भारत-चीन के बीच 20वें दौर की वार्ता संपन्न, दो दिन तक चली कोर कंमाडर लेवल की मीटिंग, फिर भी नहीं निकला समाधान
भारत और चीन ने पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर तनाव कम करने के लिए कोर कमांडर स्तर की 20वें दौर की वार्ता संपन्न हो गई है। यह वार्ता 9 और 10 अक्टूबर को लद्दाख सेक्टर के चुशुल-मोल्दो के पास हुई।
जानकारों के मुताबिक इस वार्ता का भी तत्काल कोई समाधान नहीं निकल पाया है। रक्षा और सुरक्षा प्रतिष्ठान के सूत्रों ने वार्ता के असफल होने को लेकर कहा कि दोनों पक्षों के सैनिक लगातार चौथी सर्दियों तक एलएसी के साथ आगे के क्षेत्रों में तैनात रहेंगे।

विदेश मंत्रालय की तरफ से जारी बयान के मुताबिक, इस मीटिंग में भारत-चीन के बीच लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (LAC) सहित अन्य मसलों पर बातचीत हुई। भारत के सैन्य अधिकारी ने चीन पर लद्दाख के देपसांग और डेमचोक से अपनी सेना हटाने का दबाव डाला।
भारत और चीन ने बॉर्डर इलाकों में जमीनी स्तर पर शांति बनाए रखने पर सहमति जताई है। विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में बताया कि दोनों देशों ने खुले और रचनात्मक तरीके से बातचीत की और अपने विचारों को साझा किया।
सेना की ओर से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, हालांकि चीन द्वारा जारी बयान में यह उल्लेख नहीं किया गया कि यह एक संयुक्त बयान था। यहां तक कि संयुक्त बयान के मामले में भी, इसे हमेशा पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) ही जारी करती है।
भारत की तरफ से 20वें दौर की बातचीत का नेतृत्व 14-कॉर्प्स कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल राशिम बाली ने किया। वहीं, चीनी पक्ष की अगुआई साउथ शिनजियांग मिलिट्री डिस्ट्रिक्ट चीफ ने किया।
यह दूसरी बार है जब भारत-चीन के बीच कोर कमांडर लेवल की मीटिंग दो दिनों तक चली है। इससे पहले 13 और 14 अगस्त को 19वें राउंड की मीटिंग में दोनों देश के बीच पूर्वी लद्दाख में LAC पर विवाद को हल करने पर सहमति बनी थी।
भारत हमेशा से कहता रहा है कि जब तक बॉर्डर इलाकों में शांति नहीं होगी तब तक चीन के साथ उसके संबंध सामान्य नहीं हो सकते। भारत उन क्षेत्रों में अप्रैल 2020 तक की यथास्थिति की बहाली की मांग कर रहा है, जहां मई 2020 से तनाव देखा गया था, इसके अलावा देपसांग मैदानों सहित पहले की असहमतियों का समाधान भी किया गया था।












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