामिल हुए।
फाइव आइज अलायंस के सभी सदस्य अपने और अलायंस देश की खुफिया जानकारी साझा करने के साथ साथ सुरक्षा चुनौतियों के प्रति भी एक दूसरे को सचेत करते रहते हैं। खास कर चीन के उदय और उसके मजबूत होने के बाद से फाइव आईज एलायंस ज्यादा सक्रिय हैं।












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