ग्रीनलैंड में अत्यधिक बर्फ पिघलने से पृथ्वी पर भीषण बाढ़ का खतरा, पूरी दुनिया में अलर्ट जारी

ग्रीनलैंड में 3.5 ट्रिलियन टन बर्फ पिघलने के बाद पूरी दुनिया में भीषण बाढ़ का खतरा, वैज्ञानिकों ने चेतावनी जारी की।

नई दिल्ली, नवंबर 02: ग्रीनलैंड में भारी मात्रा में बर्फ पिघलने की वजह से पूरी दुनिया में भीषण बाढ़ आने का अलार्म जारी किया गया है और कहा गया है कि दुनिया के ज्यादातर हिस्सों में भारी बाढ़ आ सकती है, जिससे जान-माल का भारी नुकसान हो सकता है। लीड्स वैज्ञानिकों ने ग्रीनलैंड में बर्फ अत्यधिक मात्रा में बर्फ पिघलने के बाद चेतावनी जारी की है और फौरन सुरक्षा के उपाय अपनाने को दुनियाभर की सरकारों से कहा है।

अत्यधिक मात्रा में पिघली बर्फ

अत्यधिक मात्रा में पिघली बर्फ

ग्रीनलैंड की बर्फ की चादरों का पिघलना 'दुनिया भर में बाढ़ के जोखिम को बढ़ा रहा है', लीड्स यूनिवर्सिटी की रिपोर्ट के अनुसार पिछले 10 सालों में ग्रीनलैंड से करीब 3.5 ट्रिलियन टन से ज्यादा बर्फ पिघले गये हैं, जिसकी वजह से दुनिया भर में बड़े पैमाने बाढ़ आने की आशंका है। वैज्ञानिकों ने कहा है कि, पूरी दुनिया में पर बर्फ की चादरों को लेकर सैटेलाइट डेटा के आधार पर ये रिसर्च किया गया है, जिसमें पाया गया है कि, ग्रीनलैंड में अत्यधिक मात्रा में बर्फ पिघलने की वजह से समुद्र तल में एक सेंटीमीटर का इजाफा हुआ है, जो दुनिया के लिए खतरनाक है।

रिकॉर्ड तोड़ गर्मी से पिघली बर्फ

रिकॉर्ड तोड़ गर्मी से पिघली बर्फ

लीड्स वैज्ञानिकों ने रिसर्च के आधार पर कहा है कि, 2012 से लेकर 2019 के बीच विश्व में प्रदूषण बढ़ने की वजह से भीषण गर्मी पड़ी है और पिछले 40 सालों में इतनी गर्मी नहीं पड़ी थी, जिसकी वजह से ग्रीनलैंड में रिकॉर्ड तोड़ मात्रा में बर्फ का पिघलना शुरू हो गया और अभी भी बर्फ लगातार पिघलती जा रही है, जिससे समुद्र में पानी की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है। रिपोर्ट में कहा गया है कि, इस साल जो गर्मी पड़ी है, उस दौरान भी गर्म हवा ने बर्फ की चादर के ज्यादातर हिस्से पर प्रतिकूल प्रभाव जाला और बर्फ और ग्लेशियर के बीच के स्थान को खोखला करना शुरू कर दिया, जिससे बर्फ की सतह के पिघलने की दर में काफी ज्यादा वृद्धि दर्ज की गई है।

हीटवेव का गंभीर असर

हीटवेव का गंभीर असर

लीड्स के वैज्ञानिकों ने सैटेलाइट तस्वीरों के आधार पर ग्रीनलैंड का जब अध्ययन किया, तो उन्होंने ग्रीनलैंड में बर्फ पिघलने की स्थिति में नाटकीय परिवर्तन को देखा है। सैटेलाइट तस्वीरों से पता चला है कि, ग्रीनलैंड के चारों तरफ हीटवेव की काफी ज्यादा मौजूद होती जा रही है, जिससे ग्रीनलैंड में मौजूद बर्फ की बड़ी-बड़ी चट्टाने पिघल गई हैं और सैकड़ों चट्टाने पूरी तरह से टूट चुके हैं और लगातार पिघल रहे हैं। वैज्ञानिकों ने अनुमान लगाया है कि ग्रीनलैंड की बर्फ की चादर के पिघलने से पिछले कुछ दशकों में वैश्विक समुद्र स्तर में लगभग 25 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।

20 फीट बढ़ सकता है समुद्री लेवल

20 फीट बढ़ सकता है समुद्री लेवल

वैज्ञानिकों ने कहा है कि, अगर ग्रीनलैंड की सारी बर्फ पिघल जाए, तो वैश्विक समुद्र का स्तर और 20 फीट बढ़ जाएगा और ये दुनिया खत्म हो जाएगी। हालांकि, वैज्ञानिकों ने कहा है कि, ग्रीनलैंड की सारी बर्फ इतनी जल्दी नहीं पिघलने वाली है, लेकिन जितनी बर्फ पिघल चुकी है, वो लाखों लोगों की जिंदगी के लिए खतरा है।

जलवायु गर्म होने का नुकसान

जलवायु गर्म होने का नुकसान

यूनिवर्सिटी ऑफ लीड्स सेंटर फॉर पोलर ऑब्जर्वेशन एंड मॉडलिंग और प्रमुख लेखक थॉमस स्लेटर ने समाचार एजेंसी एएफपी को बताया कि, 'जैसा कि हमने दुनिया के अन्य हिस्सों के साथ देखा है, ग्रीनलैंड भी चरम मौसम की घटनाओं में वृद्धि की चपेट में आ गया है।'' उन्होंने कहा कि, ''जैसे ही हमारी जलवायु गर्म होती है, ग्रीनलैंड में अत्यधिक मात्रा में बर्फ पिघलने की घटनाएं ज्यादा से ज्यादा बार होंगी।'

रिपोर्ट से दुनिया में खलबली

रिपोर्ट से दुनिया में खलबली

आपको बता दें कि, स्लेटर और उनके सहयोगियों ने जनवरी 2011 से अक्टूबर 2020 तक बर्फ पिघलने के माप को इकट्ठा करने के लिए क्रायोसैट-2 उपग्रह का इस्तेमाल किया है, ताकि ग्रीनलैंड आइस शीट में सतह की ऊंचाई में बदलाव की गणना भी की जा सके। इस रिसर्च को प्रसिद्ध विज्ञान पत्रिका 'नेचर रिसर्च' में प्रकाशित किया गया है, जिसने पूरी दुनिया में खलबली मचाकर रख दी है।

527 अरब टन बर्फ पिघली

527 अरब टन बर्फ पिघली

वैज्ञानिकों ने बर्फ पिघलने की मात्रा का पता लगाने के लिए एयर लेजर अल्टीमेट्री का इस्तेमाल किया है और शोधकर्ताओं ने कहा है कि, गर्म लहरों की वजह से बर्फ की जड़े लगातार कमजोर होती हैं और फिर बर्फ की बड़ी बड़ी शिलाएं टूट जाती हैं। शोधकर्ताओं ने कहा कि, 2012 के बाद से गर्म हवाओं का प्रभाव सबसे ज्यादा दर्ज किया जा रहा है, जिसकी वजह से 2012 से 2019 के बीच 527 अरब टन बर्फ ग्रीनलैंड से पिघल चुकी है। इस रिसर्च के को-राइटर एम्बर लीसन, जो ब्रिटेन के लैंकेस्टर यूनिवर्सिटी में इनवायरोमेंट डेटा साइंस के प्रोफेसर हैं, उन्होंने कहा कि, 'मॉडल अनुमान बताते हैं कि साल 2100 तक ग्रीनलैंड में बर्फ की चादर 3 सेंटीमीटर से 23 सेंटीमीटर के बीच पिघल जाएगी''।

ग्रीनलैंड को समझिए

ग्रीनलैंड को समझिए

आपको बता दें कि, ग्रीनलैंड की बर्फ की चादर पृथ्वी पर मीठे पानी की बर्फ का दूसरा सबसे बड़ा भंडार है, जो करीब 6 लाख 95 हजार वर्ग मील में फैला हुआ है। पृथ्वी पर मीठे पानी का सबसे बड़ा बर्फ का भंडार अंटार्कटिका है। ग्रीनलैंड में बर्फ की चादरों का पिघलना साल 1990 में शुरू हुआ था और साल 2000 के बाद से बर्फ पिघलने की घटना में काफी तेजी आग ई है। पोलर पोर्टल के शोधकर्ताओं का कहना है कि, साल 2000 की तुलना में इसका प्रभाव चार गुना तक बढ़ चुका है, जो काफी खतरनाक है। रिसर्चर्स के मुताबिक, ग्रीनलैंड में बर्फ का पिघलना आमतौर पर जून में शुरू होता है और अगस्त तक यहां का बर्फ पिधलता रहता है, लेकिन डेटा से पता चलता है कि जून के बाद से द्वीप ने 100 अरब टन से अधिक बर्फ खो दी है।

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