भारत और अमेरिका के बीच 'इनोवेशन ब्रिज' लॉन्च, जानें अजीत डोभाल का इस प्रोग्राम के पीछे क्या है मकसद?
भारत और अमेरिका के बीच साल 2008 में परमाणु समझौता हुआ था और उसी तरह का ऐतिहासिक समझौता इनोवेशन ब्रिज को भी माना जा रहा है।

India-US Innovation Bridge: साल 2008 में भारत और अमेरिका के बीच ऐतिहासिक परमाणु सहयोग समझौता हुआ था और आज करीब 14 सालों के बाद भारत और अमेरिका के बीत एक और ऐतिहासिक समझौता हुआ है, जिसका नाम है 'इनोवेशन ब्रिज'। ये समझौता दोनों देशों के बीच हुए तमाम समझौतों में काफी अहम स्थान रखता है और इस प्लान को तैयार करने में सबसे अहम भूमिका निभाई है, सबसे बड़े जासूस अजीत डोभाल ने। आईये समझते हैं, 'इनोवेशन ब्रिज' समझौता इतना अहम क्यों है और भारत को इससे क्या फायदा होने वाला है?

भारत-यूएस में 'इनोवेशन ब्रिज' समझौता
व्हाइट हाउस ने इस समझौते लेकर जो बयान जारी किया है, उसके मुताबिक, संयुक्त राज्य अमेरिका और भारत ने क्रिटिकल एंड इमर्जिंग टेक्नोलॉजी (iCET) बैठक पर अपनी यूएस-इंडिया पहल का समापन किया और एक नया "इनोवेशन ब्रिज" शुरू करने का फैसला किया है, जो दोनों देशों के डिफेंस स्टार्टअप को जोड़ेगा। क्रिटिकल एंड इमर्जिंग टेक्नोलॉजी (आईसीईटी) बैठक पर यूएस-इंडिया पहल का उद्घाटन राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और उनके अमेरिकी समकक्ष जैक सुलिवन ने किया है और इसमें यूएस की ओर से नेशनल एरोनॉटिक्स एंड स्पेस एडमिनिस्ट्रेशन (NASA) के डायरेक्टर भी शामिल हुए थे। राष्ट्रीय विज्ञान फाउंडेशन, राष्ट्रीय अंतरिक्ष परिषद के कार्यकारी सचिव, और राज्य विभाग, वाणिज्य विभाग, रक्षा विभाग और राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के वरिष्ठ अधिकारी भी दोनों देशों के बीच हुए इस समझौते के दौरान शामिल रहे।

अजीत डोभाल की है अहम प्लानिंग
भारतीय पक्ष से, संयुक्त राज्य अमेरिका में भारत के राजदूत, भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार, भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन के अध्यक्ष, दूरसंचार विभाग के सचिव, रक्षा मंत्री के वैज्ञानिक सलाहकार, रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन के महानिदेशक, और इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय और राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय के वरिष्ठ अधिकारियों ने इस समझौता के होने में अहम जिम्मेदारी निभाई है। iCET की घोषणा मई 2022 में अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा जारी संयुक्त बयान के मुताबिक की गई है, जिसमें घोषणा की गई थी, कि दोनों देशों की सरकारों, व्यवसायों और शैक्षणिक संस्थानों के बीच रणनीतिक प्रौद्योगिकी साझेदारी और रक्षा औद्योगिक सहयोग को बढ़ाया जाएगा और उनका विस्तार किया जाएगा।

क्या है iCET तंत्र?
iCET तंत्र के तहत अब भारत और अमेरिका इमर्जिंग टेक्नोलॉजी और को-डेवलपमेंट्स, को-प्रोडक्शन में ज्यादा से ज्यादा सहयोग बढ़ाएंगे और दोनों देश मिलकर नये अवसरों का निर्माण करेंगे। इस प्रोग्राम के तहत इनोवेटिव पारिस्थितिकी तंत्र में कनेक्टिविटी को गहरा किया जाएगा। इस कार्यक्रम के तहत दोनों देशों के बीच भविष्य के सहयोग के क्षेत्रों के रूप में जैव प्रौद्योगिकी, उन्नत सामग्री और दुर्लभ पृथ्वी प्रसंस्करण प्रौद्योगिकी के क्षेत्रों की भी पहचान की जाएगी। ये इसलिए भी अहम है, क्योंकि चीन लगातार दुर्लभ खनिजों के पीछे भागता रहता है, लिहाजा भारत और अमेरिका मिलकर अब उस तरफ कदम बढ़ाएंगे, जहां दुर्लभ खनिजों की कमी को पूरा किया जा सके। आपको बता दें, कि अगली आईसीईटी बैठक 2023 के अंत में नई दिल्ली में होगी।
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