NASA InSight:जानिए नासा के इनसाइट स्पेसक्राफ्ट से जुड़ी हर जानकारी
नई दिल्ली। नासा ने मंगल ग्रह के अपने अभियान में बड़ी सफलता हासिल की है। छह महीने की यात्रा तय करके नासा का इंसाइट मिशन मंगल ग्रह की जमीन पर लैंड कर गया है, वह यहां मंगल के जमीनी और आंतरिक भागों का अध्ययन करेगा। गौर करने वाली बात यह है कि पृथ्वी के बाद मंगल एकमात्र ऐसा ग्रह है जहां नासा पृथ्वी की तर्ज पर इसके भू भाग का अध्ययन करेगा। मंगल ग्रह पर नासा के इंसाइट की सफलतापूर्वक लैंडिंग के बाद वैज्ञानिकों में खुशी की लहर है।

21वां मंगल अभियान
लैंडिंग के बाद इनसाइट ने अपनी सेल्फी फोटोग्राफ भेजी है। आपको बता दें कि इनसाइट यानि इंटीरियर एक्सप्लोरेशन यूजिंग सिस्मिक इन्वेस्टिगेसंश, जियोड्सी एंड हीट ट्रांसपोर्ट अमेरिका का मंगल ग्रह पर 21वां अभियान है। इनसाइट ने मार्स की यात्रा के दौरान 301223981 मील की दूरी तय की है, इस दौरान इसकी अधिकतम रफ्तार 6200 मील प्रति घंटा थी। अगले दो वर्षों तक यह स्पेसक्राफ्ट मंगल ग्रह का अध्ययन करेगा।

क्या करेगा यह स्पेसक्राफ्ट
नासा के इस मिशन की मदद से मंगल ग्रह की सतह के बारे में और भी अधिक जानकारी हासिल हो सकेगी, साथ ही इसके सोलर सिस्टम की भी जानकारी मिल सकेगी। स्पेसक्राफ्ट पर लगे आधुनिक संयंत्रों की मदद से हमे इस बात की जानकारी मिलेगी कि आखिर कैसे मंगल ग्रह का पृथ्वी की तरह ही निर्माण हुआ है। इस मिशन के जरिए मंगल ग्रह के सोलर सिस्टम की विस्तृत जानकारी मिल सकेगी। हमे पता चलेगा कि मंगल ग्रह की सतह कैसे बनी है और इसके भीतर कौन-कौन सी परते हैं। यही नहीं इस बात की भी हमे जानकारी मिलेगी कि मंगल ग्रह पर जमीन के भीतर का तापमान क्या है।

मंगल ग्रह पर क्यों भेजा गया
मंगल ग्रह पर नासा के स्पेसक्राफ्ट की लैंडिंग के बाद यह सवाल खड़ा होता है कि आखिर मंगल ग्रह को ही इसके लिए क्यों चुना गया। इसकी बड़ी वजह है कि यह पृथ्वी से काफी मिलता-जुलता ग्रह है, यहां गर्मी है, पानी है, पर्यावरण भी धरती के अनुकूल है। हालांकि मंगल ग्रह पर परिवर्तन बंद हो गया जबकि धरती पर बदलाव अभी भी जारी है। इस मिशन के जरिए वैज्ञानिक इस बात को बेहतर समझ पाएंगे कि आखिर धरती और मंगल ग्रह में क्या समानता है और कैसे दोनों का सोलर सिस्टम और चट्टानें एक दूसरे से मिलती-जुलती है। हमे इस बात को भी समझने में आसानी मिलेगी कि कैसे मंगल ग्रह ठंडा और सूखा है जबकि वीनस और मर्करी काफी गर्म है।

कैसे लैंड हुआ
मंगल ग्रह पर स्पेस मिशन की सफलता पर नजर डालें तो अबतक 40 फीसदी मिशन सफल रहे हैं। मंगल ग्रह पर लैंड करना वैज्ञानिकों के लिए काफी मुश्किल काम रहा है। इन्साइट के वैज्ञानिक ब्रूस बेनरेड्ट का कहना है कि यहां लैंडिंग इतनी खतरनाक और मुश्किल है कि हमेशा कुछ गलत होने की संभावना काफी अधिक रहती है। 300 मिलियन मील की दूरी तय करने के बाद इन्साइट 6 मिनट के भीतर मंगल ग्रह पर सफलतापूर्वक लैंड हुआ। पैराशूट की मदद से धरती से मंगल ग्रह पर लैंड करने में स्पेसक्राफ्ट ने 8 मिनट का समय लिया। इस स्पेसक्राफ्ट से हमे वास्तविक समय की जानकारी मंगल ग्रह से मिल सकेगी।

क्यों है खास
नासा के इस स्पेसक्राफ्ट में कई अत्याधुनिक यंत्र लगे हैं जिसकी मदद से मंगल ग्रह पर तमाम जानकारियों को हासिल किया जा सकता है। इसमे एक लैंडर लगा है जिसमे 1.8 मीटर लंबा रोबोटिक आर्म है। इसमे दो सोलर पैनल लगे हैं, साथ ही सिस्मोमीटर लगा है। तापमान को मापने के लिए और सिग्नल को पकड़ने के लिए भी यंत्र लगाए गए हैं। साथ ही दो कैमरा भी लगाए गए हैं जो कि नेविगेशन में मदद करेंगे ताकि किसी भी आपदा को टाला जा सके। एक कैमरा हाथ में लगा है जबकि दूसरा कैमरा लैंडर के सामने लगा है। इनसाइट के साथ दो छोटे मिनी स्पेसक्राफ्ट भी जिनका नाम मार्स क्यूबवन और क्यूबस्टैट्स भी यहां भेजे गए हैं। ये दोनों स्पेसक्राफ्ट इनसाइट को मिलने वाले सिग्नल का अध्ययन करेंगे।
तस्वीरें सौजन्य: नासा के ट्विटर हैंडल से
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