अबू धाबी के बाद अब बहरीन में भी बन रहा भव्य मंदिर, जमीन का काम पूरा, मुस्लिम देशों में पीएम मोदी का जलवा
अयोध्या में बने राममंदिर प्राण दुनियाभर में इस समय अबूधाबी में बने भव्य मंदिर की चर्चा हो रही है। पीएम मोदी बुधवार शाम को UAE के इस हिंदू मंदिर का उद्घाटन करेंगे। 27 एकड़ में फैले पहले इस हिंदू मंदिर में सुबह से ही प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम जारी है। इस मंदिर को बोचासनवासी श्री अक्षर पुरुषोत्तम स्वामीनारायण संस्था यानी BAPS ने बनाया है। इसकी लागत 700 करोड़ रुपए आई है।
आपको बता दें कि UAE के बाद एक और खाड़ी देश बहरीन में मंदिर बनने जा रहा है। ये मंदिर भी अबू धाबी के मंदिर की तरह विशाल होगा और इसे भी बोचासनवासी अक्षर पुरुषोत्तम स्वामीनारायण संस्था यानी बीएपीएस भी बनाने जा रहा है।

1 फरवरी 2022 को, भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दुनिया के सामने घोषणा की थी कि बहरीन साम्राज्य के क्राउन प्रिंस और प्रधानमंत्री, प्रिंस सलमान बिन हमद अल खलीफा ने बहरीन में स्वामीनारायण हिंदू मंदिर बनाने के लिए जमीन आवंटित की है। अब खबर आई है कि इस मंदिर के निर्माण शुरू करने की सारी औपचारिकताएं भी पूरी कर ली गई हैं।
बीएपीएस ने बताया है कि मंदिर का उद्देश्य सभी धर्मों के लोगों का स्वागत करना, विभिन्न सांस्कृतिक और आध्यात्मिक गतिविधियों के लिए स्थान प्रदान करना है। बीएपीएस गुरु महंत स्वामी महाराज ने बहरीन में मंदिर की जमीन के लिए भारत के प्रधानमंत्री और बहरीन के क्राउन प्रिंस को धन्यवाद देते हुए कहा है कि ये दोनों देशों के बीच घनिष्ठ संबंधों और धार्मिक सद्भाव के शाश्वत विश्वास को रेखांकित करता है।
उन्होंने कहा कि वह मंदिर के शीघ्र पूरा होने और इसके निर्माण के माध्यम से लाखों लोगों को शांति मिल सके, इसके लिए अपनी सच्ची प्रार्थना करता हूं। पश्चिम एशिया में बीएपीएस का कामकाज देखने वाले स्वामी ब्रह्मविहरिदास ने कहा, मैं उस समय का गवाह था जब दिवंगत अमीर शेख ईसा बिन सलमान अल खलीफा ने 1997 में बहरीन के रॉयल पैलेस में परम पावन प्रमुख स्वामी महाराज का स्वागत किया था।
20 साल बाद, 19 अक्टूबर 2017 को क्राउन प्रिंस सलमान बिन हमद अल खलीफा बीएपीएस के दिवाली समारोह में शामिल हुए और उन्होंने परम पावन प्रमुख स्वामी महाराज और दिवंगत अमीर शेख ईसा बिन सलमान अल खलीफा की तस्वीर देखीं। इसके बाद बीते कुछ सालों में क्राउन प्रिंस ऑफ बहरीन और बीएपीएस प्रतिनिधियों के बीच कई ऐसी सद्भावना बैठकें हुईं, जिनमें एक हिंदू पूजा स्थल की आवश्यकता पर चर्चा हुई। इसके बाद एक मंदिर के निर्माण पर दोनों पक्षों ने हामी भरी और ये मंदिर का ये सपना अब जल्दी ही जमीन पर उतरने जा रहा है।












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