जापान के शांत समाज को झकझोर देने वालीं 23 साल की नाओमी ओसाका
नाओमी ओसाका एक कहानी उन्हीं की जुबानी.
वो फ़्लोरिडा से हैं, जहाँ दुनिया के सबसे सर्वश्रेष्ठ युवा टेनिस खिलाड़ी जुटते हैं और प्रतिस्पर्धा करते हैं.
ओसाका तब लगभग दस वर्ष की रही होंगी, जब उन्होंने काफ़ी प्रतिष्ठित समझे जाने वाले 'ऑरेंज बाउल टूर्नामेंट' के एक मैच की तैयारी के दौरान अपनी एक जापानी प्रतिद्वंद्वी को उनके बारे में बात करते सुना.
वो लड़की अपनी किसी दोस्त से बात कर रही थी और शायद उन्हें ये नहीं पता था कि ओसाका को जापानी भाषा आती है.
उसकी दोस्त ने पूछा कि 'आज तुम्हारे सामने (प्रतिद्वंद्वी) कौन है?' तो उसने जवाब दिया, 'ओसाका', जिस पर पलटकर उसकी दोस्त ने कहा, "अरे, वो काली लड़की. उसे जापानी कहना चाहिए?" इस पर ओसाका की प्रतिद्वंद्वी, उस लड़की ने जवाब दिया, "मुझे नहीं लगता."
ये पूरी कहानी नाओमी ओसाका ने 'द वॉल स्ट्रीट जर्नल' को सुनाई, जिस पर पिछले साल अगस्त में वॉल स्ट्रीट ने एक बड़ा लेख प्रकाशित किया था.
आज सभी जानते हैं कि एक जापानी माँ और हेटी मूल के पिता के घर, अमेरिका में पली-बढ़ी नाओमी ओसाका टोक्यो-2020 का मुख्य चेहरा हैं.
टोक्यो के हर बस स्टॉप पर 23 वर्षीय ओसाका के पोस्टर लगे हैं, जिनमें वो स्थानीय और अंतरराष्ट्रीय खेल प्रशंसकों का स्वागत करती दिखाई देती हैं.
ये पोस्टर आधे अंग्रेज़ी और आधे जापानी भाषा के हैं जो एक 'नई दुनिया' और 'नई पीढ़ी' को ध्यान में रखकर बनाये गए हैं.
ओसाका ने साल 2019 में अपनी जापानी विरासत के लिए अमेरिकी नागरिकता त्याग दी थी, वो अपनी मातृभूमि के लिए ज़्यादा से ज़्यादा खिताब ही नहीं ला रहीं, बल्कि एक बदलाव भी ला रही हैं.
नाओमी ओसाका का वो फ़ैसला, जिसने टेनिस जगत में मचाई हलचल
मिश्रित नस्ल की खिलाड़ी
ओसाका आख़िर जापानी समाज में कैसे फिट बैठती हैं, इस पर संदेह करने के लिए आपको उनके बचपन में वापस जाने की ज़रूरत नहीं है.
मौजूदा समय में जापान की नंबर तीन टेनिस ख़िलाड़ी, नाओ हिबीनो ने वर्ष 2018 में 'द न्यूयॉर्क टाइम्स मैग्ज़ीन' से ओसाका के बारे में कहा था, "मैं ईमानदारी से कहूँ, तो हम उससे थोड़ी दूरी महसूस करते हैं, क्योंकि वो शारीरिक रूप से बहुत अलग है."
"और तो और वो एक अलग जगह पली-बढ़ी है और जापानी भाषा में कम बोलती है. वो केई (निशिकोरी) की तरह नहीं है, जो एक शुद्ध (प्योर) जापानी खिलाड़ी हैं."
हालांकि, इस तरह के सवाल किये जाने के लिए ओसाका पहली मिश्रित नस्ल की खिलाड़ी नहीं हैं.
साचिओ किनुगासा और हाइदेकी इराबू, दोनों जापानी बेसबॉल स्टार थे. दोनों मिश्रित नस्ल के खिलाड़ी थे.
मगर ना तो जापानी जनता को और ना ही उन दोनों को अपने पेरेंट्स (ख़ासकर अमेरिकी पिता) के बारे में बात करने की कोई दिलचस्पी थी और ना ही वो द्वितीय विश्व युद्ध के बाद देश पर कब्ज़ा करने वाले सैनिकों या उनके द्वारा किये गए भेदभाव के बारे में बात करने में दिलचस्पी लेते थे.
लेकिन ओसाका अलग हैं.
एक जापानी अख़बार के पत्रकार हिरोकी वाडा बताते हैं, "कुछ पुराने लोगों ने इस बारे में विचार बना रखे हैं कि एक जापानी महिला एथलीट को सार्वजनिक रूप से कैसे बोलना और व्यवहार करना चाहिए और ओसाका उस पारंपरिक सांचे में फिट नहीं बैठतीं. उन्होंने अपने बयानों और अपने कार्यों से जापान में कई अहम मुद्दों को उजागर किया है."
ओसाका ने उठाये कई मुद्दे
वे कहते हैं कि "अब मीडिया और सोशल मीडिया पर जाति और पहचान को लेकर चर्चा ज़्यादा गंभीरता से हो रही है और इसकी एक वजह ओसाका के कुछ राजनीतिक बयान हैं. वो एक विचारशील और प्रतिक्रिया देने वाली इंसान हैं जो लोगों को सोचने पर मजबूर करती हैं."
पिछले साल यूएस ओपन में वो एक योजना के साथ उतरी थीं. वो अपने किट में सात अलग-अलग मेस-मास्क लेकर गई थीं. हर मास्क पर एक काले अमेरिकी नागरिक का नाम लिखा था जो कथित तौर पर पुलिस की बर्बरता या नस्लवादी हिंसा के कारण मारा गया.
उन्होंने टूर्नामेंट के दौरान हर मास्क को इस्तेमाल किया, जिनमें से कुछ पर जॉर्ज फ़्लॉयड, ब्रेओना टेलर और ट्रेवन मार्टिन का नाम था, ताकि दुनिया इन नामों को जान सके और उन्हें याद रखे.
हालांकि जापान जो दुनिया के नस्ली रूप से सबसे कम विविध देशों में से एक है, वो अब भी इस मुद्दे पर चर्चा के मामले में संघर्ष कर रहा है.
जापान के पब्लिक ब्रॉडकास्टर एनएचके को पिछले साल एक एनिमेटेड फ़िल्म में नस्लीय न्याय के विरोध में काले लोगों को चित्रित करने के लिए माफ़ी माँगनी पड़ी थी. एनएचके ने अपनी इस एनिमेटेड फ़िल्म में आंदोलन के कुछ प्रमुख कारणों को भी शामिल नहीं किया था.
साल 2019 में, जापानी इंस्टेंट नूडल कंपनी निसिन ने अपने एक विज्ञापन में ओसाका को गोरा दिखाया था. लेकिन बाद में कंपनी को यह विज्ञापन वापस लेना पड़ा.
लेकिन ये विचार पीढ़ियों से चले आ रहे हैं. ओसाका जब तीन साल की थीं, तब उनके माता-पिता को अमेरिका शिफ़्ट होना पड़ा था, क्योंकि ओसाका की माँ से उनके पेरेंट्स ने नाता तोड़ लिया था.
जापान के समाज पर 'टोक्यो जंकी' नामक क़िताब लिख चुके लेखक रॉबर्ट व्हाइटिंग कहते हैं, "पिछले साल या उसके बाद से अब तक जो-जो हुआ है, वो जापानी समाज के लिए सीखने की एक प्रक्रिया के जैसा है."
रॉबर्ट लगभग 60 साल से टोक्यो में रह रहे हैं. वे कहते हैं कि "इस बीच टेलीविज़न के विभिन्न शोज़ में इस प्रकार की चर्चा होती रही है कि नाओमी में आख़िर क्या महसूस किया, जिसके बाद उन्होंने ये सब बोला."
वे कहते हैं कि "जापान में परंपरागत तौर पर ही लोग बहस और टकराव से बचते हैं. अमेरिका की तरह जापान में झगड़ों का रिवाज़ नहीं है. जापान में आप जितने मशहूर होते हैं, उतने ही संयमित भी होते हैं. आप नहीं चाहते कि आपका नाम किसी फसाद से जोड़कर देखा जाए और उसका असर आपके साथियों, आपकी संस्था और उसके प्रायोजकों पर पड़े."
रॉबर्ट के मुताबिक़, पश्चिमी सभ्यता में जहाँ लोग अपने बारे में सोचने में विश्वास रखते हैं, वहीं जापान में शांति और समन्वय बनाना लोगों की प्राथमिकता होती है.
कोर्ट पर वापस लौटने की उम्मीद
पिछले साल, जहाँ इस बात की चर्चा थी कि ओसाका कहाँ से हैं, वहीं इस वक़्त हर इंसान की ज़ुबान पर यह सवाल है कि 'ओसाका कहाँ हैं?'
मई में, फ़्रेंच ओपन के दौरान यह बोलने के बाद कि वो मीडिया से बात नहीं करेंगी, ओसाका ने पहले फ़्रेंच ओपन और फिर विंबलडन से भी यह कहते हुए ख़ुद को अलग कर लिया कि फ़िलहाल उनकी मानसिक स्थिति ठीक नहीं है और वो पिछले कुछ वर्षों से डिप्रेशन से जूझ रही हैं.
लेकिन टोक्यो ओलंपिक में, खेल से क़रीब दो महीने दूर रहने के बाद उनके कोर्ट पर वापस लौटने की उम्मीद की जा रही है.
लोग जानते हैं कि ओसाका अब तक की सबसे हाई-प्रोफ़ाइल और जापान के चुनिंदा नामचीन लोगों में से एक हैं जिन्होंने मानसिक स्वास्थ्य के मुद्दे को सार्वजनिक तौर पर लोगों की नज़रों में लाने का काम किया है.
अंतरराष्ट्रीय फ़ुटबॉल प्लेयर, 27 वर्षीय कुमी योकोयामा ने पिछले महीने ही पब्लिक को यह बताया कि वो एक ट्रांसजेंडर थे और खेल से संन्यास लेने के बाद उनका इरादा पूरी तरह से एक पुरुष में बदलने का था.
उन्होंने बताया कि कैसे अमेरिका और जर्मनी में खेलने से उन्हें जापान में इस विषय की अज्ञानता और पूर्वाग्रहों के बारे में पता चला.
साल 2020 में, एक पेशेवर पहलवान हाना किमुरा ने एक नामी रियलिटी शो 'टेरेस हाउस' में प्रदर्शित होने के बाद अपनी जान ले ली थी.
आँकड़ों पर नज़र डालें, तो जापान में मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं की शिक़ायत करने वालों की संख्या 1999 से 2014 तक बढ़कर, दोगुनी हो गई थी.
पत्रकार हिरोकी वाडा कहते हैं कि "अगर मैं 40 साल पीछे मुड़कर देखूँ, तो जब मैं बच्चा था, तब भी हमारे देश में परंपरागत रूप से आपका या आपके किसी रिश्तेदार का मानसिक समस्या से जूझना एक शर्मनाक स्थिति के तौर पर देखा जाता था. इसे आमतौर पर कमज़ोरी से जोड़कर देखा गया है, ख़ासतौर से खिलाड़ियों में, इसीलिए लोग इसके बारे में बात नहीं करना चाहते."
"मगर चीज़ें धीरे-धीरे बदल रही हैं. लोग अब यह स्वीकार करने लगे हैं कि उन्हें कोई मानसिक परेशानी चल रही है और वो यह भी मान रहे हैं कि उन्हें इससे लड़ना होगा."
और लेखक रॉबर्ट व्हाइटिंग को इसमें कोई संदेह नहीं है कि ये बदलाव कहाँ से आ रहा है.
रॉबर्ट ने कहा, "मुझे लगता है कि नाओमी ओसाका समेत अन्य मिश्रित जाति वाले जापानियों को अब भी कुछ हद तक बाहरी समझा जाता है. हालांकि, मुझे यह भी लगता है कि ये पीढ़ी पिछली पीढ़ियों की तुलना में काफ़ी ज़्यादा परिष्कृत है. वो इंटरनेट और अनगिनत टीवी चैनलों की मौजूदगी के साथ दृष्टिकोण को लेकर बहुत ज़्यादा वैश्विक हैं."
उन्होंने कहा, "ये एक व्यापक समझ है जो 1960 या 80-90 के दशक में मेरे आने पर नहीं थी. दुनिया अब बहुत छोटी जगह है और जापान को इससे फ़ायदा हुआ है. ये एक नई दुनिया है, नई पीढ़ी है और आप कह सकते हैं कि ओसाका इसका एक बड़ा हिस्सा हैं."
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