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कैसे ढूंढे जाते हैं रासायनिक हमलों के सबूत

मारियोपोल, यूक्रेन में जारी रूसी युद्ध से सबसे ज्यादा प्रभावित होने वाले शहरों में है. यूक्रेन के मुताबिक, रूसी घेरेबंदी में यहां अबतक करीब 21,000 लोग मारे गए हैं. यूक्रेन ने कहा है कि वह मारियोपोल पर जहरीली चीज गिराए जाने के आरोपों की जांच कर रहा है. मारियोपोल से आई इस तस्वीर में एक महिला क्षतिग्रस्त इमारत के पास बैठी हैं.

मास्को, 14 अप्रैल। रूस पर यूक्रेन में रासायनिक हथियारों के इस्तेमाल का आरोप लग रहा है. 12 अप्रैल को यूक्रेन ने बताया कि वह मारियोपोल पर जहरीली चीज गिराए जाने के आरोपों की जांच कर रहा है.यूक्रेन की उप रक्षामंत्री हन्ना मालियार ने कहा कि मुमकिन है फॉस्फोरस से बनी युद्ध सामग्री का इस्तेमाल किया गया हो. इससे भीषण जलन होती है, लेकिन यह रासायनिक हथियारों की श्रेणी में नहीं आता.

रासायनिक हथियारों के इस्तेमाल की आशंका के बीच एक अहम सवाल यह है कि सच का पता कैसे लगाया जाए. मारियोपोल पर अभी भी रूस का हमला जारी है. रूसी सेनाओं ने शहर को बंधक बनाया हुआ है. ऐसे में वहां के घटनाक्रम पर स्पष्ट जानकारी और इससे जुड़े तथ्य जमा करना बड़ी चुनौती है.शंकाओं, आरोपों और प्रत्यारोपों के बीच स्पष्ट जवाब मिलने में अभी समय लग सकता है.

ऑर्गनाइजेशन फॉर दी प्रोहिबिशन ऑफ केमिकल वीपन्स (ओपीसीडब्ल्यू) ने 12 अप्रैल को कहा कि वह मारियोपोल में रासायनिक हथियारों के इस्तेमाल से जुड़ी अपुष्ट खबरों से चिंतित है और यूक्रेन की स्थितियों पर बारीकी से नजर रख रहा है. उसने यह भी कहा कि रासायनिक हथियारों के इस्तेमाल या इन्हें उपयोग किए जाने की आशंका के मद्देनजर अगर कोई पक्ष उससे आग्रह करे, तो वह सहयोग के लिए भी तैयार है.

ओपीसीडब्ल्यू दुनिया में रासायनिक हथियारों का इस्तेमाल रोकने और इस प्रतिबंध को सुनिश्चित करने का काम करता है. 193 देश इसके सदस्य हैं, जिनमें रूस और यूक्रेन भी शामिल हैं. रासायनिक हथियारों को खत्म करने से जुड़े विस्तृत प्रयासों के लिए इसे 2013 में नोबेल शांति पुरस्कार भी मिला था.

कौन कर सकता है जांच?

रासायनिक हथियारों के इस्तेमाल की आशंका से जुड़ी जांच में शुरुआती भूमिका यूक्रेन की अपनी जांच एजेंसियों की होगी. इसके अलावा दूसरे देशों के भी जांच दल हैं, जो यूक्रेन में युद्ध अपराध के आरोपों की तफ्तीश कर रहे हैं. खासतौर पर बूचा और इसके आसपास के इलाकों में. इनके अलावा "इंटरनेशनल क्रिमिनल कोर्ट" (आईसीसी) ने भी यूक्रेन से जुड़ी एक जांच शुरू की है.

ओपीसीडब्ल्यू ने अभी तक यूक्रेन से जुड़ी किसी जांच का ऐलान नहीं किया है.हालांकि उसकी वेबसाइट पर निगरानी किए जाने की बात जरूर बताई गई है. इस जानकारी के मुताबिक, ओपीसीडब्ल्यू संबंधित रासायनिक औद्योगिक प्रतिष्ठानों और जहरीले रसायनों को बतौर हथियार इस्तेमाल किए जाने के खतरे पर नजर बनाए हुए है. संगठन के पूर्व प्रमुख मार्क माइकल ब्लूम ने समाचार एजेंसी एपी को बताया कि ओपीसीडब्ल्यू हाल-फिलहाल तो अपनी किसी टीम को मारियोपोल में जांच के लिए नहीं भेजेगा. उन्होंने कहा, "अभी युद्ध जारी है, जहां ओपीसीडब्ल्यू अपनी टीम नहीं भेजेगा क्योंकि उस टीम की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं की जा सकती है."

कैसे होती है संदिग्ध रासायनिक हमलों की जांच?

इसके लिए विशेषज्ञ दल घटना स्थल और पीड़ितों से लिए गए सैंपल को प्रयोगशाला में जांचेगा. इन सैंपलों में घटना स्थल से लिए गए मिट्टी के नमूने भी शामिल हैं. लैब के भीतर जांचा जाएगा कि क्या इन सैंपलों में रासायनिक हथियारों और बाकी युद्ध सामग्रियों के अंश हैं. इन हमलों की चपेट में आए लोगों के खून और पेशाब के नमूनों की भी जांच की जाएगी. इसके बाद जांचकर्ता संभावित हमले के चश्मदीदों और इसकी चपेट में आए लोगों से बात करने, उनका इंटरव्यू लेने की कोशिश करेंगे, ताकि उनके अनुभवों के आधार पर घटनाक्रम की एक तस्वीर बनाई जा सके.

उन डॉक्टरों से भी बात करने की कोशिश की जाएगी, जिन्होंने उन लोगों का इलाज किया हो. अतीत में इस तरह की जांचों में विशेषज्ञों ने "गैस डिस्पर्सन मॉडल" और टोपोग्राफिक चार्ट्स का भी सहारा लिया था और डिजिटल तस्वीरों को भी देखा गया. ओपीसीडब्ल्यू के पास सीरिया में इस तरह की जांच करने का अनुभव है. वहां संगठन के विशेषज्ञों ने कई मौकों पर रासायनिक हथियारों का इस्तेमाल होने की पुष्टि की थी. हालांकि सीरिया की सरकार रासायनिक हथियारों के इस्तेमाल से जुड़े आरोपों को खारिज करती है.

अतीत के रासायनिक हमलों से जुड़ी घटनाओं में क्या हुआ?

सीरिया में गृह युद्ध के दौरान जहरीली गैस की चपेट में आकर सैकड़ों लोग मारे गए. इन मामलों की जांच कर पाना ओपीसीडब्ल्यू के लिए आसान नहीं था. उसे कई बाधाओं का सामना करना पड़ा. रूस ने भी जांच ना होने देने के लिए अड़चनें लगाईं.केमिकल हथियारों के इस्तेमाल से जुड़ी उन घटनाओं में आज तक किसी की जिम्मेदारी तय नहीं हो सकी है.

सीरिया के बाहर के दो हालिया मामले हैं, जिनसे समझ आता है कि संदिग्ध रासायनिक हथियारों के इस्तेमाल से जुड़ी घटनाओं में स्थानीय एजेंसियां किस तरह जांच कर सकती हैं. ये घटनाएं हैं, 2020 में रूसी विपक्षी नेता आलेक्सी नवाल्नी और 2018 में पूर्व डबल एजेंट सेरगेई स्क्रिपाल और उनकी बेटी को दिया गया जहर. अलेक्सी नवाल्नी हमले के बाद अपने इलाज के लिए जर्मनी आए थे.

इसी तरह सेरगेई स्क्रिपाल और उनकी बेटी पर ब्रिटेन में हमला हुआ. वहां के अधिकारियों ने उनके नमूने लिए. जांच के बाद बताया गया कि उनके ऊपर नोविचोक से हमला हुआ, जो कि सोवियत संघ के दौर का एक नर्व एजेंट है. उन मामलों में ओपीसीडब्ल्यू ने भी संबंधित नमूनों की जांच की थी और जर्मन और ब्रिटिश अथॉरिटीज द्वारा बताए गए निष्कर्ष की पुष्टि की थी. इन दोनों हमलों में रूस पर आरोप लगता है, लेकिन वह इससे इनकार करता है.

मारियोपोल से जुड़े सवाल

फॉस्फोरस युक्त हथियार रासायनिक हथियार नहीं माने जाते हैं. ज्यादातर सेनाओं के पास फॉस्फोरस वाली युद्ध सामग्रियां होती हैं, जिनका इस्तेमाल युद्ध क्षेत्र या निशाने वाली जगह पर रोशनी करने या धुआं पैदा करने के लिए किया जाता है. अगर कोई सेना जान-बूझकर किसी बंद जगह पर फॉस्फोरस हथियारों का इस्तेमाल करे, ताकि वहां रह रहे लोग जहरीले धुएं की चपेट में आएं, तो यह "केमिकल वीपन्स कन्वेंशन" का उल्लंघन होगा.

माइकल ब्लूम ने बताया, "जैसे ही आप इरादतन और खास मकसद से सफेद फॉस्फोरस से बने हथियार इस्तेमाल करने लगते हैं, तो यह प्रतिबंधित है." मारियोपोल को रूस ने बंधक बनाया हुआ है. ऐसे में वहां पर स्वतंत्र जांच हो सकेगी या नहीं, यह बड़ा सवाल है. ब्लूम को भी इसकी बहुत उम्मीद नहीं दिखती. वह कहते हैं, "मारियोपोल में अभी जैसी स्थिति है, उसमें ठोस तरीके से कुछ भी तय कर पाना तकरीबन नामुमकिन है. इसीलिए किसी भी तरह की जांच से मुझे अभी ज्यादा उम्मीद नहीं है."

एसएम/एनआर (एपी)

Source: DW

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