कोविड के युग में कैसे बन रही हैं दूसरे देशों में फ़िल्में?

कोरोना फिल्म
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कोरोना महामारी के दौरान कुछ महीनों की बंदी के बाद फ़िल्म और टीवी कार्यक्रमों की शूटिंग दोबारा शुरू हो रही है. सेट पर काम करने वालों की भूमिकाएँ बदल गई हैं.

लेकिन सेट पर लौट रहे लोगों के लिए सब कुछ पहले जैसा नहीं रहा. नए सुरक्षा दिशानिर्देशों का पालन करते हुए उन्हें ख़ुद को नए सिरे से ढालना पड़ रहा है.

हमने ब्रिटेन और दूसरे देशों में फ़िल्में बना रहे कुछ लोगों से बात की और यह समझने का प्रयास किया कि फ़िल्म निर्माण के इस नए दौर में क्रू सदस्य कैसे काम कर रहे हैं.

हेलेन जोन्स - निर्माता

जोन्स एक साइकोलॉजिकल हॉरर फ़िल्म बना रही हैं, जिसमें निआम अल्गर और माइकल स्माइली हैं. यह फ़िल्म 2021 में रिलीज़ होने वाली है. मार्च के अंत में जोन्स जब फ़िल्म के बचे हुए हिस्से की शूटिंग की तैयारी कर रही थीं, तभी कोविड-19 के कारण काम रोकना पड़ा.

लॉकडाउन के दौरान वह शूटिंग के सख़्त दिशानिर्देशों को इकट्ठा करती रहीं, जो ब्रिटिश फ़िल्म कमीशन (BFC) की सिफारिशों के आधार पर तैयार किए गए थे.

27 जुलाई को वह लंदन में 4 दिनों की शूटिंग के लिए सेट पर आईं, हालांकि फ़िल्म को मूल रूप से उत्तरी इंग्लैंड में फ़िल्माया गया था.

कोविड के युग में कैसे बन रही हैं दूसरे देशों में फ़िल्में?

वह कहती हैं, "हमारे पास समय कम था. हमें ख़तरा कम होने तक इंतज़ार करना पड़ा. हम नहीं चाहते थे कि कोई अभिनेता या क्रू सदस्य दूसरे प्रोजेक्ट में चला जाए."

सेट पर दोबारा काम शुरू करने के बारे में BFC के दिशानिर्देश पहली बार 1 जून को जारी किए गए थे. तब से ये लगातार बदल रहे हैं.

जोन्स रोज़ाना ये दिशानिर्देश देखती थीं. उनके लाइन प्रोड्यूसर और फ़र्स्ट असिस्टेंट डायरेक्टर अतिरिक्त ट्रेनिंग से गुज़रते हैं, इसके अलावा एक कोविड-19 हेल्थ सुपरवाइजर हमेशा सेट पर मौजूद होता.

दिशानिर्देशों में सलाह दी गई है कि जहाँ भी मुमकिन हो, वहाँ सोशल डिस्टेंसिंग का पालन किया जाए. जहाँ दो मीटर की दूरी रखना संभव न हो, तो वहाँ कम समय में काम पूरा किया जाए और हर व्यक्ति के संपर्क में आने वाले लोगों की संख्या सीमित की जाए.

जोन्स कहती हैं, "सेट पर आपको ख़ुद से यह सवाल करना होता है कि क्या ये आदमी वहाँ ज़रूरी है?"

जोन्स अपने सेट पर सिर्फ़ कैमरा और साउंड क्रू को रखती थीं, जबकि कॉस्ट्यूम, हेयर और मेकअप डिपार्टमेंट सेट से दूर रहते थे. अगर उन्हें सेट पर आना पड़े तो उनके लिए एक जगह तय कर दी गई है.

कोविड के युग में कैसे बन रही हैं दूसरे देशों में फ़िल्में?

क्रू सदस्यों की तादाद घटाने के अलावा जोन्स ने सुरक्षित तरीक़े से काम करने के कुछ अन्य उपाय खोजे. वो बताती हैं, "रिमोट मॉनिटरिंग सिस्टम ने बहुत अच्छा काम किया. इससे एक या दो मॉनिटर के सामने झुंड लगना बंद हो गया."

"लॉकडाउन से पहले एक मॉनिटर पर प्रानो बेली-बॉन्ड (फ़िल्म की निर्देशक) काम करती थीं और दूसरे पर मेकअप और कॉस्ट्यूम डिपार्टमेंट नज़र रखता था. ज़रूरत पड़ने पर मैं और दूसरे क्रू सदस्य उसी पर एक्शन देखते थे. नई व्यवस्था में जिसे ज़रूरत होती है, वह इस मॉनिटरिंग सिस्टम से अपना आई-पैड जोड़ लेता है."

क्रू को हर दिन काम में कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा. हालाँकि जोन्स को लगता है कि हालात ने उन्हें क़रीब ला दिया. क़रीब तीन महीने तक घर बैठे रहने के बाद वे वापस लौटे, तो सेट पर उनके मिले-जुले जोश ने शूट को कामयाब बना दिया.

वह कहती हैं, "कुछ कलाकार और क्रू सदस्य दूसरों से अधिक सतर्क थे, लेकिन मुझे लगता है कि इस तरह के साझा अनुभव से एक अच्छा माहौल बनाने में मदद मिली और आख़िरकार शूट सफल हुआ."

प्रानो बेली-बॉन्ड- निर्देशक

बेली-बॉन्ड सेंसर फ़िल्म की निर्देशक और सह-लेखिका हैं. यह उनकी पहली फ़ीचर फ़िल्म है, जो फ़िलहाल पोस्ट-प्रोडक्शन में है.

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बेली-बॉन्ड ने फ़िल्म के लिए नए सुरक्षा दिशानिर्देश तैयार करने में मदद की, लेकिन उन्हें इसका रचनात्मक समाधान भी ढूँढ़ना पड़ा.

"हमारे कोविड-19 सुरक्षा अधिकारी कहेंगे कि आप इस जगह सिर्फ़ 6 सहायक कलाकार रख सकते हैं, इसलिए निर्देशक के तौर पर मुझे सोचना था कि मैं कैसे शूट करूँ कि उस सीन में ज़्यादा लोगों के होने का अहसास हो."

वह रेस्तरां में एक सीन की शूटिंग के बारे में बताती हैं. "वहाँ सिर्फ़ तीन लोग डिनर के लिए बैठे हैं, लेकिन चूँकि हम एक छोटी जगह पर शूटिंग कर रहे थे, इसलिए हमें अलग-अलग टीमों को वहाँ आने से रोकना था."

"आर्ट डिपार्टमेंट काम करने आया, तो आपको लाइटिंग क्रू को रोकना होगा. यह पूरे शेड्यूल को लंबा कर देता है."

सेंसर फ़िल्म 1985 के बारे में है. बेली-बॉन्ड को लगता है कि इस फ़िल्म की पटकथा से उनको मदद मिली.

कोविड के युग में कैसे बन रही हैं दूसरे देशों में फ़िल्में?

"मुझे हर सीन के लिए ऑन-स्क्रीन जोखिम का मूल्यांकन करना था, ऐसा हमारे फ़ाइनेंसर्स ने कहा था. यह साइकोलॉजिकल हॉरर फ़िल्म है, इसलिए इसमें गले लगाने या चुंबन के दृश्य की ज़रूरत नहीं थी, इसलिए कंटेंट को लेकर मुझे उतनी चिंता नहीं थी."

बेली-बॉन्ड को सबसे ज़्यादा अपने सहयोगियों की मानसिक सेहत की चिंता थी. उन्होंने शूट दोबारा शुरू करने से पहले सेट पर लौटने को लेकर घबराए हुए लोगों के साथ वक़्त बिताया और उनका भरोसा बढ़ाया.

ब्रिटेन में फ़िल्म निर्माण के निकट भविष्य के बारे में उनको हैरानी होती है कि यह महामारी फ़िल्मों को किस हद तक बदल देगी.

"मुझे कुछ स्क्रिप्ट भेजी गई हैं, जिनमें किसी कमरे में एक ही कैरेक्टर पर फ़ोकस किया गया है. तो मुमकिन है कि फ़िल्म निर्माता कंटेंट के ज़रिए स्क्रीन पर सोशल डिस्टेंसिंग की कोशिश कर रहे हैं."

बेली-बॉन्ड को उम्मीद है कि वह और उनके साथी निर्देशक भविष्य में भी अपना काम जारी रखेंगे. "मैं सर्जरी के लिए डॉक्टर के पास गई थी, जहाँ मुझे नहीं लगता कि दिशानिर्देशों का उतनी सख़्ती से पालन होता है जितना हमारी इंडस्ट्री में होता है."

जोसेफ़िन एसबर्ग - प्रोडक्शन डिजाइनर

एसबर्ग रूबेन ऑसलुंड की पहली अंग्रेजी फ़ीचर फ़िल्म "ट्राएंगल ऑफ़ सैडनेस" में काम रही हैं, जिसकी शूटिंग जून के आख़िर में स्वीडन में दोबारा शुरू हुई.

"ट्राएंगल ऑफ़ सैडनेस" का प्रोडक्शन तीन महीनों के लिए रुका था. स्वीडिश निर्देशक ऑसलुंड की 11 मिलियन डॉलर (83 लाख पाउंड) की यह फ़िल्म यूरोप के बड़े प्रोडक्शन में से एक है, जिस पर दोबारा काम शुरू हुआ है.

एसबर्ग कहती हैं, "मेरे विभाग ने मुख्य क्रू के आने से पहले से ही काम शुरू कर दिया था. माहौल बहुत बढ़िया था. महीनों तक बिना काम के रहने के बाद सेट पर लौटकर सभी लोग बहुत ख़ुश थे."

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एसबर्ग पश्चिमी स्वीडन के ट्रोलहैटन शहर के एक स्टूडियो में काम कर रही है. यहाँ लॉकडाउन से पहले काम शुरू हुआ था.

ऑसलुंड की पहली अंग्रेज़ी फ़िल्म में वूडी हैरेलसन और ब्रिटिश अभिनेता हैरिस डिकेन्सन हैं. प्रोडक्शन में जाने के 25 दिन बाद ही कोविड-19 की वजह से काम बंद करना पड़ा.

जब यह तय हो गया कि हैरेलसन को हवाई में अपने घर से शूटिंग के लिए उड़ान भरने की इजाज़त मिल जाएगी, तभी दोबारा शूटिंग शुरू की गई.

एसबर्ग ने बीबीसी कल्चर को बताया, "पहले दिन टीम के हिसाब से हमें अलग-अलग रंग दिए गए. मुझे गुलाबी रंग दिया गया क्योंकि मैं आर्ट डिपार्टमेंट से हूँ. मुझे हरा रंग भी मिला, जो मुख्य यूनिट का रंग है. हरे रंग वाली टीम को निर्देशक, फोटोग्राफी निर्देशक और अभिनेताओं के साथ सेट पर रहने की इजाज़त है."

"हमारे होटल का रेस्तरां बंद है और हमें नाश्ता, लंच और डिनर डिब्बे में मिलता है. हम फ़ेस मास्क पहनते हैं. अभिनेताओं के पास काम करने वाले सभी लोगों को फ़ेस शील्ड पहनना होता है. हमें अपना तापमान लेने के लिए थर्मामीटर भी दिए गए, लेकिन मैं सेहतमंद हूँ और कई बार भूल जाती हूँ."

प्रोडक्शन डिज़ाइनर का कहना है कि सेट पर नए उपायों से उनके काम करने की क्षमता पर कोई वास्तविक असर नहीं पड़ा है, फिर भी शुरुआत में उनको सहयोगियों के साथ सामाजिक मेलजोल की कमी खटकती थी.

"मुझे अजीब लगता था कि मैं किसी को गले नहीं लगा पाती, लेकिन यही आज की सामान्य बात है."

हैरेलसन को हफ़्ते भर की शूटिंग के लिए स्वीडन आने की अनुमति देने के लिए स्वीडिश बॉर्डर पुलिस और विदेश मंत्रालय सहित कई विभागों को मनाना पड़ा.

स्वीडन में विदेशी यात्रियों के आने पर 17 मार्च को पाबंदियां लागू की गई थीं. 31 अगस्त तक इसके कड़े नियम लागू रहे.

इसमें सिर्फ़ उन्हीं लोगों को छूट दी गई, जिनको उच्च कौशल वाला पेशेवर माना जाता है और जो दूर रहकर अपना काम नहीं कर सकते, फिर भी स्वीडन में प्रवेश देने का आख़िरी फ़ैसला सरहद पर तैनात पुलिस अथॉरिटी करती है.

ग़लत काग़जात के शक में हैरेलसन को जब लॉस एंजेलेस में रोक लिया गया, तो फ़िल्म के निर्माता को एयरलाइंस अधिकारियों को फ़ोन करके समझाना पड़ा कि सब कुछ सही है.

एसबर्ग कहती हैं, "हमारे निर्माता एरिक हेमेनडॉर्फ़ को यह समझाने में काफ़ी मशक्कत करनी पड़ी कि वूडी को अपवाद के तौर पर आने दिया जाए. जब वह यहाँ पहुँच गए, तो वह हर बात के लिए निश्चिंत थे."

महामारी अभी जारी है, फिर भी एसबर्ग अपने काम को लेकर आशावादी हैं. "ऐसा लगता है कि कई सारे प्रोडक्शन फिर से शुरू हो गए हैं इसलिए निकट भविष्य में चीज़ें अच्छी लग रही हैं."

लिज़ी टालबोट- इंटीमेसी कोऑर्डिनेटर

टालबोट फिलहाल दो प्रोजेक्ट पर काम कर रही हैं. उन्होंने इंटीमेसी फ़ॉर स्टेज एंड स्क्रीन नेटवर्क बनाया है.

इंटीमेसी कोऑर्डिनेटर फ़िल्म और टीवी सेट का ज़रूरी हिस्सा बनते जा रहे हैं, ख़ासकर #मीटू और टाइम्स अप आंदोलनों के बाद. टालबोट कहती हैं, "हमारा काम निर्देशक के विज़न को सबसे सुरक्षित तरीक़े से उतारना है."

उनके काम में फ़िल्म के यौन अंतरंगता वाले दृश्यों की कोरियोग्राफी शामिल है. इसके अलावा ग़ैर-यौन अंतरंग दृश्यों, जैसे पारिवारिक घनिष्ठता वाले दृश्य फ़िल्माने में भी उनकी मदद ली जाती है.

किसी एक दृश्य से वे क्या चाहते हैं, इस बारे में निर्देशकों और अभिनेताओं के बीच रज़ामंदी कराने में भी वह मददगार होती हैं.

शारीरिक संपर्क वाले दृश्यों को फ़िल्माने में BFC के दिशानिर्देश नई चुनौतियाँ खड़ी करते हैं. इन दिशानिर्देशों के बाद ही ऐसी शूटिंग को गाइड करने के लिए इंटीमेसी कोऑर्डिनेटर की मौजूदगी को अनिवार्य किया गया.

टालबोट को लगता है कि महामारी को अलग रखकर देखें तो यह लंबे दौर में वरदान साबित होगा. सुरक्षा का पैमाना ऊँचा किया गया है और सहमति को अधिक महत्व दिया जा रहा है.

निजता और उसमें दूसरे की सीमा को लेकर लोग पहले से जागरुक हुए हैं. अगर कोविड-19 की वजह से वे इस बारे में सोच रहे हैं, तो यह सकारात्मक बात है.

टालबोट ने अपने क्षेत्र की अग्रणी हस्ती के रूप में यूके क्रिएटिव इंडस्ट्रीज यूनियन (Bectu) के रिकवरी प्लान में योगदान दिया है.

अंतरंग दृश्यों की शूटिंग में कलाकारों और क्रू सदस्यों की सुरक्षा को लेकर विस्तृत दिशानिर्देश बनाने में उन्होंने मदद की है. मिसाल के लिए, शारीरिक संपर्क और नग्नता वाले दृश्यों में वे कैमरा ट्रिक को वरीयता देती हैं.

रिपोर्ट यह भी कहती है कि अभिनेताओं के निजी अंगों को ढँकने वाले कपड़े अलग होने चाहिए और उनको कभी साझा नहीं करना चाहिए.

अगर अभिनेताओं को 2 मीटर से करीब आने की ज़रूरत हो, तो टेस्टिंग और आइसोलेशन की प्रक्रियाओं का सख़्ती से पालन किया जाना चाहिए. अंतरंग दृश्यों की शूटिंग के लिए सेट पर आने से पहले कलाकारों को 14 दिन के लिए सेल्फ-आइसोलेट होने की सलाह दी गई है.

सेट पर सुरक्षा में सुधार हुआ है, लेकिन ऑनलाइन कास्टिंग और ऑडिशन शुरू होने से फिक्र बढ़ी है. हाल ही में एक व्यक्ति को कास्टिंग डायरेक्टर बनकर अभिनेत्रियों से सेक्स सामग्रियों की मांग करते पकड़ा गया था.

कास्टिंग एजेंट कलाकारों को सावधान करते रहते हैं कि ऑडिशन के दौरान कपड़े उतारने या सेक्स क्रिया दिखाने की ज़रूरत नहीं होनी चाहिए.

टालबोट कहती हैं, "एक तरह से देखें तो कास्टिंग की दुनिया में विविधता आई है कि कोई कहीं से भी ऑडिशन दे सकता है, लेकिन हमें दूसरी समस्याएँ दूर करनी होंगी."

लॉकडाउन के बाद फ़िल्में बना रही कंपनियां अंतरंग दृश्यों को फ़िल्माने के लिए कई नए रचनात्मक तरीके खोज रही हैं. इनमें से एक तरीक़ा है प्रेम दृश्यों के लिए कलाकारों के असल ज़िंदगी के पार्टनर का इस्तेमाल. अमेरिकी सोप ओपेरा "द बोल्ड एंड ब्यूटीफुल" में यह आज़माया जा रहा है.

निजी और पेशेवर ज़िंदगी का फ़र्क इसे जटिल बनाता है. टालबोट कहती हैं, "भावनाएँ असली होती हैं, आपका शरीर उस समय के हार्मोन्स को महसूस करता है, लेकिन ये स्थितियाँ नकली होती हैं. आप दो लोग स्पॉटलाइट के नीचे होते हैं और 20 अन्य लोग आपको देख रहे होते हैं."

इन स्थितियों में कलाकारों की जगह पुतले से काम चलाने का तरीक़ा है. इसे भी "द बोल्ड एंड ब्यूटीफुल" ने आज़माया है.

थाई और बॉलीवुड के फ़िल्म सेट पर प्रेम दृश्यों को पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया गया है, जबकि नेटफ्लिक्स शो रिवरडेल ने स्क्रिप्ट बदलने का रास्ता निकाला है.

सेट पर अभिनेताओं की निजी सुरक्षा पर ज़ोर देने से इंटीमेसी कोऑर्डिनेटर की जिम्मेदारियाँ बढ़ जाती हैं.

टालबोट कहती हैं, "कभी-कभी जब हमें प्रोडक्शन में शामिल किया जाता है, तो लगता है कि हम वहाँ स्वास्थ्य और सुरक्षा अधिकारी बनकर मौजूद हैं, लेकिन हमारी ट्रेनिंग कोरियोग्राफर की भी है. हमारा काम अंतरंगता को सुरक्षित तरीक़े से दिखाने में मदद करने का है. तो हो सकता है कि आगे इसमें और मौक़े बनें."

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