बदले की राजनीति का अखाड़ा बना पाकिस्तान, शहबाज ने इमरान को मुकदमों से लादा, जानें कितने FIR?
इमरान खान जब खुद प्रधानमंत्री थे, उस वक्त उन्होंने भी विपक्षी नेताओं को चैन से नहीं रहने दिया था। दर्जनों बड़े विपक्षी नेताओं को उन्होंने सही या गलत आरोपों में जेल भेज दिया था।

Imran Khan Fir: पाकिस्तान की राजनीति में बदला लेने की खतरनाक प्रथा चली हुई है और देश में जिस नेता के पास भी सत्ता आती है, वो अपने विरोधियों को कानून की जाल में फंसाकर बांधने की फिराक में रहता है। फिलहाल, पाकिस्तान की राजनीति एक शख्स के इर्द-गिर्द ही घूम रही है और वो नेता हैं पूर्व स्टार क्रिकेटर इमरान खान, जिन्हें शहबाज शरीफ की सरकार ने दर्जनों मुकदमों में बांध दिया है। हालात ये हैं, कि इमरान खान के चुनाव लड़ने पर प्रतिबंध लग चुका है और किसी भी दिन उन्हें गिरफ्तार कर जेल भेजा जा सकता है।

मुकदमे पर इमरान ने झूठ बोला?
द न्यूज ने गुरुवार को अपनी एक रिपोर्ट में बताया है, कि पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) के चेयरमैन इमरान खान का 76 मुकदमों का दावा गलत है और पूर्व प्रधानमंत्री के खिलाफ पाकिस्तान के अलग अलग हिस्सों में 40 से कम मुकदमे दर्ज किए गये हैं। इमरान खान ने दावा किया था, कि उनके खिलाफ पाकिस्तान में 76 FIR हैं, लेकिन द न्यूज का कहना है, कि इमरान खान झूठ बोल रहे हैं, उनके खिलाफ 40 से कम मुकदमे हैं। इमरान खान के खिलाफ जो मुकदमे दर्ज हैं, उनमें पुलिस और संघीय जांच एजेंसी (एफआईए) के मामले और पीटीआई प्रमुख के खिलाफ चल रही पाकिस्तान के चुनाव आयोग (ईसीपी) की कार्यवाही भी शामिल है। वहीं, जब इमरान खान के विवादित दावे को लेकर उनके करीबी फवाद चौधरी से सवाल पूछा गया, कि आखिर इमरान खान ने अपने ऊपर दर्ज मुकदमों को लेकर ऐसा भ्रामक दावा क्यों किया, तो पाकिस्तान के पूर्व सूचना मंत्री ने जवाब दिया, इमरान खान ने भी अपने अधिकारों को लेकर मुकदमा किया हुआ है और उनके खिलाफ भी मुकदमे किए गये हैं और इमरान खान ने दोनों मुकदमों को जोड़कर वो बयान दिया था।

इमरान खान पर कितने मुकदमे?
द न्यूज के मुताबिक, इमरान खान ने अलग अलग सरकारी विभागों और अधिकारियों के खिलाफ 19 मामलों में याचिकाकर्ता हैं, जबकि 37 ऐसे मामले हैं, जिनमें इमरान खान सीधे तौर पर शामिल हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, पूर्व प्रधानमंत्री के खिलाफ कुल 21 प्राथमिकी दर्ज हैं, जिनमें से 11 प्राथमिकी पिछले साल 25 मई को और आठ मुकदमे 26 मई को दर्ज की गई थीं। बाकी तीन एफआईआर पिछले साल 8 अगस्त को दर्ज की गईं। इनमें से ज्यादातर मुकदमे रैली के दौरान इमरान खान की बयानबाजी से जुड़े हैं, जिनमें उन्होंने देश की सेना, सरकार, अदालत और अधिकारियों के खिलाफ बयान दिए थे। द न्यूज ने अपनी रिपोर्ट में कहा है, कि इमरान खान के खिलाफ हालिया दिनों में भी एफआईआर दर्ज किए गये हैं, जिसे रिपोर्ट में शामिल नहीं किया गया है।
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मुकदमों के जाल में घिरे इमरान खान
इमरान खान के खिलाफ जो मुकदमे चल रहे हैं, उनमें से पांच मामले सुप्रीम कोर्ट में चल रहे हैं। ये मामले पीटीआई प्रमुख ने संघीय सरकार के खिलाफ दायर किए थे। इस्लामाबाद उच्च न्यायालय में, इमरान खान ने पाकिस्तान इलेक्शन कमीशन के खिलाफ दो मामले दायर किए हैं, जबकि दो उनके खिलाफ एक ही अदालत में दर्ज हैं। लाहौर उच्च न्यायालय में इमरान खान ने कुल छह मामले दायर किए हैं, जिनमें चार संघीय सरकार के खिलाफ और दो इलेक्शन कमीशन के खिलाफ हैं। हालांकि, लाहौर हाईकोर्ट में इमरान खान के खिलाफ केवल दो मामले चल रहे हैं। वहीं, पेशावर हाईकोर्ट में इमरान खान के खिलाफ कुल तीन मामले विचाराधीन हैं, जिसमें दो मामलों में इमरान खान आरोपी हैं, जबकि एक मामले में वो याचिकाकर्ता हैं। वहीं, इस्लामाबाद जिला अदालत में पूर्व प्रधानमंत्री के खिलाफ तीन मामले हैं। वहीं, इलेक्शन कमीशन ने भी इमरान खान के खिलाफ पांच मामले दर्ज करा रखे हैं, जिनमें विदेशी फंडिंग का मामला, एक केपी हेलीकॉप्टर मामला, अध्यक्ष पद से हटाने का मामला और आयोग के खिलाफ अनुचित भाषा का इस्तेमाल करने का अवमानना का मामला शामिल है।

मुकदमों से पीछा छुड़ा पाएंगे इमरान?
पाकिस्तान की फेडरल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (FIA) ने भी इमरान खान के खिलाफ दो मामले दर्ज करा रखे हैं और ये दोनों मामले साइबर विवाद से संबंधित हैं। इसके अलावा, आतंकवाद विरोधी अदालतों में इमरान खान के खिलाफ तीन मुकदमे चल रहे हैं। एफआईए बैंकिंग क्राइम कोर्ट इस्लामाबाद ने भी इमरान के खिलाफ एक मामला दर्ज कर रखा है। आपको बता दें, कि इस हफ्ते की शुरुआत में पीटीआई प्रमुख ने ट्विटर पर दावा किया था, कि उनके खिलाफ 76 मामले दर्ज किए गए हैं। जिसके बाद सवाल ये उठ रहे हैं, कि क्या इमरान खान का मुकदमों से पीछा छूट पाएगा या फिर मुकदमों की बेड़ियां उन्हें जेल की कोठरी तक खींच लाएगा। इमरान खान ने अपने ट्वीट में कहा था, कि "मेरे खिलाफ 76 मामले हैं, जिनमें आतंकवाद, ईशनिंदा और राजद्रोह भी शामिल हैं। देशद्रोह के मामले में न तो अधिकारी का नाम है और न ही संस्था की पहचान है।" पीटीआई प्रमुख ने आरोप लगाया था, कि देश के ऊपर 'अपराधियों के समूह' का कब्जा है, जिनमें "बुद्धिमत्ता, मोरेलिटी और इथिक्स" नहीं है।












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