जर्मनी में सरकार की तख्तापलट की कोशिश, राजकुमार हुए गिरफ्तार, जानें कौन हैं प्रिंस हेनरिक?
जर्मनी में द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद लोकतंत्र को अपनाया गया, लेकिन देश में एक वर्ग ऐसा था, जो फिर से राजशाही की स्थापना की कोशिश में लगा हुआ था। ये वर्ग देश में 1871 से पहले वाली व्यवस्था को लागू करना चाहता था।

Germany Coup Plot: जर्मनी में सरकार को उखाड़ फेंकने की बड़ी साजिश नाकाम हो गई है और तख्तापलट की साजिश रचने वाले 25 लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जिसमें मुख्य आरोपी प्रिंस हेनरिक XIII को भी गिरफ्तार किया गया है और रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार को बंधक बनाकर खुद प्रिंस हेनरिक देश के राजा बनना चाह रहे थे, लेकिन उनकी साजिश पर पानी फिर गया है।

जर्मनी में तख्तापलट की कोशिश
जर्मन मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, जर्मनी की संसद पर धावा बोलने वाले और सांसदों को गिरफ्तार कर चांसलर को मारने और सरकार पर कब्जा करने की योजना बनाई गई थी। रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार को पलटने की साजिश में दक्षिणपंथी विचारधारा के प्रमुख राजकुमार हेनरिक XIII शामिल थे, जिन्हें देश का नया राजा बनाने की कोशिश थी। राजकुमार हेनरिक जर्मनी संसद के एक पूर्व दक्षिणपंथी सांसद सदस्य रह चुके हैं और तख्तापलट की कोशिश करने वाले लोगों की योजना राष्ट्रीय शुद्धिकरण की थी और वो राजकुमार हेनरिक को देश का नया राजा बनाना चाह रहे थे। रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार को उखाड़ फेंकने की कोशिश बहुत बड़े स्तर पर रची गई थी और इसके लिए देश के बिजली नेटवर्क को तोड़ दिया गया था और कम्युनिकेशन स्थापित करने के लिए सैटेलाइट फोन खरीदे गये थे। (तस्वीर- जर्मनी के चांसलर ओलाफ स्कोल्ज)

कैसे रची गई तख्तापलट साजिश?
जर्मन प्रॉसीक्यूटर्स और इंटेलिजेंस अधिकारियों के मुताबिक, राज्यव्यापी धूर-दक्षिणपंथी आतंकी नेटवर्क ने देश की सत्ता के खिलाफ साजिश रची थी और उन्होंने देशभर में अपना नेटवर्क खड़ा कर लिया है। लेकिन, देश की खुफिया एजेंसियों को इसकी भनक लग गई और पूरे जर्मनी में 150 जगहों पर छापेमारी की गई और 25 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। गिरफ्तार किये गये लोगों में पूर्व सैन्य अधिकारी, पुलिस अधिकारी और कम से कम सेना के रिजर्व फोर्स के भी दो अधिकारी शामिल थे। रिपोर्ट के मुताबिक, जांच करे दौरान पता चला है, कि तख्तापलट को कामयाब बनाने के लिए कम से के जर्मनी के 18 राजनेताओं को रास्ते से हटाना था, जिनमें जर्मनी के चांसलर ओलाफ स्कोल्ज़ भी शामिल थे। न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, आरोपियों ने इन सभी नेताओं को रास्ते से हटाकर पूरे जर्मनी के प्रशासन को अपने हाथों में लेने की साजिश रची थी। वहीं, जर्मनी के कानून मंत्री ने इस घटना को आतंकी घटना करार दिया था है और सरकार के ऑपरेशन को उन्होंने आतंकवाद के खिलाफ बड़ा अभियान कहा है।

संविधान को कर दिया था अस्वीकार
जर्मन अधकारियों का कहना है, कि तख्तापलट की जमीन काफी पहले से तैयार की जा रही थी और चरमपंथी संगठन तख्तापलट के लिए सही मौके की तलाश कर रहा था। कानून मंत्री ने बताया कि, चरमपंथियों ने तख्तापलट के दिन को 'DAY-X' नाम दिया था। वहीं, जर्मन संसद में खुफिया निरीक्षण समिति के एक सांसद और सदस्य कॉन्स्टेंटिन वॉन नॉटज़ ने कहा कि "ये योजना काफी पहले से बनाई जाने का अनुमान है और डे-एक्स के लिए योजना काफी मजबूती से करने की योजना थी।" उन्होंने कहा कि, "मामलों की संख्या बढ़ रही है, सेकिन सवाल ये है, कि आकिर वो किस हद तक फैले हुए हैं और उनके तार किस हद तक अंदर गये हुए हैं।" इस चरमपंथी संगठन में वो लोग शामिल हैं, जिन्होंने द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद बने नये जर्मनी में संविधान के अस्तित्व को मानने से इनकार कर दिया था और उन्होंने सरकार को सत्ता से हटाने की अपील की थी।

क्या संभव था तख्तापलट की कोशिश?
जर्मनी में द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद से संवैधानिक संस्थाएं काफी मजबूत हुई हैं और देश में हर पांच साल के सरकार के कार्यकाल के बाद सफलतापूर्वक चुनाव हुए हैं, जिसमें मतदान प्रतिशत काफी अच्चा रहा है। लिहाजा, लोकतंत्र के प्रति जनता का भारी समर्थन रहा है, लिहाजा इस बात की आशंका काफी कम थी, कि तख्तापलट की कोशिश कामयाब हो जाती और ये साफ नहीं है, कि संसद पर हमला करने की ये योजना कितनी ताकतवर थी? क्योंकि कई विशेषज्ञों का मानना है, कि इस ऑपरेशन को इतना खराब मानने भूल नहीं की जानी चाहिए, क्योंकि अभी दर्जनों ऐसे लोग हो सकते हैं, जो पर्दे के पीछे हों और अपनी बारी का इंतजार कर रहे हों। खुफिया अधिकारियों के मुताबिक, इस ऑपरेशन में कई लोग शामिल हो सकते हैं, जिनके पास भारी संख्या में हथियार हो सकते हैं।

कौन हैं राजकुमार हेनरिक तृतीय
जर्मनी के करीब 3 हजार फोर्स ने एक साथ छापेमारी की है और थुरिंगिया राज्य के घरेलू खुफिया विभाग के प्रमुख स्टीफ़न क्रेमर ने कहा कि, 'ये एक बड़ी योजना से पर्दा हटाता है।' उन्होंने कहा कि, 'जहां- जहां छापेमारी की गई है और जैसे हालात दिखे हैं, उससे पता चलता है कि, सरकार को उखाड़ फेंकने की अपनी साजिश में वो मौत को स्वीकार करने तक के लिए तैयार थे।' रिपोर्ट के मुताबिक, चरमपंथियों की साजिश राजकुमार हेनरिक XIII को देश का नया राजा बनाने की थी, जो जर्मनी के एक प्राचीन रईस परिवार से ताल्लुक रखते हैं। राजकुमार हेनरिक तृतीय की कोशिश जर्मन संसद को अपने कब्जे में लेने की थी और फिर जर्मनी में एक ऐसे सत्ता की नींव रखनी थी, जो 1871 से पहले की थी।

प्रिंस हेनरिक के पुर्वजों ने किया है राज
जर्मनी में लोकतंत्र समर्थक अधिकारियों ने हाल के वर्षों तक राजतंत्र समर्थकों के जड़ को उखाड़ने की कोशिश की है और बुधवार को जिन जगहों पर छापा मारा गया उनमें से एक सेना की बैरक भी थी। वहीं, तख्तापलट की साजिश का सबसे महत्वपूर्ण कड़ी रहे प्रिंस हेनरिक को भी गिरफ्तार कर लिया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, प्रिंस हेनरिक XIII के पुर्वज जर्मनी पर राज कर चुके हैं और राजशाही खानदान से आने की वजह से प्रिंस हेनरिक अभी भी राजतंत्र के समर्थक हैं, जो लोकतंत्र के प्रमुख विरोधी माने जाते हैं। 71 साल के प्रिंस हेनरिक पिछले कई सालों से इस थ्योरी के साथ आग बढ़ रहे हैं, कि लोकतंत्र के मुकाबले राजतंत्र हमेशा से एक मजबूत विकल्प रहा है और राजतंत्र में ही लोगों का सच्चा विकास हो सकता है।
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