ग्रीन पीपीई: कोविड-19 प्लास्टिक कचरे के पहाड़ से ऐसे निपटना होगा
नई दिल्ली, 27 जुलाई। मेक्सिको में एक युवा उद्यमी ने दोबारा इस्तेमाल में आने वाले पीपीई (व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरण) की ऐसी श्रृंखला का आविष्कार किया है जो कचरे के ढेर में नहीं जाएगा. उसे उम्मीद है कि सिर्फ एक बार इस्तेमाल होने वाला हजारों टन मेडिकल कचरे को पानी और वेस्ट ट्रीटमेंट प्लांट में जाने से रोकने में यह तकनीक मदद करेगी.

तमारा चायो का कहना है कि डिस्पोजेबल पीपीई न केवल कारण पर्यावरणीय के लिए नुकसानदेह है बल्कि कोरोना का वायरस प्लास्टिक पर तीन दिन तक जीवित रहता है. खासकर ऐसे देशों में एक विशेष चिंता है जहां चिकित्सा अपशिष्ट प्रबंधन खराब है.
थॉमसन रॉयटर्स फाउंडेशन से चायो कहती हैं, "मेरे परिवार में ज्यादातर डॉक्टर और नर्स हैं. वे सोचते हैं, ठीक है हम इंसानों को बचा रहे हैं लेकिन हम धरती को नहीं बचा पा रहे हैं."
चायो कहती हैं, "और अगर सब कुछ फेंक दिया जाता है तो यह और अधिक बीमारी पैदा करेगा. इसलिए यह कभी न खत्म होने वाला चक्र बन जाता है."
एक पीपीई किट का 50 बार इस्तेमाल
21 वर्षीय केमिकल इंजीनियरिंग की छात्रा चायो ने 2020 के मध्य में एमईडीयू प्रोटेक्शन की सह-स्थापना की थी. उन्होंने कोविड-19 रोगियों का इलाज करने वाले स्वास्थ्य पेशेवरों की सुरक्षा के लिए सूट ऐसे समय में तैयार किया जब पीपीई की आपूर्ति कम थी.
पीपीई सूट कोटिंग के समान कपड़े से बने होते हैं जो वायरल अनुसंधान प्रयोगशालाओं में सतहों पर उपयोग किया जाता है. चायो का कहना है कि एक डॉक्टर एक दिन में चार डिस्पोजेबल गाउन का उपयोग कर सकता है जबकि उनका पीपीई पूरे दिन पहना जा सकता है.
उसे सुरक्षात्मक गुणों को खोए बिना 50 बार तक धोया जा सकता है. इसका मतलब हर परिधान 200 प्लास्टिक आइटम को लैंडफिल और वेस्ट ट्रीटमेंट प्लांट में जाने से रोकता है.
चायो कहती हैं, "मैं वास्तव में इसके बारे में उत्साहित हूं." चायो के परिवार के कई सदस्य कोरोना महामारी में अग्रिम पंक्ति में काम कर रहे हैं.
पर्यावरण की चिंता भी जरूरी
एमईडीयू के वस्त्र क्यूआर तकनीक से जुड़े हैं जो स्मार्ट फोन ऐप के माध्यम से स्वास्थ्य कर्मियों को बताता है कि पीपीई को कितनी बार धोया गया है.
50 बार पहनने के बाद पीपीई को एमईडीयू को वापस कर दिया जाता है, जो उसे कीटाणुरहित बनाता है और उसके बाद उसे इसे सूती स्क्रब और अपने उत्पाद को पैकेजिंग के लिए परिवर्तित करता है.
पर्यावरण विज्ञान और प्रौद्योगिकी पत्रिका के मुताबिक महामारी के दौरान करीब 129 अरब डिस्पोजेबल मास्क जो ज्यादातर प्लास्टिक माइक्रोफाइबर से बने होते हैं और 65 अरब डिस्पोजेबल दस्ताने का इस्तेमाल हर महीने किया जाता है.
संयुक्त राष्ट्र का अनुमान है कि महामारी के दौरान लगभग 75% प्लास्टिक जो चिकित्सा अपशिष्ट और लॉकडाउन के दौरान पैकेजिंग के लिए इस्तेमाल किए गए वह लैंडफिल साइट या फिर समुद्र में पहुंच जाएंगे.
एए/सीके (थॉमसन रॉयटर्स फाउंडेशन)
Source: DW












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