इजराइल के आतंकियों को मारने के तरीके से भारत परेशान! जानिए 28 साल पहले फोन फोड़कर कैसे एक आतंकी को उड़ाया?
Israel News: दुश्मनों को मारने के लिए इजराइल ऐसे ऐसे क्रिएटिव तरीके आजमाता है, जिसे देखकर दुनिया दंग रह जाती है। इस बार भी लेबनान में हिज्बुल्लाह के आतंकियों को उड़ाने के लिए पेजर में विस्फोटक भरकर धमाका किया जाएगा, इसके बारे में किसने सोचा होगा।
लेकिन, इजराइल ऐसे ही तरीकों के बारे में सोचता है और आतंकियों को मारने के लिए हर हद को पार कर जाता है। हालांकि, पेजर और वॉकी-टॉकी में विस्फोट ने आतंकियों को भी नये हमले करने का एक तरीका दे दिया है और एयरलाइंस कंपनियों परेशान हैं, कि अगर किसी फोन में विस्फोटक ले जाया जा रहा हो, तो उसे कैसे रोका जाएगा। कई देशों के अधिकारी भी इसको लेकर चिंतित हैं।

लेकिन, हिज्बुल्लाह पर हुए इस हमले ने एक चीज साफ कर दिया है, कि टाइमर से लैस बमों के दिन खत्म हो गए हैं। और अब साधारण टीवी का रिमोट भी एक बम बन सकता है और भयावह हमलों को अंजाम दे सकता है।
आइये जानते हैं, कि 28 साल पहले इजराइली खुफिया एजेंसी शिन बेट ने एक खतरनाक आतंकवादी याह्या अय्याश, जो उसकी वांटेड लिस्ट में सबसे ऊपर था, उसे कैसे मारा था।
फोन से याह्या अय्याश को इजराइल ने उड़ाया
याह्या अय्याश, फिलिस्तीन मुक्ति संगठन (पीएलओ) के लिए काम करता था और बम बनाने में वो एक्सपर्ट था। 5 जनवरी 1996 को उसे बस में यात्रा करते वक्त उसने अपने मोटोरोला फोन से अपने पिता का फोन किया। जब उसके पिता ने कॉल उठाया, तो अय्याश ने पूछा, "आप कैसे हैं पापा?" ये अय्याश के आखिरी शब्द थे।
अय्याश के इतना कहते ही मोटोरोला फोन उसके मुंह पर फट गया। ये विस्फोट इतना तगड़ा थ, कि अय्याश के मुंह के चिथड़े उड़ गये।
ये मोटोरोला फोन अय्याश को उसके विश्वविद्यालय के दोस्त ओसामा हर्नाद ने गिफ्ट में दी थी।
बाद में पता चला, कि ओसामा के चाचा कमाल हर्नाद इजराइली खुफिया एजेंसी शिन बेट के मुखबिर थे और उन्होंने ही मोटोरोला फोन में विस्फोटक चिप को लगाया था, जिसे दूर से एक्टिवेट किया जा सके। जब अय्याश बस से यात्रा कर रहा था, उस वक्त इजराइल का एक छोटा विमान उसे फॉलो कर रहा था और जैसे ही उसने अपने पिता को फोन किया, बम को एक्टिवेट कर दिया गया।
इस बमबारी का जिक्र इजराइल के हर एक दुश्मन आतंकवादी को किसी भी तरह से खत्म करने के उसके मजबूत इरादे को दिखाने के लिए किया गया था, जिसकी कल्पना तक उसके दुश्मनों ने नहीं की होती है। इनमें से कई डिवाइस टेक्नोलॉजी और सर्विलांस का एक दुर्लभ संयोजन हैं। और दुनिया के ज्यादातर लोगों को इजराइल के इन हथियारों के बारे में शायद ही कोई जानकारी हो।

इस तरह के हमला करने का इजराइल का मकसद ज्यादा से ज्यादा लोगों को मारना या घायल करना नहीं होता है, बल्कि उनके दिल में खौफ भरना होता है। जैसे अब हिज्बुल्लाह के आतंकी किसी भी तरह के पेजर या वॉकी-टॉकी के इस्तेमाल से पहले 75 बार सोच रहे होंगे। इजराइल अपने दुश्मनों को ऐसे हमलों से संदेश देता है, कि वो उन्हें कहीं भी मार सकता है।
आतंकवादी अय्याश की हत्या की इस कहानी को 1996 में पहली बार द इंडिपेंडेंट ने प्रकाशित की थी।
आतंकियों को मारने के इजराइल के नये तरीके
इस घटना के करीब 28 साल बाद 17 सितंबर 2024 को इजराइल ने (कथित तौर पर) अपने दुश्मन हिज़्बुल्लाह को खत्म करने के लिए उसी तकनीक का इस्तेमाल किया, जिसमें उसे अविश्वसनीय सफलता मिली है।
लेबनान में एक अपेक्षाकृत शांत दोपहर के समय हिज़्बुल्लाह लड़ाकों के पास मौजूद कई हजार पेजर एक साथ फट गए, जिससे उन्हें पकड़े हुए लगभग सभी लोग घायल हो गए और कुछ की मौत भी हो गई। उसके ठीक एक दिन बाद, हिज़्बुल्लाह की तरफ से इस्तेमाल किए जाने वाले वॉकी-टॉकी का भी यही हश्र हुआ।
जिसके बाद हर किसी के दिमाग में एक ही सवाल था, कि आखिर इजराइली या कोई और संस्था, हिज़्बुल्लाह द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले पेजर/वॉकी-टॉकी के अंदर विस्फोटक कैसे रख पाई? यहां टेक्नोलॉजी से कहीं ज़्यादा महत्वपूर्ण है खुफिया एजेंसियों की उपकरण की 'सप्लाई चेन' को डिकोड करना और उनमें विस्फोटक लगाना।
यह टेक्नोलॉजिकल इनोनेशन का एक चमत्कार है, कि लेबनान के लिए भेजे गए पेजर की पूरी खेप को बीच में ही कहीं रोक लिया गया और उनमें विस्फोटक भरा गया और इसकी भनक तक हिज्बुल्लाह को नहीं लग पाई। निस्संदेह, इजरायल हिज्बुल्लाह को सरप्राइज करने में कामयाब रहा है।
हालांकि, अनजाने में इजराइल ने बोतल में बंद "जिन्न" को भी बाहर निकाल दिया है। क्योंकि उपकरणों का हर आविष्कार हमेशा राष्ट्रविरोधी तत्वों तक जल्दी या बाद में पहुंचता ही है और ये तरीका तो फौरन ऐसे आतंकियों तक पहुंच गया, जो ज्यादातर वक्त सुरक्षा एजेंसियों से बच नहीं पाते हैं।

भारत को रहना चाहिए सतर्क
भारत भी चीन से भारी मात्रा में इलेक्ट्रॉनिक्स आयात करता है। ये सारे समान पाकिस्तान, बांग्लादेश और पड़ोसी देशों में भी आयात की जाती हैं और इस दौरान डिस्ट्रीब्यूटर या खरीदारों की पहचान करना नामुमकिन की तरह होता है।
भले ही उपकरणों को अलग करके जांच की जाए, लेकिन किसमें "विस्फोटक चिप" लगी होगी, उसे ढूंढना असंभव होगा? दुनिया अभी भी ट्रोजन हॉर्स नामक वायरस के प्रभाव को नहीं जानती है। यह चिप्स में लगा एक 'नींद में रहने वाला' वायरस है जिसे निर्माता एक साधारण आदेश पर एक्टिवेट कर सकता है। भारत में ऐसे हमलों की संभावना बहुत ज्यादा है। उदाहरण के लिए, ड्रोन के ज्यादातर पुर्जे चीन से आयात किए जाते हैं, ऐसे में खतरा किस हद तक बढ़ सकता है, ये बताने की जरूरत नहीं है।
हर संभव इलेक्ट्रॉनिक गैजेट में एक विस्फोटक चिप लगाई जा सकती है, जिसे दूर से एक्टिवेट किया जा सकता है, लिहाजा अब जोखिम अब सिर्फ मोबाइल और पेजर तक सीमित नहीं है, जिन्हें छोटे बम के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है, बल्कि साधारण चार्जर, खिलौने, कंप्यूटर गेम.. किसी को भी बम बनाया जा सकता है।












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