फैक्ट्री में जीव पैदा करने की ओर बढ़ा इंसान! बिना शुक्राणु दुनिया का पहला कृत्रिम भ्रूण विकसित, जानिए फायदे
नई दिल्ली, 5 अगस्त: कुछ दशक पहले जब पहले टेस्ट ट्यूब बेबी का जन्म हुआ था या डॉली नाम की भेड़ की क्लोन बनी तो दुनिया अचंभित रह गई थी। लेकिन, अब वैज्ञानिक तो सृष्टि की तरह फैक्ट्री में ही जीव पैदा करने की ओर अग्रसर हो गए हैं। हाल ही में इजरायली वैज्ञानिकों को इसी क्षेत्र में बड़ी सफलता मिली है। उन्होंने प्रयोगशाला के एक छोटे से बर्तन में ही भ्रूण विकसित कर दिया है, जिसके लिए ना तो कोई निषेचित अंडे लिए गए और ना ही किसी शुक्राणु की ही जरूरत पड़ी। मूल कोशिकाओं से ही पूर्ण भ्रूण विकसित कर दिया। जिस का दिल भी धड़क रहा था और ने मस्तिष्क ने भी पूरा आकार ले लिया था। आने वाले समय में यह शोध मेडिकल साइंस की दुनिया के लिए क्रांतिकारी साबित हो सकता है।

इजरायली वैज्ञानिकों ने स्टेम सेल से भ्रूण विकसित किया
मेडिकल साइंस को एक बहुत बड़ी सफलता मिली है। इजरायली वैज्ञानिकों ने दुनिया का पहला कृत्रिम भ्रूण विकसित कर लिया है। यह भ्रूण गर्भ के बाहर ही मूल कोशिका (स्टेम सेल) को कल्चर करके विकसित किया गया है। कमाल की बात ये है कि इस भ्रूण को विकसित करने के लिए ना तो शुक्राणु की आवश्यकता पड़ी है और ना ही इसके लिए निषेचित अंडों का उपयोग ही किया गया है। कोशिका से ही संपूर्ण जीव विकसित करने की दिशा में यह बहुत बड़ी खोज है।

मशीन में ही विकसित हुआ भ्रूण
यह शोध कृत्रिम भ्रूण मॉडल के आधार पर अंग प्रत्यारोपण के लिए कोशिकाओं और अंगों को विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। शोधकर्ताओं ने वही किया है, जिस तरह से गर्भ में भ्रूण विकसित होता है। लेकिन इसके लिए कृत्रिम उपकरणों का इस्तेमाल किया गया है और मूल कोशिकाओं को बीकर के अंदर नूट्रीअंट सौल्यूशन में रखकर लगातार घूमाते रखा गया। कुछ इस तरह से कि प्लेसेंटा तक पोषक तत्वों की आपूर्ति के लिए भौतिक रक्त प्रवाह निरंतर बनी रहे।

हमने बहुत बड़ी बाधा को दूर कर लिया- शोधकर्ता
यह शोध मेडिकल साइंस से जुड़े एक जर्नल में प्रकाशित हुआ है। टीम ने माउस के स्टेम सेल से भ्रूण को विकसित किया है जो कि प्रयोगशाला के एक खास तरह के बर्तन में वर्षों से कल्चर करके रखा गया था। वेइजमान वंडर वैंडर साइंस न्यूज एंड कल्चर में प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक रिसर्च टीम के हेड और वेइजमान के मोलेक्युलर जेनेटिक्स डिपार्टमेंट के प्रोफेसर जैकब हन्ना ने कहा, 'अब तक ज्यादातर शोध में, विशेष कोशिकाओं का उत्पादन करना या तो मुश्किल होता था या वे अलग हो जाते थे और प्रत्यारोपण के लिए अच्छी-संरचानाओं वाले उत्तक के तौर पर उपयुक्त नहीं हो पाते थे। हम इन बाधाओं को दूर करने में सफल हुए हैं।'

प्राकृतिक भ्रूण की तुलना में 95% समानता दिखी-रिपोर्ट
कृत्रिम भ्रूण 8.5 दिनों तक विकसित होते रहे और इस दौरान सभी प्रारंभिक अंग बन गए थे, जिसमें एक धड़कता हुआ दिल, ब्लड स्टेम सेल सर्कुलेशन, अच्छी आकार वाला मस्तिष्क, एक न्यूरल ट्यूब, और एक इंटेस्टाइनल ट्रैक्ट भी शामिल है। माउस के 20 दिनों की गर्भावधि के आधे से भी कम समय में। शोधकर्ताओं ने एक बयान में कहा है कि 'माउस के प्राकृतिक भ्रूण की तुलना में, सिंथेटिक मॉडल ने आंतरिक संरचनाओं के आकार और विभिन्न प्रकारों के सेल के जीन पैटर्न में 95 प्रतिशत समानता प्रदर्शित की। मॉडल में दिखे हर अंग ने कार्य करने में सक्षम होने का हर संकेत दिया।'

कृत्रिम भ्रूण के भविष्य में फायदे ?
टीम अब यह समझने की कोशिशों में जुट गई है कि स्टेम सेल को कैसे पता है कि उन्हें क्या करना है? वे अंगों में कैसे इकट्ठा होते हैं और भ्रूण के अंदर अपने निर्धारित स्थानों के लिए अपना रास्ता कैसे खोजते हैं? हन्ना के मुताबिक, 'क्योंकि हमारा सिस्टम गर्भ से अलग पारदर्शी है। इसकी वजह से ये मानव भ्रूण मॉडल के जन्म और उसके दोषों को दूर करने में सफल साबित हो सकता है।'(पहली-दूसरी तस्वीर सांकेतिक, बाकी वेइजमान इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस के यूट्यूब वीडियो से)












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