बेल्जियम के इस खिलाड़ी ने एक गोल से ऐसे गिरा दी हैती की सरकार

पोर्ट ऑ प्रिंस। हैती में पेट्रोल-डीजल और खाद्य पदार्थों की कीमतें बढ़ने की वजह से पिछले कई दिनों से लोग सरकार के खिलाफ आंदोलन कर रहे हैं। पिछले सप्ताह तीन दिनों तक हैती की राजधानी पोर्ट ऑ प्रिंस में हुए दंगों में कम से 7 लोगों की जान चली गई, जिसके बाद विपक्ष ने भी सत्ताधारी सरकार की कड़ी आलोचना की है। हालांकि, हैती में महंगाई को लेकर पिछले कई दिनों से लोग सड़कों पर उतरकर सरकार के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं, लेकिन इस सब के बीच एक फीफा फैक्टर भी निकलकर कर आ रहा है, जिसकी वजह से हैती के प्रधानमंत्री जैक गुइ लाफोनटैंट को इस्तीफे के लिए मजबूर होना पड़ा।

मैच से पहले बढ़ाई कीमतें

मैच से पहले बढ़ाई कीमतें

पहले बता दें कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपने देश की सफलता की कमी को देखते हुए, हैतियन लोगों ने ब्राजील को अपनी अनौपचारिक राष्ट्रीय टीम के रूप में अपनाया है। सरकार ने देश में पेट्रोल-डीजल के कीमतों की घोषणा फीफा वर्ल्ड कप में ब्राजील-बेल्जियम के बीच हुए क्वार्टर फाइनल मैच से 10 मिनट पहले कर दी थी। सरकार को पूरा भरोसा था कि 5 पांच बार विश्व चैंपियन रह चुकी ब्राजील आसानी से बेल्जियम को हरा देगी और लोग जश्न में डूब कर तेल की बढ़ी कीमतों को भूल जाएंगे।

क्वार्टर फाइनल में हार के बाद हैती के लोग उतरे सड़कों पर

क्वार्टर फाइनल में हार के बाद हैती के लोग उतरे सड़कों पर

लेकिन, फीफा वर्ल्डकप के क्वार्टर फाइनल मैच में बड़ा उलटफेर करते हुए बेल्जियम ने ब्राजील को हरा दिया। अब तक हैती के लोग ब्राजील की जीत पर सड़कों पर जश्न मनाने बाहर निकालते थे, लेकिन इस बार क्वार्टर फाइनल में मिली हार के बाद, हैतियन लोगों ने तेल की कीमतों के खिलाफ हिंसक प्रदर्शन करते हुए सड़कों पर टायर जलाकर और सरकारी संपत्ति को बर्बाद कर
लाफोनटैंट सरकार का विरोध किया।

केविन डी ब्रुइन के गोल के बाद हैती के लोगों का फुटा गुस्सा

हैती के लोगों का गुस्सा एक तरह से देखे तो बेल्जियम के मिड फिल्डर केविन डी ब्रुइन के उस गोल के बाद आया, जब ब्राजील के हाथों से लगभग मैच जा चुका था। ब्रुइन ने 31 वें मिनट में 25 गज की दूरी से शॉट मारकर ब्राजील के गोलकीपर को छकाते हुए गेंद को गोल पोस्ट तक पहुंचा दिया और बेल्जियम को 2-0 से बढ़त दिलाकर ब्राजील को विश्वकप से बाहर कर दिया। इसी गोल के बाद हैती के लोगों में जबरदस्त गुस्सा था और वे सरकार के खिलाफ तेल की कीमतों के खिलाफ सड़कों पर उतर आए। इस हिंसक आंदोलन के बाद हैती के प्रधानमंत्री ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है।

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