अमेरिका की कठपुतली बनकर भारत वैश्विक शक्ति बनना चाहता है- चीन

Posted By: Amit J
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बीजिंग। अमेरिकी डिफेंस सेक्रेटरी जिम मेटिस ने हाल ही में भारत की यात्रा की यात्रा की थी, जहां दोनों देशों के बीच डिफेंस कोऑपरेशन को लेकर समझौता हुआ। इसको लेकर चीनी सरकार का मुखपत्र का ग्लोबल टाइम्स में आर्टिकल पब्लिश हुआ है, जिसे जिम मेटिस की भारत यात्रा को सिर्फ एक मजाक बताते हुए कहा है कि दोनों देशों के रिश्तें हकीकत से कोसों दूर है। ग्लोबल टाइम्स ने तर्क देते हुए कहा कि भारत और यूएस के रिश्ते इतने मजबूत नहीं है, जितनी भारत आवाज करता हैं। उन्होंने भारत के वैश्विक शक्ति बनने पर सवाल खड़े किए हैं।

US की कठपुतली बनकर भारत वैश्विक शक्ति बनना चाहता है-चीन
  • ग्लोबल टाइम्स के अनुसार, अमेरिका और पाकिस्तान संबंधों ने हमेशा ही भारत के अविश्वास को बढ़ाने का काम किया है। उनके अनुसार, अमेरिका कभी भी पाकिस्तान को अलग-थलग करने की कोशिश नहीं करेगा, क्योंकि इस देश के साथ यूएस हमेशा से ही महत्वपूर्ण जियोपोलिटिकल रिलेशन को बनाए रखना चाहता है।
  • चीनी मीडिया ग्लोबल टाइम्स ने भारत-अमेरिका के बीच रणनीतिक साझेदारी के बारे में संदेह व्यक्त किया है। उनके अनुसार, कुछ भारतीयों को लगता है कि यूएस और भारत के बीच अच्छी साझेदारी होने के बावजूद भी नई दिल्ली को वो लाभ नहीं मिल पा रहा है जो असल में मिलना चाहिए। ग्लोबल टाइम्स के मुताबिक चीन और पाकिस्तान के कथित धमकियों के बावजूद भी अमेरिका कुछ कर नहीं पा रहा है।
  • भारत का उद्देश्य एक वैश्विक शक्ति बनना है और इसलिए दोनों देशों के बीच खुले तौर पर डिप्लोमेटिक स्ट्रेटेजी पर हस्ताक्षर हुए है। भारत करीबी साझेदारी को नजरअंदाज कर रहा है अमेरिका के साथ सहयोग से लाभ उठाने की कोशिश कर रहा है। भारत जब पूरी तरह अमेरिका पर ही निर्भर है तो ऐसे में वैश्विक शक्ति बनने का सपना एक मजाक बन जाएगा।
  • ग्लोबल टाइम्स के अनुसार, अमेरिका आर्थिक और क्षेत्रीय मामलों में भारत के साथ पूरी तरह से संतुष्ट नहीं है, इसलिए भारत के साथ हर कदम सतर्कता से लेता है। ग्लोबल टाइम्स का मानना है कि असल में अमेरिका तब तक संतुष्ट नहीं होगा, जब तक कि भारत उसकी कठपुतली बनकर नहीं रह जाता।
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English summary
India-America defense cooperation: US will never be satisfied with India until to be its pawn
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