पश्चिम एशिया बन सकता है जंग का मैदान, पाकिस्तान का होगा काम तमाम! भारत के लिए क्या है नफा-नुकसान?

Iran-Pakistan Clash: पश्चिम एशिया में युद्ध के दो मैदान बन गये हैं, जो क्षेत्रीय शांति के लिए गहरा खतरा पैदा कर रहे हैं और यदि इस पर काबू नहीं पाया गया, तो यह एक बड़े संघर्ष में बदल सकता है।

पहला थिएटर गाजा है, जहां 7 अक्टूबर को हमास के हमलों के कारण इजरायल और हमास के बीच युद्ध चल रहा है, जबकि दूसरा थिएटर पाकिस्तान-ईरान है, जहां दोनों पक्ष एक-दूसरे पर अलगाववादी आतंकवादियों की वृद्धि को रोकने में नाकाम ठहराकर एक दूसरे की सीमा में घुसकर हमले कर रहे हैं।

 Iran-Pakistan conflict

सुन्नी आतंकवादी समूह जैश-अल अदल को रोकने में नाकाम रहने पर ईरान ने इस हफ्ते की शुरुआत में पाकिस्तान पर हमला किया और दावा किया, कि यह आतंकी संगठन पाकिस्तानी धरती से ईरानी विरोधी गतिविधियों को अंजाम दे रहा है और पाकिस्तान ने एक खुफिया-आधारित ऑपरेशन कोड-नाम 'मार्ग बार सर्माचर' लॉन्च करके ईरानी हमले का जवाब दिया है।

पाकिस्तान का दावा है, कि पाकिस्तान वायु सेना ने ईरान के अंदर बलूच अलगाववादी शिविरों पर हमला किया है और इस हमले में कुछ आतंकवादी मारे गये हैं।

तीन मोर्चों पर क्यों उलझा ईरान?

ईरान भारी दबाव में है, क्योंकि अमेरिका और इजराइल दोनों हमास के हमलों में उसकी भूमिका ठहरा रहे हैं और ईरान सिर्फ पाकिस्तान के मोर्चे पर ही नहीं लड़ रहा है, बल्कि इराक में भी उसने कठिन इजराइली जासूसी हेडक्वार्टर पर हमला कर एक नया मोर्चा खोल दिया है, और हमलों को लेकर इराक ने गहरी नाराजगी जताई है।

यमन के हूती विद्रोही और लेबनान के हिज्बुल्लाह को समर्थन देने की वजह से अमेरिका ईरान से नाराज है, जबकि इजराइल ने चेतावनी दी है, कि अगर हिज्बुल्लाह को बाहरी समर्थन जारी रहा, तो वह युद्ध को लेबनान तक ले जाने में संकोच नहीं करेगा।

पिछले महीने इस्लामिक स्टेट ने ईरान के करमान में भीषण बम धमाका किया था, जिसने ईरान को हैरान कर दिया और भड़के तेहरान ने आईएसआईएस के ठिकानों को खत्म करने के लिए उत्तरी सीरिया के क्षेत्रों पर हमला किया। ईरान ने यह दावा करते हुए इराक के एरबिल पर भी हमला किया, कि कुर्द आबादी वाला क्षेत्र मोसाद का क्षेत्रीय मुख्यालय है।

तीसरा हमला पाकिस्तान पर उन इलाकों में किया गया, जिनका इस्तेमाल जैश-अल-अदल करता रहा है। इस हमले ने पाकिस्तान को चौंका दिया और चुनाव से पहले इसने पाकिस्तानी सेना को हमला करने के लिए मजबूर कर दिया, क्योंकि वह मतदाताओं के सामने कमजोर नहीं दिखना चाहती है।

Iran-Pakistan conflict

भारत पर क्या पड़ सकता है प्रभाव?

लाल सागर और अरब सागर में हूती विद्रोहियों के जहाजों पर हमलों ने भारत की चिंताएं बढ़ा दी हैं, क्योंकि इससे सीधे तौर पर भारत के व्यापार पर असर पड़ेगा और भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने इसी हफ्ते ईरान का दौरा किया है और माना जा रहा है, कि ईरान के जरिए भारत ने हूती विद्रोहियों को संदेश भी भेजा है।

भारत फिलहाल किसी भी संघर्ष में उलझने की मूड में नहीं है और भारत की कोशिश यही है, कि डिप्लोमेसी के जरिए भारत ऐसी चुनौतियों को दूर करे। भारतीय विदेश मंत्री की ईरान यात्रा काफी कामयाब रही है।

इसके अलावा, संयुक्त राष्ट्र में भारत की स्थायी प्रतिनिधि रुचिरा कंबोज ने इस महीने की शुरुआत में कहा था, भारत ने कम्युनिकेशन के सारे चैनल खुले रखे हैं और इज़राइल और फिलिस्तीन में नेतृत्व से बात कर रहा है। भारत ने युद्ध में फंसे फ़िलिस्तीनी नागरिकों के लिए मानवीय सहायता भी भेजी है।

हिंदुस्तान टाइम्स की एक रिपोर्ट में कहा गया है, कि तेहरान ने केंद्रीय विदेश मंत्री एस जयशंकर को उनकी ईरान यात्रा के दौरान बताया, कि वह हूती विद्रोहियों पर बहुत कम नियंत्रण रखता है।

इसके अलावा, इस महीने के आखिर में या फिर फरवरी महीने की शुरूआत में ईरान के नेशनल सिक्योरिटी एडवाइजर भारत की यात्रा करने वाले हैं, जिसमें माना जा रहा है, कि वो भारत सरकार बताएंगे, कि ईरान ने पाकिस्तान के अंदर हमले क्यों किए हैं।

ईरान पर जैश-अल-अद्ल के हमलों से यह भी पता चलता है, कि भारत ने वैश्विक समुदाय के सामने इस बात को उजागर करने में सही कदम उठाया है, कि पाकिस्तान दशकों से आतंकवाद के लिए एक सुरक्षित पनाहगाह रहा है और यह न केवल भारत, बल्कि क्षेत्र के अन्य देशों को भी प्रभावित करता है।

लिहाजा, वैश्विक समुदाय का ध्यान एक बार फिर से पाकिस्तान की तरफ आ सकता है, कि कैसे वो आतंकियों के नेटवर्क का संचालन करता है और किस तरह से आतंकी, पाकिस्तान को अपना सुरक्षित घर मानते हैं। जिससे वैश्विक नियामक एजेंसियों को पाकिस्तान पर आतंक के वित्तपोषण पर अधिक कठोर कार्रवाई करने के लिए दबाव बढ़ सकती हैं।

भारत ने ईरान के साथ-साथ सऊदी अरब और यूएई से भी बातचीत शुरू की है। इस महीने की शुरुआत में जब प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से बात की थी, तो रूस के साथ क्षेत्रीय विकास पर भी चर्चा की थी।

पश्चिम एशियाई शक्तियों, रूस, इज़राइल और अमेरिका और यूरोप के साथ भारत के जुड़ाव से पता चलता है, कि वह इन नेताओं को यह बताने की स्थिति में है, कि क्षेत्र में शांति का वातावरण तैयार किया जा सकता है और संघर्ष को बढ़ने से रोका जा सकता है।

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