Gold Silver Price: अभी और महंगा होगा सोना-चांदी! सिर्फ चीन से नहीं है कारण, जानें कौन मांग रहा 5000 टन सोना?
Gold Silver Price: हाल ही में सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट आई थी, लेकिन उसके तुरंत बाद तेज उछाल भी देखने को मिला। हालांकि बीते कारोबारी दिन मंगलवार को दोनों की कीमतें फिर फिसल गईं। इस तरह के लगातार उतार-चढ़ाव ने निवेशकों को कन्फ्यूज कर दिया है कि आखिर आगे दाम बढ़ेंगे या फिर और गिरावट आएगी। इसी बीच एक नई रिपोर्ट सामने आई है, जिसमें खासकर सोने की कीमतों को लेकर आने वाले समय का अनुमान दिया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, सोना आगे भी मजबूत रह सकता है और इसकी तेजी के पीछे चीन का एक बड़ा आर्थिक फैक्टर भी जुड़ा हुआ है।
रिकॉर्ड स्तर तक पहुंचा सोना
मार्केट में सोने को लेकर सेंटिमेंट अब भी पॉजिटिव बना हुआ है। पिछले साल जो तेजी शुरू हुई थी, वह जनवरी 2026 के आखिर तक जारी रही। 29 जनवरी को एमसीएक्स (MCX) पर सोना ₹1,93,096 प्रति 10 ग्राम के रिकॉर्ड हाई स्तर पर पहुंच गया था। वहीं इंटरनेशनल मार्केट में भी सोने की कीमत पहली बार $5,000 प्रति औंस के पार चली गई थी। साल की शुरुआत में आई इस जबरदस्त तेजी के बाद कीमतों में गिरावट जरूर आई, लेकिन एक्सपर्ट्स का मानना है कि सोने को अभी भी मजबूत स्थिति में है।

जनवरी में भारी उतार-चढ़ाव
जियोजित इन्वेस्टमेंट्स की 10 फरवरी को जारी गोल्ड रिपोर्ट के मुताबिक, जनवरी में बाजार में काफी वोलैटिलिटी देखने को मिली। इस अस्थिरता की वजह से सोने की करीब आधी बढ़त खत्म हो गई। इसके बावजूद, कीमतें $5,000 प्रति औंस के मनोवैज्ञानिक रूप से अहम स्तर के ऊपर टिकी रहीं। जनवरी में लंदन स्पॉट मार्केट में सोना $5,594 प्रति औंस के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया था। हालांकि महीने के अंत में भारी बिक्री भी दर्ज की गई।
रिपोर्ट में बताया गया कि कीमतों में गिरावट की एक बड़ी वजह भू-राजनीतिक तनाव में कमी रही। लेकिन इसके बावजूद LBMA और COMEX दोनों बाजारों में सोने की कीमतें $5,000 से ऊपर बनी हुई हैं। इतना ही नहीं, महीने के हिसाब से देखें तो 10% से ज्यादा की बढ़त दर्ज की गई है, जो मजबूत मांग का साफ संकेत देती है।
किसको चाहिए 5,000 टन सोना?
सोने के मजबूत आउटलुक की एक बड़ी वजह इसमें बढ़ता निवेश है। रिपोर्ट के मुताबिक, 2025 में सोने की कुल वैश्विक मांग पहली बार 5,000 टन से ज्यादा हो गई। इससे इसका कुल बाजार मूल्य $555 अरब तक पहुंच गया, जो पिछले साल के मुकाबले 45% ज्यादा है।
इस बढ़ोतरी में गोल्ड इन्वेस्टमेंट की बड़ी भूमिका रही। ग्लोबल गोल्ड एक्सचेंज-ट्रेडेड फंड (Gold ETF) में सोने की हिस्सेदारी 801 टन बढ़ी, जो अब तक की दूसरी सबसे मजबूत सालाना बढ़त है। इसके अलावा सोने की छड़ों और सिक्कों की मांग भी 12 साल के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई। यह दिखाता है कि लोग सुरक्षित निवेश के तौर पर सोने को ज्यादा पसंद कर रहे हैं। ऐसे में जब लोगों को गोल्ड ETF एक सेफ ऑप्शन दिख रहा है तो सोने की मांग उछल रही है।
2026 में भी जारी है निवेश की रफ्तार
गोल्ड इन्वेस्टमेंट की यह तेजी 2026 में भी जारी है। जनवरी महीने में गोल्ड ETF में $19 अरब का निवेश हुआ, जो अब तक का सबसे मजबूत मासिक निवेश है। इससे ग्लोबल ETF मैनेजमेंट के तहत कुल संपत्ति बढ़कर रिकॉर्ड $669 अरब हो गई।
साथ ही, वैश्विक सोने का कुल भंडार भी बढ़कर 4,145 टन के लाइफटाइम हाई लेवल पर पहुंच गया। यह इस बात का संकेत है कि निवेशक अब भी आर्थिक अनिश्चितता और वित्तीय संकटों से बचाव के लिए सोने पर भरोसा कर रहे हैं।
केंद्रीय बैंकों की खरीद और चीन की बड़ी भूमिका
सोने की कीमतों को सपोर्ट देने में दुनिया भर के केंद्रीय बैंकों की खरीदारी भी अहम भूमिका निभा रही है। 2025 में केंद्रीय बैंकों की शुद्ध खरीद 328 टन रही। हालांकि यह 2024 के मुकाबले थोड़ी कम है, लेकिन फिर भी यह मजबूत स्तर माना जा रहा है।
खास तौर पर चीन की भूमिका यहां महत्वपूर्ण है। पीपल्स बैंक ऑफ चाइना ने जनवरी में लगातार 15वें महीने सोने की खरीद जारी रखी। इससे सरकारी सेक्टर की मांग और मजबूत हुई है और सोने की कीमतों को बड़ा सहारा मिला है।
आगे क्या रह सकता है ट्रेंड?
रिपोर्ट का अनुमान है कि शॉर्ट टर्म में सोने की कीमतें सीमित दायरे में रह सकती हैं। लेकिन मिड और लॉन्ग टर्म में तेजी की संभावना बनी हुई है। अगर वैश्विक तनाव और कम होता है तो रफ्तार थोड़ी धीमी पड़ सकती है।
फिर भी, केंद्रीय बैंकों की लगातार खरीद और ETF में मजबूत निवेश सोने को सपोर्ट दे रहे हैं। एक्सपर्ट्स का मानना है कि मुनाफा कमाने का मौजूदा दौर खत्म होने के बाद कमोडिटी मार्केट का फोकस फिर से इन मजबूत फैक्टर्स पर आएगा, जिससे सोने की स्थिति और मजबूत हो सकती है।
निवेश से पहले सलाह जरूरी
ध्यान रहे, सोना-चांदी या गोल्ड-सिल्वर ETF में निवेश करने से पहले अपने वित्तीय सलाहकार या बाजार विशेषज्ञ से सलाह लेना बेहद जरूरी है। बाजार में उतार-चढ़ाव आम बात है, इसलिए समझदारी से निवेश करना ही बेहतर रणनीति है।
इस खबर पर आपकी क्या राय है, हमें कमेंट में बताएं।












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