कोरोना के खिलाफ बनी एंटीबॉडी शरीर में कितने दिन तक रहती है? भारतीय मूल के प्रोफेसर की रिसर्च में बड़ा दावा
नई दिल्ली। कोरोना वायरस के संक्रमण से पूरी दुनिया इस समय जूझ रही है। कोरोना को लेकर सीरो सर्वे और दूसरे अध्ययनों में बहुत से लोगों के शरीर में कोरोना वायरस के एंटीबॉडी पाई गई है। शरीर में एंटीबॉडी बन जाने का मतलब ये हुआ कि इन लोगों को कोरोना संक्रमण हो चुका है और उनके शरीर ने उसके खिलाफ लड़ने की क्षमता विकसित कर ली है। इसके बाद ये सवाल लगातार है कि क्या एक बार एंटीबॉडी बन जाने के बाद कभी कोरोना नहीं होगा। इसको लेकर भारतीय मूल के अमेरिकी दीप्त भट्टाचार्य ने रिसर्च की है।

5 महीने तक रहती है शरीर में एंटीबॉडी
अमेरिका की यूनिवर्सिटी ऑफ एरिजोना में एसोसिएट प्रोफेसर भारतीय मूल के दीप्त भट्टाचार्य के नेतृत्व में ये शोध किया गया है। इसमें निष्कर्ष निकाल कर आया है कि SARS-CoV-2 वायरस के खिलाफ एंटीबॉडी किसी इंसान के शरीर में लगभग पांच महीने तक रहती है। यानी एक बार एंटीबॉडी बनने के पांच महीने के बाद फिर से व्यक्ति संक्रमण की चपेट में आ सकता है।

छह हजार लोगों पर रिसर्च
इस रिसर्च में छह हजार लोगों के एंटीबॉडी सैंपल लिए गए, जो कोरोना से संक्रमित हुए। रिसर्च पर प्रोफेसर भट्टाचार्य ने कहा, कोविद-19 के खिलाफ इम्युनिटी के बारे में लगातार कई चिंताएं हैं। हमने इस अध्ययन में पाया है कि इम्युनिटी कम से कम पांच महीनों के लिए स्थिर है। उच्च गुणवत्ता वाले एंटीबॉडीज SARS-CoV-2 संक्रमण के पांच से सात महीने बाद खत्म हो रहे हैं।

आईसीएमआर का भी आया दोबारा कोरोना होने को लेकर बयान
भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के महानिदेशक ने कहा कि भारत में किसी भी व्यक्ति में दोबारा कोरोना वायरस संक्रमण की पहचान होने में लगने वाला समय 100 दिन का है। इसका मतलब ये कि बेशक कोरोना वायरस से बड़ी संख्या में लोग ठीक हो रहे हैं। भार्गव ने कहा कि विश्व स्वास्थ्य संगठन ने अभी ऐसी कोई सीमा नहीं बताई है लेकिन सरकार ने ये समयसीमा 100 दिन तय की है। उन्होंने कहा कि कोरोना से ठीक होने वाले व्यक्ति का 100 दिन के बाद दोबोरा संक्रमित होने का खतरा बढ़ जाता है।












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