भारत को वैक्सीन देंगे तो हमारे बच्चे फायदे में रहेंगे, UK के एक्सपर्ट को क्यों देनी पड़ी यह सलाह

नई दिल्ली, 23 मई: यूनाइटेड किंगडम सरकार में इम्यूनाइजेशन एडवाइजरी कमिटी के एक एक्सपर्ट ने अपनी सरकार से कहा है कि अगर ब्रिटेन भारत जैसे देशों में कोरोना की वैक्सीन भेजे तो इससे अपने देश के बच्चे ही फायदे में रहेंगे। दरअसल, इस समय कई अमीर देशों में बच्चों के टीकाकरण की होड़ शुरू हुई है और भारत में भी कुछ राजनेता इसको लेकर राजनीति शुरू कर चुके हैं। लेकिन, ऐसे समय मे ब्रिटेन के टीकाकरण के बड़े एक्सपर्ट को अपनी सरकार को ऐसी सलाह क्यों देनी पड़ी है, यह जानना बेहद दिलचस्प हो जाता है। एक्सपर्ट का कहना है कि भारत में इसबार जिस पैमाने पर कोविड-19 का संक्रमण हुआ है, उससे ब्रिटेन के लोग भी सुरक्षित नहीं हैं। इसलिए, भारत में टीकाकरण का काम आगे बढ़े यह उनके भी हित में है।

अपने बच्चों लिए भारत को दें वैक्सीन- ब्रिटिश एक्सपर्ट की सलाह

अपने बच्चों लिए भारत को दें वैक्सीन- ब्रिटिश एक्सपर्ट की सलाह

ब्रिटेन में वैक्सीनेशन एंड इम्यूनाइजेशन के ज्वाइंट कमिटी के सदस्य एडम फिन ने ब्रिटिश सरकार कहा है कि उसे यह समझना पड़ेगा कि कोविड महामारी वैश्विक संकट है और इसको लेकर विश्व स्तर पर ही सोचना पड़ेगा, सिर्फ अपने देश पर ध्यान देने से काम नहीं चलेगा। बीबीसी ब्रेकफास्ट से बातचीत में उन्होंने ब्रिटिश सरकार से कहा है कि वह अपने देश से भारत जैसे देशों में वैक्सीन भेजने पर विचार करे। उन्होंने कहा है, 'इस देश के बच्चों के लिए यह बुहत अच्छा रहेगा यदि वैक्सीन का इस्तेमाल बड़े स्तर पर संक्रमण को रोकने में किया जा सके जैसा कि भारत में हुआ है, जो कि इस देश तक पहुंच सकता है और उनको और उनकी स्कूलिंग के लिए खतरा पैदा कर सकता है।'

बच्चों में वैक्सीनेशन के लिए इंतजार करने की सलाह

बच्चों में वैक्सीनेशन के लिए इंतजार करने की सलाह

यूनाइटेड किंगडम में अबतक उसकी आबादी के 55 फीसदी से ज्यादा लोगों को कोविड-19 वैक्सीन की कम से कम एक डोज लगाई जा चुकी है और शनिवार को वहां के नेशनल हेल्थ सर्विस ने 32 और 33 साल के उम्र के युवाओं के लिए पहली डोज की बुकिंग खोल दी है। एनएचएस के मुताबिक इस चरण में करीब 11 लाख लोग वैक्सीनेशन के दायरे में आ जाएंगे। फिन ने यह भी कहा है कि अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि क्या बच्चों को वैक्सीनेशन की जरूरत है। उन्होंने कहा है,'मुझे लगता है कि हमें इंतजार करना चाहिए और देखना चाहिए। अबतक यह साफ नहीं हुआ है कि क्या हमें अपनी आबादी को जिस इम्यूनिटी के दायरे में लाना है,क्या वास्तव में उसमें बच्चों को भी टीका देने की आवश्यकता है।' बता दें कि ब्रिटेन में बच्चों के टीकाकरण पर लगभग इसी तरह की राय एस्ट्राजेनेका-ऑक्सफोर्ड वैक्सीन (कोविशील्ड) वैक्सीन विकसित करने वाले ऑक्सफोर्ड के वैज्ञानिक भी दे चुके हैं।

अमेरिकी में 12-15 साल के बच्चों का हो रहा है टीकाकरण

अमेरिकी में 12-15 साल के बच्चों का हो रहा है टीकाकरण

दूसरी तरफ अमेरिका में पहले ही 12 से 15 साल के बच्चों को फाइजर कंपनी की वैक्सीन लगाने की शुरुआत हो चुकी है। हालांकि, इसको लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आलोचनाएं भी शुरू हैं, क्योंकि निम्न और मध्यम आय वाले अनेकों देशों में इतनी वैक्सीन भी उपलब्ध नहीं हो पा रही है कि वह कम से कम अपने हेल्थ केयर वर्करों का ही पूरी तरह से टीकाकरण कर सकें। इन हालातों पर हाल ही में चिंता जताते हुए विश्व स्वास्थ्य संगठन के डायरेक्टर जनरल टेड्रोस अदनोम घेब्रेयेसस ने कहा है, 'जनवरी में मैंने एक संभावित नैतिक तबाही की आशंका के बारे में बात की थी। दुर्भाग्य से अब हम उसे होता देख रहे हैं।'

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