India-US Ties: अमेरिका कैसे बन रहा है भारत का भरोसेमंद डिफेंस पार्टनर, इन दो नये डिफेंस एग्रीमेंट्स से जानिए

US-India agreements: इंडो-पैसिफिक में चीन को काउंटर करने के लिए भारत और अमेरिका के बीच डिफेंस पार्टनरशिप लगातार मजबूत होती जा रही है और भारत और अमेरिका ने आपूर्ति सुरक्षा व्यवस्था (SOSA) और संपर्क अधिकारियों की नियुक्ति के संबंध में समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं।

SOSA डील, दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय सैन्य समझौतों की श्रृंखला में नवीनतम है, जिसने पिछले एक दशक में दोनों देशों के बीच रक्षा और सुरक्षा सहयोग को बढ़ाया है।

India and US Strengthen Defence Ties

भारतीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की रविवार को खत्म हुई अमेरिका की चार दिवसीय आधिकारिक यात्रा के दौरान, दोनों देशों ने रक्षा औद्योगिक सहयोग के लिए 2023 यूएस-भारत रोडमैप के तहत जेट इंजन, मानव रहित प्लेटफॉर्म, युद्ध सामग्री और ग्राउंड मोबिलिटी सिस्टम सहित प्राथमिकता वाले सह-उत्पादन परियोजनाओं को आगे बढ़ाने पर सहमति व्यक्त की है।

भारत-अमेरिका में हुए दो नये समझौते क्या हैं?

SOSA: एसओएसए के तहत, अमेरिका और भारत नेशनल सिक्योरिटी को बढ़ावा देने वाली वस्तुओं और सेवाओं के लिए एक-दूसरे को पारस्परिक प्राथमिकता सहायता प्रदान करेंगे। अमेरिकी रक्षा विभाग (DoD) ने एक बयान में कहा है, "यह दोनों देशों को राष्ट्रीय सुरक्षा आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए अप्रत्याशित आपूर्ति श्रृंखला समस्याओं को हल करने के लिए, एक-दूसरे से आवश्यक इंडस्ट्रियल रिसोर्सेस हासिल करने में सक्षम करेगा।"

भारत, अमेरिका का 18वां SOSA साझेदार है और रक्षा विभाग के मुताबिक, SOSA अमेरिकी रक्षा व्यापार साझेदारों के साथ अंतर-संचालन को मजबूत करने के लिए एक महत्वपूर्ण तंत्र है, लेकिन यह कानूनी रूप से दोनों देशों के लिए गैर-बाध्यकारी होगा, यानि इनकी शर्तों को मानने के लिए दोनों ही देश बाध्य नहीं होंगे। लिहाजा अमेरिकी रक्षा विभाग, भारत के साथ एक और समझौता करने के लिए काम कर रहा है, जो पारस्परिक रक्षा खरीद (RDP) समझौता है, जो बाध्यकारी होगा।

RDP समझौतों का मकसद अमेरिकी सहयोगियों और अन्य दोस्त देशों के साथ पारंपरिक रक्षा उपकरणों की तैनाती, मानकीकरण, विनिमेयता और अंतर-संचालन को बढ़ावा देना है। अमेरिका ने अब तक 28 देशों के साथ आरडीपी समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं।

MOU ON LIAISON OFFICERS: संपर्क अधिकारियों की नियुक्ति के संबंध में किया गया ये समझौता ज्ञापन, भारत और अमेरिका के बीच सूचना-साझाकरण बढ़ाने और प्रमुख रणनीतिक अमेरिकी कमांडों में भारतीय सशस्त्र बलों के अधिकारियों को तैनात करने के लिए पहले लिए गए फैसलों पर एक डेवलपमेंट है। इसके तहत भारत, फ्लोरिडा में अमेरिकी विशेष अभियान कमान मुख्यालय में पहला संपर्क अधिकारी तैनात करेगा।

Joint US-India Declaration

भारत और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय रक्षा सहयोग के लिए नजरिए को सितंबर 2013 में रक्षा सहयोग पर संयुक्त यूएस-भारत घोषणा और यूएस-भारत रक्षा संबंध के लिए 2015 की रूपरेखा में शामिल किया गया था, जिसमें दोनों देशों ने इस क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के लिए खुद को प्रतिबद्ध किया था।

India and US Strengthen Defence Ties

2023 का रोडमैप क्या है?

पिछले साल जारी रक्षा औद्योगिक सहयोग के रोडमैप में SOSA और RDP समझौते को अंजाम देने की सोच रखी गई थी और अमेरिका ने भारतीय रक्षा उद्योग को वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में अटैच करने का समर्थन किया था, जिसके तहत अमेरिका ने जहाज और विमान की मरम्मत और रखरखाव के लिए इंडो-पैसिफिक में क्षेत्रीय केंद्र बनाने के लिए, नौसेना और समुद्री बुनियादी ढांचे को विकसित करने के लिए भारत को समर्थन दिया था।

रोडमैप में जिन प्राथमिकता वाले क्षेत्रों की पहचान की गई है, उनमें खुफिया, निगरानी और टोही (ISR), अंडरसी डोमेन जागरूकता, एयर कॉम्बैट और सपोर्ट, जिसमें एयरो इंजन, युद्ध प्रणाली और गतिशीलता शामिल हैं।

iCET: जनवरी 2023 में, रणनीतिक प्रौद्योगिकी साझेदारी और रक्षा औद्योगिक सहयोग का विस्तार करने के लिए महत्वपूर्ण और उभरती हुई प्रौद्योगिकी (iCET) पर अमेरिका-भारत पहल पर चर्चा की गई। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और जेक सुलिवन ने को-डेवलपमेंट और को-प्रोडक्शन सहित महत्वपूर्ण और उभरती हुई प्रौद्योगिकियों में ज्यादा सहयोग के अवसरों और इनोवेटिक इको-सिस्टम को बढ़ाने के लिए चर्चा की थी।

INDUS-X: जून 2023 में, प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी की अमेरिका की आधिकारिक राजकीय यात्रा के दौरान, DoD और रक्षा मंत्रालय ने भारत-अमेरिका रक्षा त्वरण पारिस्थितिकी तंत्र (INDUS-X) लॉन्च किया था, जिसने iCET के तहत रक्षा इनोवेशन पुल बनाने की प्रतिबद्धता को आगे बढ़ाया था।

FOUNDATIONAL AGREEMENTS: 2002 में, भारत और अमेरिका ने सैन्य सूचनाओं के आदान-प्रदान की सुविधा के लिए जनरल सिक्योरिटी ऑफ मिलिट्री इंफॉर्मेशन एग्रीमेंट (GSOMIA) पर हस्ताक्षर किए थे। 2016 और 2020 के बीच, दोनों पक्षों ने ऐसे चार और समझौतों पर हस्ताक्षर किए।

2016 के लॉजिस्टिक्स एक्सचेंज मेमोरेंडम ऑफ एग्रीमेंट (LEMOA) ने दोनों सेनाओं के बीच लॉजिस्टिक्स सहायता, आपूर्ति और सेवाओं के पारस्परिक प्रावधान के लिए बुनियादी नियम, शर्तें और प्रक्रियाएं स्थापित कीं।

2018 में, Communications Compatibility and Security Agreement (COMCASA), संचार और सूचना सुरक्षा समझौता ज्ञापन (CISMOA) का एक भारत-आधारित संस्करण, देशों के बीच सैन्य संचार को सुरक्षित करने, उन्नत रक्षा प्रणालियों तक पहुंच को सुविधाजनक बनाने और भारत को अपने मौजूदा अमेरिकी मूल के प्लेटफार्मों का मैक्सिमम उपयोग करने में सक्षम बनाने के लिए हस्ताक्षरित किया गया था।

2020 के बेसिक एक्सचेंज एंड कोऑपरेशन एग्रीमेंट (BECA) का मकसद मानचित्रों, समुद्री चार्ट और अन्य अवर्गीकृत इमेजरी और डेटा सहित सैन्य सूचनाओं को साझा करना है।

इसके अलावा, 2019 में, दोनों देशों के रक्षा उद्योगों के बीच क्लासीफाइड सूचनाओं के आदान-प्रदान को सुविधाजनक बनाने के लिए GSOMIA के लिए औद्योगिक सुरक्षा अनुलग्नक (ISA) पर हस्ताक्षर किए गए थे।

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