आकाश से पाताल तक, कहीं भी तबाही मचाने में सक्षम ड्रैगन, जानें कितनी ताकतवर बन गई चीन की सेना?

2012 में राष्ट्रपति बनने के बाद शी जिनपिंग ने एक मिशन की तरफ चीन की सेना को ताकतवर बनाया है और आज चीन की सेना विश्व की सबसे ताकतवर सेना बनने के करीब है।

बीजिंग, अक्टूबर 30: इस वक्त चीन दुनिया का इकलौता ऐसा देश है, जिसने एक साथ कई देशों से पंगा ले रखा है और हर जगह चीन की ही गलती है। एलएसी पर चीन और भारत के बीच काफी ज्यादा तनाव है, तो साउथ चायना सी में चीन अमेरिका का आगे खड़ा है। पूर्वी चायना सी में चीन को जापान से काफी दिक्कत है तो ताइवान पर चीन कभी भी चढ़ाई कर सकता है। इन सबके बीच चीन ऐसे ऐसे हथियारों की परीक्षण कर रहा है, जिनसे ये दुनिया पल भर में भस्म हो सकती है। ऐसे में जानना जरूरी है कि, आखिर चीन की सेना कितनी शक्तिशाली बन चुकी है और चीन की सेना भारत के लिए कितनी खतरनाक बन चुकी है?

विश्व की सबसे बड़ी आर्मी का निर्माण

विश्व की सबसे बड़ी आर्मी का निर्माण

2012 में चीन की सत्ता संभालने के बाद राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने चीन की सेना को अजेय बनाने की कोशिशें शुरू कर दी और 2035 तक शी जिनपिंग अपने देश की सेना को विश्व की सबसे शक्तिशाली सेना बनाना चाहते हैं। जमीन से लेकर अंतरिक्ष तक और पानी से लेकर इंटरनेट तक....शायद ही कोई ऐसी जमीन बची हो, जहां चीन युद्ध लड़ने की तैयारी नहीं कर रहा हो। कभी कभी ऐसा लगता है कि, चीन की वजह से ही इस दुनिया का विनाश होगा। चीन की सेना का आकार एक वक्त छोटा हुआ करता था, लेकिन चीन ने पिछले 2 दशकों में काफी तेजी से अपने सैन्य कार्यक्रम का विस्तार किया और अब चीन की सेना में 20 लाख से ज्यादा जवान हैं। इसके अलावा चीन ने अपनी सेना को काफी ज्यादा आक्रामक बनाने पर काम किया है। करीब 20 साल पहले चीन की सेना विश्व की सबसे डरपोक सेना मानी जाती थी, लेकिन अब स्थिति पूरी तरह से बदली हुई मानी जा रही है।

शी जिनपिंग ने बनाया आक्रामक

शी जिनपिंग ने बनाया आक्रामक

राष्ट्रपति शी जिनपिंग के तहत चीन कूटनीतिक रूप से काफी आक्रामक हो गया है और उसने अपने सैन्य कौशल के प्रदर्शन के साथ विवादित क्षेत्र पर अपने दावों को और ज्यादा मजबूत करने पर ध्यान दिया है। जिसकी वजह से चीन का लगातार भारत, जापान, ऑस्ट्रेलिया, ताइवान और अमेरिका के साथ काफी ज्यादा तनाव बना हुआ है। चीन के दावे को कमजोर करने के लिए ही अमेरिका और सहयोगी देश की नौसेना लगातार दक्षिण चीन सागर में गश्त कर रही है, जिसपर चीन लगातार अपनी आपत्ति जताता रहता है। बीजिंग स्थित एक अधिकारी यिन डोंग्यू ने कहा कि, "दक्षिण चीन सागर में अमेरिका और चीन के बीच अब संघर्ष अब इसलिए हो रहा है, क्योंकि अमेरिका अब मानने लगा है कि, चीन की सेना उसके बराबर हो गई है। जब तक अमेरिका चीन की सेना को कमजोर मानती थी, तब तक अमेरिका अपनी नौ-सेना को गश्त के लिए नहीं भेजता था।''

चीन के खिलाफ ऑकस और क्वाड

चीन के खिलाफ ऑकस और क्वाड

चीन दुनिया के लिए कितना घातक हो चुका है, इसका अंदाजा आप इसी से लगा सकते हैं कि, अब चीन की सेना को रोकने और पीछे धकेलने के लिए अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर कई समझौते हो रहे हैं। खासकर पिछले महीने अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और ब्रिटेन के बीच बनाए गये 'ऑकस' ने चीन के गुस्से को काफी ज्यादा भड़का दिया है। ऑकस डील के तहत अमेरिका से अब ऑस्ट्रेलिया को परमाणु संचालित पनडुब्बियां मिलेंगी। जिसके बाद चीन ऑस्ट्रेलिया को बर्बाद करने की धमकी भी दे रहा है। इसके अलावा अमेरिका और उसके सहयोगी देशों ने अंतर्राष्ट्रीय जल नौवहन अधिकार का दावा करते हुए साउथ चायना सी, एशिया पैसिफिक और ताइवान स्ट्रेट सागरों में लगातार अपने एयरक्राफ्ट्स भेज रही है, ताकि चीन पर दवाब बनाकर रखा जा सके।

दुनिया की सबसे बड़ी सेना का निर्माण

दुनिया की सबसे बड़ी सेना का निर्माण

अंतर्राष्ट्रीय डिफेंस पर नजर रखने वाले 'स्टेटिका' ने अपनी ताजा रिपोर्ट में कहा है कि, चीन ने अपनी सेना पीपुल्स लिबरेशन आर्मी को दुनिया की सबसे विशालकाय आर्मी बना दी है। 2021 की रिपोर्ट में कहा गया है कि, अब चीन के पास कुल मिलाकर 21 लाख 85 हजार सैनिक हैं, जो रजिस्टर्ड हैं। चीन लगातार दावा करता आया है कि, विश्व की सबसे बड़ी आर्मी उसी के पास है और चीन ने अपनी सेना को पांच अलग अलग हिस्सों में बांट रखा है, जिनमें ग्राउंड फोर्स, एयरफोर्स, नेवी, रॉकेट फोर्स और स्ट्रैटिजिक सपोर्ट फोर्स शामिल हैं और इसके अलावा चीन ने अपनी सेना को पांच अलग अलग थियेटर कमांड में भी बांट रखा है।

Recommended Video

    China ने तैयार किया Hypersonic weapon...क्या भारत के पास है ऐसा कोई हथियार ? | वनइंडिया हिंदी
    नौसेना का विस्तार

    नौसेना का विस्तार

    बात अगर नौसेना की करें, तो चीन ने अपनी नौसेना को विश्व की सबसे बड़ी नौसेना पिछले ही साल बना लिया था और इस बात का दावा अमेरिका के सैन्य अधिकारियों ने की थी। चीन चूंकी ज्यातातर वक्त समुद्री हिस्सों में विवाद में रहता है, लिहाजा पेंटागन चाइना मिलिट्री पावर रिपोर्ट के अनुसार, चीन की नौसेना में 9 लाख 15 हजार एक्टिव जवान शामिल हैं, जबकि अगर अमेरिका की स्थिति देखें, तो अमेरिकी नौसेना के पास करीब चार लाख 86 हजार सक्रिय नौसैनिक हैं। इसके साथ ही चीन अपनी नेवी को अत्याधुनिक बनाने के लिए लगातार हथियारों की सख्या और क्वालिटी में विस्तार कर रही है। हालांकि, चीन की नौसेना की युद्धक क्षमता अभी काफी कम है, लेकिन कई रिपोर्ट्स में कहा गया है कि, आक्रमण क्षमता में बढ़ावा देने के लिए चीन काफी तेजी से काम कर रहा है। अपनी नौसेना की मारक क्षमता का विस्तार करने के लिए चीन लगातार युद्धपोत, एयरक्राफ्ट कैरियर और पनडुब्बियों का निर्माण कर रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक इस वक्त चीन के पास 62 पनडुब्बी मौजूद हैं, जिनमें से सात पनडुब्बी न्यूक्लियर पॉवर से संचालित हैं। हालांकि, चीन के पास सिर्फ 3 ही एयरक्राफ्ट कैरियर हैं, जबकि अमेरिका के पास 11 एयरक्राफ्ट कैरियर हैं।

    चीन की मिसाइल क्षमता

    चीन की मिसाइल क्षमता

    2019 में चीन ने इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल डीएफ-41 का परीक्षण किया था, जिसके बारे में विशेषज्ञों का कहना है कि, ये मिसाइल दुनिया के किसी भी कोने में जाकर हमला करने में सक्षम है। इसके साथ ही चीन का डीएफ-17 हाइपरसोनिक मिसाइल ने भी अब पूरी दुनिया का ध्यान खींच लिया है। चीन ने इसी साल जुलाई और अगस्त में हाइपरसोनिक मिसाइलों का परीक्षण कर अमेरिका को स्तब्ध कर दिया है और अमेरिका के शीर्ष सैन्य अधिकारी इसे अमेरिका के लिए चिंता की बात बता रहे हैं। इसके साथ ही चीन ने ड्रोन क्षमता में भी अद्भुत विस्तार किया है और चीन के बनाए गये ड्रोन कई देशों में खरीदे भी जा रहे हैं। इसके साथ ही चीन कई ऐसे मिसाइलों का निर्माण भी कर चुका है, जिसे वो अपनी नेवी के जरिए लॉन्च कर सकता है।

    वायुसेना का विस्तार करता ड्रैगन

    वायुसेना का विस्तार करता ड्रैगन

    पिछले साल प्रकाशित अमेरिकी रक्षा सचिव कार्यालय की एक वार्षिक रिपोर्ट के मुताबिक, 2,500 से अधिक विमानों और लगभग 2,000 लड़ाकू विमानों के साथ वायु सेना एशिया-प्रशांत क्षेत्र में सबसे बड़ी और दुनिया में तीसरी सबसे बड़ी हो गई है। चीन की वायु सेना के पास अब स्टील्थ फाइटर जेट्स का एक बेड़ा है, जिसमें जे-20 जैसे चीन के सबसे उन्नत युद्धक विमान शामिल हैं। इसे स्वतंत्र रूप से विकसित किया गया था और इसे अमेरिका की एफ-22 को टक्कर देने के लिए चीनी सेना ने डिजाइन किया था। इसके अलावा द ड्राइव की रिपोर्ट के मुताबिक, चीन के पास एच-6एन नाम का बेहद खतरनाक विमान भी मौजूद है। इस विमान को एंटी शिप मिसाइल को फायर करने के लिए डिजाइन किया गया है। इतना ही नहीं, इस विमान के जरिए क्रूज मिसाइलों को भी दागा जा सकता है। अब चीन एच-6एन विमान के लिए हवा में दागे जाने वाले उन्नत किस्म के हाइपरसोनिक मिसाइलों को निर्माण भी कर रहा है।

    Notifications
    Settings
    Clear Notifications
    Notifications
    Use the toggle to switch on notifications
    • Block for 8 hours
    • Block for 12 hours
    • Block for 24 hours
    • Don't block
    Gender
    Select your Gender
    • Male
    • Female
    • Others
    Age
    Select your Age Range
    • Under 18
    • 18 to 25
    • 26 to 35
    • 36 to 45
    • 45 to 55
    • 55+