चीन का जासूसी नेटवर्क इतना तगड़ा कैसे है? जानिए जानकारी चुराने के लिए ड्रैगन क्या करता है
चीन पर हमेशा से आरोप लगे हैं, कि उसने अमेरिका से भारी मात्रा में टेक्नोलॉजी की चोरी की है। कई चीनी फाइटर जेट्स रूस के फाइटर जेट्स की सटीक नकल हैं।

China Espionage: अमेरिका और कनाडा के ऊपर विशालकाय गुब्बारे का मंडराना चीन के जासूसी अभियान का एक टुकड़ा मात्र है, जो दुर्भाग्य से कामयाब रहा है। टेक्नोलॉजी और इंसानी प्लेटफॉर्म के मिश्रण से चीन ने जासूसों का एक तगड़ा जाल तैयार किया है, जिसका मकसद अन्य देशों के रहस्यों को प्राप्त करना है। हालांकि, पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना (PRC) पूरी तरह से एक अलग पैमाने पर काम करता है। चीन सिर्फ का सिर्फ सुरक्षा मंत्रालय ही नहीं है, जो जासूसी की भर्ती करता है, बल्कि चीन का जासूसी नेटवर्क, हमारी और आपकी समझ से कहीं ज्यादा अंदर तक फैला रहता है। आइये समझने की कोशिश करते हैं, कि आखिर चीन किसी देश के अंदर जासूसी कैसे करता है? जानकारियां निकालने के लिए वो किस तंत्र का इस्तेमाल करता है?

चीन का जासूसी कानून क्या है?
चीन के 2017 के राष्ट्रीय खुफिया कानून में स्पष्ट रूप से कहा गया है, कि सभी चीनी कंपनियों और नागरिकों को देश की सहायता करना आवश्यकता है। इसमें कहा गया है, कि "एक संगठन या नागरिक, कानून के मुताबिक, राष्ट्रीय खुफिया कार्य में सहयोग और सहायता करेगा। इसके साथ ही वो राष्ट्रीय खुफिया कार्य को पूरी तरह से गोपनीय रखेगा, जिसे वह जानता/जानती है। राज्य उस व्यक्तिगत संगठन की रक्षा करेगा, जिसने राष्ट्रीय खुफिया कार्य में सपोर्ट किया है, असिस्ट किया है या फिर कॉपरेट किया है।"

आम नागरिक कैसे करते हैं जासूसी?
2017 से पहले भी चीन के नागरिकों और संस्थानों को सरकार की मदद करना जरूरी था। चीन की सुरक्षा सेवाएं इस काम के लिए उस व्यक्ति या संगठन को "चाय के लिए निमंत्रण" भेजता था, जो एक चीनी के लिए यह जानने के लिए पर्याप्त होता था, कि देश की उससे क्या अपेक्षा है। यह अभी भी जारी है। हर चीनी कंपनी या नागरिक, जासूसी काम को अंजाम देने के लिए पूरी दुनिया में एक मंच हैं। चीनी सरकार उनसे किसी भी वक्त काम ले सकती है। चीनी मूल के लोगों पर भी मदद के लिए दबाव डाला जा सकता है। यह विशेष रूप से तब होता है, जब उनके पास परिवार, व्यावसायिक हित या कुछ और होता है जो उन्हें चीन की सरकार से वापस कनेक्ट करता है और ये अमेरिका के लिए बिल्कुल उल्टा है। अमेरिका की सरकार ऐसा मदद हासिल नहीं कर सकती है। उदाहरण के लिए, Apple ने अमेरिकी अधिकारियों की सामूहिक हत्या करने वाले आतंकवादियों के iPhone को अनलॉक करने में मदद करने से सुरक्षा एजेंसियों को इनकार कर दिया था, जबकि चीनी कंपनियां ऐसा नहीं कर सकती हैं।

जासूसी में शामिल होती हैं चीनी कंपनियां
अमेरिका के विपरीत, चीनी दूरसंचार और विद्युत नेटवर्क लोगों की जासूसी करने के लिए, उनकी बातों को सुनने के लिए सैटेलाइट और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और हार्डवेयर का इस्तेमाल करती हैं। और सबसे हैरान करने वाली बात ये है, कि खुद अमेरिकी कंपनियों ने भी चीन की इन जासूसी कंपनियों को अमेरिका और दुनिया के कई हिस्सों में पैर जमाने, सिस्टम स्थापित करने और उन्हें स्थापित करने में मदद की। ऐसा इसलिए, क्योंकि पहले चीन ये सुनिश्चित करता है, कि उसके प्रोडक्ट्स काफी सस्ते हैं, ताकि उस जगह के नागरिकों को चीनी सामानों की लत लग जाए और फिर अमेरिकी कंपनियां इसका विरोध नहीं कर सकतीं। चीन की इलेक्ट्रॉनिक और विद्युत कंपनियां अपनी टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल जानकारी जुटाने के लिए करती हैं। वहीं, इनमें से कुछ को आपत्तिजनक तरीके से इस्तेमाल किया जा सकता है।

हर जानकारी को सुरक्षित रखता है बीजिंग
चीन में भले ही लोगों के पास व्यक्तिगत स्वतंत्रता नहीं है, लेकिन चीन के जासूस अमेरिका में मिलने वाली सभी तरह की स्वतंत्रताओं को भी भुनाते हैं। इसमें आने-जाने की आजादी, खुद को पत्रकार कहने की आजादी (भले ही आप एमएसएस ऑपरेटिव ही क्यों ना हों), और प्लेटफॉर्म की स्थापना करने के लिए रणनीतिक रूप से स्थित अचल संपत्ति खरीदने की आजादी भी शामिल है। FBI के निदेशक क्रिस्टोफर रे ने कहा, कि FBI हर 12 घंटे में चीन से जुड़े एक मामले तक पहुंचती है, लेकिन जांच के दौरान पता चलता है, कि शायद उनसे 100 ऐसे और मामले छूट गये हैं। सैन्य और देश के दूसरे सीक्रेट की चोरी का मामला तो काफी देर से पता चलता है, लेकिन चीन किसी देश की बौद्धिक संपदा की भी जमकर चोरी करता है। चीन ऐसा सालों से कर रहा है और उसने किसी दूसरे देश की बौद्धिक संपदा का जमकर इस्तेमाल अपने आर्थिक विकास के लिए किया है।

चीन की जासूसी को कितना रोक पाता है US?
चीन की जासूसी से बचने के लिए अमेरिका सालों से हाथ पैर मारता रहा है, लेकिन दिक्कत ये रही, कि अमेरिका ने चीन की जासूसी ताकत को घातक काफी देर से माना, जिसकी वजह से अमेरिका ने काफी ज्यादा नुकसान उठाया। अमेरिकी सरकार में हमेशा से ऐसे अधिकारी रहे हैं, जिन्होंने चीनी जासूसी के खतरे को पहचाना है। निक एफ्टीमियाडेस, जो पहले डीआईए और सीआईए के साथ थे, उन्होंने 1990 के दशक की शुरुआत में चीनी जासूसी पर किताब लिखी थी और तब से वो चीनी जासूसी पर बात कर रहे हैं। लेकिन, अभी भी अमेरिका ने काफी कम ऐसे कदम उठाए हैं, जिससे चीनी जासूसों को रोका जा सके। जैसे, आसमान में मंडराने वाले चीन के जासूसी गुब्बारे को मारा जाए या नहीं, इसका फैसला करने में अमेरिकी अधिकारियों को 24 घंटे से ज्यादा लग गये।

चीनी जासूसों के खिलाफ कार्रवाई
ऐसा काफी कम हो पाता है, कि अमेरिका चीनी जासूसों को गिरफ्तार कर पाती है और उन्हें सजा दिलाने का मामला तो और भी ज्यादा दुर्लभ होता है। चीनी जासूसों के खिलाफ जुर्माना भी काफी कम लग पाता है, लिहाजा चीनी जासूस और बेफिक्र होकर अपना काम करता है। उदाहरण के तौर पर, जिस चीनी नागरिक ने चीनी रक्षा मंत्रालय को अमेरिकी C-17 परिवहन विमान योजना चुराने में मदद की थी, उसे दोषी ठहराया गया, लेकिन उसे केवल चार साल की जेल हुई। कुल मिलाकर, संयुक्त राज्य अमेरिका ने (आमतौर पर जानबूझकर) चीनी जासूसी की अनदेखी की है। कई डेटा बिंदुओं में से एक: निजी सुरक्षा फर्म स्ट्राइडर ने 2022 में बताया था कि, 1987 से 2021 तक, कम से कम 162 चीनी वैज्ञानिक, जिन्होंने लॉस एलामोस में काम किया था, उन्होंने अमेरिकी परमाणु प्रयोगशाला में भी काम किया और वो बाद में वापस चीन लौट आए और फिर चीन की सेना के साथ काम करने लगे। इन चीनी वैज्ञानिकों ने चीन के अनुसंधान एवं विकास कार्यक्रमों के अलावा परमाणु हथियारों के डिजाइन किया और चीनी तकनीकों को आगे बढ़ाया। लिहाजा अब मांग की जा रही है, कि अमेरिका को ऐसे सख्त कानून बनाने होंगे, जिससे वो जासूसी से बच सके।












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