HAL-UAC Deal: क्या है SJ-100 प्रोजेक्ट? जिस पर साथ काम करेंगे भारत और रूस, छोटे शहरों का होगा बड़ा फायदा
HAL-UAC Deal: हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) और रूस की यूनाइटेड एयरक्राफ्ट कॉर्पोरेशन (UAC) के बीच SJ-100 क्षेत्रीय जेट प्रोग्राम पर बढ़ता सहयोग भारत के रीजनल एविएशन सेक्टर को पूरी तरह नया रूप दे सकता है। 100 सीटों वाला यह विमान खास तौर पर छोटी दूरी की उड़ानों और भारत में स्टेप वाइज डॉमेस्टिक मैन्युफैक्चरिंग के लिए बेहद अहम माना जा रहा है।
डिफेंस नहीं अब सिविए एविशन में HAL की एंट्री
हैदराबाद के बेगमपेट एयरपोर्ट पर आयोजित 'विंग्स इंडिया 2026' इवेंट में SJ-100 रीजनल जेट ने नीति निर्माताओं, एयरलाइन अधिकारियों और एविएशन इंडस्ट्री के एक्सपर्ट्स का खास ध्यान खींचा। स्टैटिक डिस्प्ले पर रखे गए इस ट्विन-इंजन विमान (दो इंजनों वाला विमान) ने यह साफ कर दिया कि HAL अब सिर्फ डिफेंस तक सीमित नहीं रहना चाहता, बल्कि भारतीय सिविल एविएशन सेक्टर में भी बड़ी भूमिका निभाने की तैयारी में है।

टियर-2 और टियर-3 शहरों की पकड़ी नब्ज
HAL के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर डी.के. सुनील ने इंडिया टुडे को दिए एक इंटरव्यू में बताया कि SJ-100 कंपनी की भविष्य की रणनीति का अहम हिस्सा है। उन्होंने कहा- "भारत के लिए असली विकास की कहानी क्षेत्रीय कनेक्टिविटी से जुड़ी है। SJ-100 जैसे विमान टियर-2 और टियर-3 शहरों को जोड़ने वाले छोटे रूट्स के लिए बिल्कुल सही हैं।"
3,000 किलोमीटर रेंज वाला 100-सीटर जेट
SJ-100 को इस तरह डिजाइन किया गया है कि यह करीब 100 यात्रियों को 3,000 किलोमीटर तक की दूरी पर ले जा सके। यह विमान खास तौर पर घरेलू रूट्स के लिए ऑप्टिमाइज़ किया गया है। इसमें फ्लाई-बाय-वायर कंट्रोल सिस्टम, फुल ग्लास कॉकपिट के साथ-साथ छोटे और अधूरे रनवे से भी ऑपरेट करने की क्षमता है, जो भारत के कई क्षेत्रीय एयरपोर्ट्स के लिए बेहद जरूरी फीचर है।
आराम और कम लागत पर फोकस
इस विमान का केबिन काफी बड़ा है, सीटें चौड़ी हैं और शोर का स्तर कम रखा गया है, जिससे यात्रियों को बेहतर अनुभव मिलता है। साथ ही, यह हाई-फ्रिक्वेंसी उड़ानों के लिए एक कॉस्ट-इफेक्टिव ऑप्शन माना जा रहा है, जो क्षेत्रीय एयरलाइंस के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है।
HAL-UAC डील से भारत में मैन्युफैक्चरिंग का रास्ता साफ
इवेंट के दौरान HAL और रूस की यूनाइटेड एयरक्राफ्ट कॉर्पोरेशन (UAC) के बीच SJ-100 प्रोग्राम पर सहयोग बढ़ाने का समझौता हुआ। इस डील से भारत में लाइसेंस प्राप्त मैन्युफैक्चरिंग, मेंटेनेंस और पूरे लाइफ-साइकिल सपोर्ट का रास्ता खुल गया है। यह HAL के लिए एक बड़ा और रणनीतिक बदलाव माना जा रहा है।
पहले विमान, फिर असेंबली, फिर पूरा निर्माण
डी.के. सुनील ने इस साझेदारी की रणनीति को विस्तार से समझाया। उन्होंने कहा- "हम भारत में एक पहले से साबित क्षेत्रीय जेट लाना चाहते हैं और फिर धीरे-धीरे यहां क्षमता विकसित करेंगे। शुरुआत पूरी तरह बने विमानों से होगी, उसके बाद असेंबली होगी और जैसे-जैसे डिमांड बढ़ेगी, हम गहरे स्तर के मैन्युफैक्चरिंग की ओर बढ़ेंगे।"
UDAN जैसी योजनाओं में SJ-100 की एंट्री की तैयारी
HAL सरकार की क्षेत्रीय कनेक्टिविटी योजनाओं के तहत SJ-100 को भारतीय एयरलाइंस के बेड़े में शामिल कराने पर काम कर रहा है। सुनील का अनुमान है कि अगले 10 सालों में इस सेगमेंट में करीब 150 से 200 विमानों की मांग हो सकती है।
सिविल एविएशन से रेवेन्यू बढ़ाने की बड़ी योजना
फिलहाल HAL की कुल कमाई में सिविल एविएशन का हिस्सा करीब 5 प्रतिशत है। कंपनी का लक्ष्य है कि आने वाले वर्षों में इसे बढ़ाकर 25 प्रतिशत तक पहुंचाया जाए। डी.के. सुनील ने SJ-100 को इस बदलाव का "मील का पत्थर" बताया।
नासिक और कानपुर प्लांट होंगे सिविल विमानन के लिए तैयार
इस प्रोजेक्ट के लिए HAL अपनी मौजूदा एयरोस्पेस सुविधाओं का इस्तेमाल करेगा। नासिक, जहां फिलहाल फाइटर जेट्स बनाए जाते हैं, और कानपुर, जो स्ट्रक्चर और कंपोनेंट्स में एक्सपर्ट है, दोनों को सिविल एयरक्राफ्ट प्रोडक्शन के लिए तैयार किया जाएगा।
पहले से तैयार
सुनील ने साफ कहा- "हमारी सुविधाएं पहले से ही एयरोस्पेस-रेडी हैं। थोड़े री-टूलिंग और सर्टिफिकेशन के बाद इन्हें नागरिक विमान उत्पादन के लिए आसानी से इस्तेमाल किया जा सकता है।"
इस खबर पर आपकी क्या राय है, हमें कमेंट में बताएं।












Click it and Unblock the Notifications