दुनिया में सबसे ज्यादा आबादी वाला देश तो बन गये, क्या 2030 तक $2 ट्रिलियन एक्सपोर्ट लक्ष्य कर पाएंगे हासिल?
एक्सपर्ट्स का कहना है, कि चूंकि कंपनियां चीन से बाहर अपने कारोबार और निवेश में विविधता लाने पर विचार कर रही हैं, इसलिए भारत लाभ लेने के लिए अच्छी स्थिति में है।

India have 2.9m more people than China: संयुक्त राष्ट्र ने ताजा रिपोर्ट जारी करते हुए भारत को दुनिया का सबसे ज्यादा आबादी वाला देश बता दिया है। यानि, अब चीन नहीं, बल्कि भारत जनसंख्या के लिहाज से दुनिया का सबसे ज्यादा जनसंख्या वाला देश बन गया है। संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक, अब भारत की आबादी 142 करोड़ 86 लाख हो गई है। यानि, चीन के मुकाबले भारत की आबादी करीब 29 लाख ज्यादा हो गई है।
लेकिन, सबसे ज्यादा आबादी वाला देश बनने के साथ ही सवाल ये उठ रहे हैं, कि क्या हम उसी रफ्तार से विकास के रास्ते पर चल पाएंगे। आज जब संयुक्त राष्ट्र ने भारत को आधिकारिक तौर पर दुनिया का सबसे ज्यादा आबादी वाला देश घोषित कर दिया है, तो आईये समझने की कोशिश करते हैं, कि आखिर भारत 2 ट्रिलियन डॉलर का एक्सपोर्ट करने वाला देश, क्या 2030 तक बन पाएगा?
भारत कब तक बन पाएगा एक्सपोर्ट किंग?
भारत सरकार की विदेश नीति-2023 में साल 2030 तक भारत के निर्यात को बढ़ाकर 2 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। यह आंकड़ा, लगभग इटली के 2022 की जीडीपी या भारत के 2014 के जीडीपी के आकार के बराबर है। इसका मतलब ये हुआ, कि 2023 में भारत का जो निर्यात है, उसके मुकाबले 2.6 गुना की छलांग लगाने के बाद हम 2 ट्रिलियन डॉलर का निर्यात अर्थव्यवस्था वाला देश बन पाएंगे।
ये अनुमान इस दशक के अंत तक भारत की जीडीपी वृद्धि की उम्मीदों से थोड़ा ज्यादा हैं, क्योंकि भारत का लक्ष्य अगले दो सालों में जर्मनी और अगले चार सालों में जापान को पीछे छोड़ते हुए दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था भी बनना है। लिहाजा, इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए भारत के निर्यात लक्ष्य की कल्पना को साकार करना होगा और उद्यमियों, व्यवसायों के साथ विश्वास का रिश्ता बहाल करने के साथ साथ देश में व्यापार करने की शक्ति को बढ़ाना होगा।

भारत के वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल की ये परिकल्पना पीएम मोदी की कल्पना को ही आकार देता है और इस लिहाज से देखें, तो इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए भारत सरकार के कई अंग एक साथ मिलकर काम कर रहे हैं।
उदाहरण के लिए देखें, तो निर्यात को बढ़ाने की जिम्मेदारी निर्यातकों को दी गई है, ना किया अफसरशाही को और ये सरकार के बड़े कैनवास पर पॉलिसी एक्शन को दिखाता है। इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी के जरिए मैनुअल काम काज को हटाया जा रहा है, जिसे इनकम टैक्स डिपार्टमेंट के कामकाज में आए बदलाव से समझा जा सकता है। वहीं, इसे दूसरे उदाहरण से ऐसे समझा जा सकता है, कि पहले कोई सामान किस देश में बना है, इसका सर्टिफिकेट जारी करने की जिम्मेदारी सरकारी अधिकारियों को थी, जबकि अब कंपनियों को खुद ही इसे वेरिफआई करने की छूट दे दी गई है। ये बहुत बड़ा कदम है, क्योंकि इस कदम से एक्सपोर्ट-इम्पोर्ट में कई हफ्तों के समय का बचत होता है और लेनदेन की लागत कम हो जाती है।
ई-कॉमर्स में भौगोलिक स्थिति पर ध्यान
भारत की तरफ से ई-कॉमर्स में विस्तार पर काफी ज्यादा ध्यान दिया गया है और 2030 तक 200 से 300 अरब डॉलर तक ई-कॉमर्स निर्यात लक्ष्य को हासिल करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए FTP2023 को तैयार किया गया है, जो ई-कॉमर्स हब और उनकी बैकएंड प्रक्रियाओं को स्थापित करने के लिए एक रोडमैप तैयार करता है, जैसे भुगतान समाधान, पुस्तक -कीपिंग, रिटर्न पॉलिसी और एक्सपोर्ट एंटाइटेलमेंट। इस नीति का लक्ष्य भविष्य के भारत को ई-कॉमर्स का किंग बनाना है।
भारत सरकार ने जो लक्ष्य रखा है, उस हिसाब से अगले सात सालों में 12 प्रतिशत नॉमिनल जीडीपी ग्रोथ रेट के हिसाब को (7-8 प्रतिशत वास्तविक जीडीपी ग्रोथ रेट और 4-5 प्रतिशत महंगाई दर) मानते हुए, भारत की जीडीपी 2030 तक 3.31 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर से बढ़कर 7.3 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर हो जानी चाहिए।
लिहाजा, इन सात सालों में भारत ने जो लक्ष्य रखा है, उसके मुताबिक भारत का निर्यात 2023 के 760 अरब डॉलर के मुकालबे बढ़कर 2 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर को हासिल करना है।

अगर भारत अपने इस लक्ष्य को हासिल करने के करीब आता है, तो ना सिर्फ निर्यात बढ़ जाएगी, बल्कि भारत की जीडीपी में निर्यात का हिस्सा भी 23 प्रतिशत से 27 प्रतिशत तक बढ़ जाएगी। यह 4 प्रतिशत अंक की वृद्धि से संभव है। लेकिन बहुत कुछ इस बात पर निर्भर करता है, कि भारत वैश्विक निर्यात का केंद्र बनने के लिए अंतरराष्ट्रीय राजनीति पर कैसे बातचीत करता है और भारत को आपूर्ति श्रृंखलाओं के विघटन से कितना लाभ हो सकता है, क्योंकि इस वक्त जो कंपनियां चीन से बाहर आ रही हैं, क्यां उन्हें भारत सरकार, भारत में लाने में कामयाब हो पाती है?
दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के लिए, 27 प्रतिशत निर्यात लक्ष्य हासिल करना एक प्रतिस्पर्धा है, क्योंकि फिलहाल ग्लोबल जीडीपी में इम्पोर्ट 28.9 प्रतिशत है, जबकि संयुक्त राज्य अमेरिका (यूएस) का 10.9 प्रतिशत, चीन 20.0 प्रतिशत और जापान 18.4 प्रतिशत है और जर्मनी 47.0 प्रतिशत एक्सपोर्ट है।

UNFPA की 'द स्टेट ऑफ वर्ल्ड पॉपुलेशन रिपोर्ट, 2023', जिसका शीर्षक '8 बिलियन लाइव्स, इनफिनिट पॉसिबिलिटीज: द केस फॉर राइट्स एंड चॉइस' है, की रिपोर्ट बुधवार जारी हुई है। इस रिपोर्ट के मुताबिक, भारत की जनसंख्या 142 करोड़ 86 लाख है। वहीं चीन की जनसंख्या 142 करोड़ 57 लाख ही है। लिहाजा, अगर भारत को इस विशालकाय आबादी के लिए रोजगार का सृजन करना है, उनके लाइफस्टाइल को बढ़ाना हो, युवाओं के लिए नौकरी के विकल्प बढ़ाने हैं, तो फिर निर्यात लक्ष्य को पूरा करना ही होगा।
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