इमरान ख़ान, भारत से परमाणु युद्ध की आशंकाओं पर बोले

इमरान ख़ान
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पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान ने कहा है कि अगर भारत पाकिस्तान पर एयर स्ट्राइक करता है तो उसका जवाब उसी अक्रामकता से दिया जाएगा.

क़तर के न्यूज़ चैनल अल-जज़ीरा को दिए एक इंटरव्यू में इमरान ख़ान ने कहा, ''अगर भारत की फासीवादी बीजेपी सरकार ऐसा करती है तो मुझे डर है कि दो परमाणु शक्तियां आमने-सामने होंगी.''

अल-जज़ीरा को दिए एक इंटरव्यू में, इमरान ख़ान ने भारत और पाकिस्तान के बीच परमाणु युद्ध की संभावनाओं पर कहा, ''अगर भारत एयर स्ट्राइक करता है तो इसका जवाब उसी अक्रमाक रवैये से दिया जाएगा, जैसा फ़रवरी 2019 में दिया गया था. बीजेपी की फासीवादी सरकार अगर इस तरह का हमला करती है, जैसा कि वह पहले भी कर चुकी हैं तो मुझे डर है की दो परमाणु शक्तियां आमने-सामने होंगी और इसके परिणाम भयावह होंगे, कोई कट्टर दिमाग़ ही ऐसा सोच सकता है.''

उन्होंने ये भी कहा कि भारत के लोग संवादनशील और समझदार हैं लेकिन उन पर राज कट्टरपंथी लोग कर रहे हैं.

भारत प्रशासित कश्मीर के बारे में बात करते हुए उन्होंने कहा कि हालात जेल की तरह है. सेना के डर के साए में 80 लाख कश्मीरी खुली जेल में रहने के लिए मजबूर हैं.

इमरान ख़ान ने कहा, ''हमने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद से लेकर इस्लामिक देशों के फ़ोरम पर कश्मीर के मुद्दे को उठाया है, लेकिन हर इस्लामिक देश के भारत के साथ अपने व्यक्तिगत संबंध हैं, तो हम उनसे ज़्यादा उम्मीद नहीं रख सकते लेकिन पाकिस्तान का ये कर्तव्य है. हम कश्मीरियों के लिए आवाज़ उठाते रहेंगे.''

https://www.youtube.com/watch?v=-Zqi_NeeynE

इमरान ख़ान ने कहा कि वो कश्मीर मुद्दे को हर मंच पर उठाएंगे.

अफ़ग़ानिस्तान के संकट पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि वो देश भूखमरी का सामना कर रहा है और अमेरिका को उसकी मदद करनी चाहिए

उन्होंने कहा "मुझे समझ में नहीं आता कि अमेरिका अफ़ग़ानिस्तान में क्या लक्ष्य हासिल करना चाहता था. उन्होंने तथाकथित आतंकवाद के ख़िलाफ़ युद्ध के नाम पर 20 साल तक देश पर क़ब्ज़ा किए रखा था."

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भुट्टो और शरीफ़ परिवार आर्थिक संकट के लिए ज़िम्मेदार

इमरान ख़ान ने भुट्टो और शरीफ़ परिवार पर देश को तबाह करने और देश को वर्तमान संकट में ढकेलने का आरोप लगाया है.

उन्होंने कहा कि ''पाकिस्तान संसाधनों के मामले में समृद्ध था लेकिन भुट्टो और शरीफ़ परिवारों ने इसका ग़लत इस्तेमाल किया.'

''हमारी सरकार चाहती है कि पाकिस्तान एक समृद्ध देश बने और हम दो अति-अमीर परिवारों के ख़िलाफ़ लड़ रहे हैं.''

इमरान ख़ान ने आरोप लगाया कि दोनों परिवार अपने वंश को स्थापित करने के लिए काम कर रहे थे और देश के सामने खड़ी वर्तमान समस्या के लिए ज़िम्मेदार हैं.

उन्होंने कहा,"भ्रष्टाचार एक ऐसी चीज़ है जो किसी देश को तबाह कर देती है. ग़रीब देश इसलिए ग़रीब नहीं हैं क्योंकि उनके पास संसाधनों की कमी है बल्कि इसलिए हैं क्योंकि उनका नेतृत्व भ्रष्ट है."

''अगर मेरे मंत्रियों पर भ्रष्टाचार के आरोप लगेगा तो मैं ख़ुद पारदर्शी जांच कराऊंगा.''

पीएम इमरान ख़ान ने कहा कि ब्रिटेन में अपने लंबे प्रवास के दौरान,वह पश्चिम की राजनीतिक व्यवस्था से अच्छी तरह वाकिफ़ हुए और उन्होंने हमेशा पश्चिमी शक्तियों की राजनीति की आलोचना की है.

भारत-पाकिस्तान
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पाकिस्तान के पास भारत से ज़्यादा परमाणु बम

भारत और पाकिस्तान में पिछले दस वर्षों में परमाणु बमों की संख्या दोगुनी से अधिक हो गई है और हाल के वर्षों में पाकिस्तान ने भारत की तुलना में अधिक परमाणु बम बनाए हैं.

दुनिया में हथियारों की स्थिति और वैश्विक सुरक्षा का विश्लेषण करने वाले स्वीडन की संस्था 'स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट' ने 2019 की रिपोर्ट में यह बात कही थी.

इंस्टिट्यूट के परमाणु निरस्त्रीकरण, शस्त्र नियंत्रण और अप्रसार कार्यक्रम के निदेशक शेनन काइल ने बीबीसी को बताया था कि दुनिया में परमाणु हथियारों का कुल उत्पादन कम हो गया है, लेकिन दक्षिण एशिया में यह बढ़ रहा है.

उन्होंने कहा था, "वर्ष 2009 में हमने बताया था कि भारत के पास 60 से 70 परमाणु बम हैं. उस समय पाकिस्तान के पास करीब 60 परमाणु बम थे, लेकिन दस वर्षों के दौरान दोनों देशों ने अपने परमाणु बमों की संख्या दोगुनी से अधिक कर ली है."

https://twitter.com/BrkaQ8/status/1471940552040095750

शेनन काइल ने कहा था कि पाकिस्तान के पास अब भारत से अधिक परमाणु बम हैं. विभिन्न स्रोतों से मिली जानकारी के आधार पर हम कह सकते हैं कि भारत में अब 130 से 140 परमाणु बम हैं, जबकि पाकिस्तान के पास 150 से 160 परमाणु बम हैं.

शेनन काइल ने कहा था कि वर्तमान समय में भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव अपने चरम पर है और यह परमाणु बमों की संख्या बढ़ाए जाने की ओर इशारा करता है.

हालांकि दोनों देशों के बीच परमाणु हथियारों की ऐसी कोई दौड़ नहीं है जो शीत युद्ध के दौरान अमरीका और रूस के बीच देखने को मिली थी.

उन्होंने कहा था, "मैं इसे स्ट्रैटेजिक आर्मी कॉम्पिटिशन या रिवर्स मोशन न्यूक्लियर आर्मी रेस कहूंगा. मुझे लगता है कि निकट भविष्य में इस स्थिति में कोई बदलाव देखने को नहीं मिलेगा."

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