गोलान हाइट्स: सीरिया के सबसे ‘उपजाऊ’ इलाके पर 55 वर्षों से है इजरायल का कब्जा, जानिए क्या है विवाद

गोलान हाइट्स भौगोलिक परिस्थितियों के चलते रणनीतिक और राजनीतिक रूप से अहम है। सीरिया ने हमेशा इस बात पर जोर दिया है कि वह शांति समझौते पर तब तक राजी नहीं होगा जब तक कि इजरायल पूरे गोलान से पीछे नहीं हट जाता।

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रविवार को सीरिया से गोलान हाइट्स, जिसे गोलान पहाड़ियां भी कहा जाता है की ओर तीन रॉकेट दागे गए। इसके जवाब में इजरायल ने सीरिया पर जवाबी हमला किया। हालांकि इजरायली सेना ने रॉकट लॉन्च से जुड़ी अन्य जानकारियों को साझा नहीं किया है। लेकिन इस घटना के बाद से एक बार फिर से गोलान हाइट्स चर्चा में आ गया है।

क्या है गोलान हाइट्स?
गोलान हाइट्स दक्षिणी-पश्चिमी सीरिया में स्थित एक पहाड़ी इलाका है। लेबनान और जॉर्डन की सीमा पर होने की वजह से ये इलाका राजनीतिक और रणनीतिक रूप से खासा अहम है। सीरिया की राजधानी दमिश्क गोलान से सिर्फ 60 किमी दूर है। इस इलाके की मॉनिटरिंग संयुक्त राष्ट्र की संस्था UNDOF द्वारा की जाती है।

गोलान हाइट्स के पूर्व में सीरिया और पश्चिम में इजरायल है। गोलान की चोटी से सीरिया के कई इलाके साफ नजर आते हैं, जिसका फायदा इजरायल को मिलता है। इजरायल के मुताबिक 1150 वर्ग किमी पर उसका कब्जा है जबकि सीरिया का मानना है कि इजरायल ने गोलान के 1500 वर्ग किमी पर कब्जा कर रखा है।

गोलान हाइट्स सीरिया से इजरायल की सुरक्षा के लिए ढाल का काम भी करता है। सबसे महत्वपूर्ण ये कि गोलान इस मध्य पूर्व के सूखे इलाके में पानी का बड़ा अहम स्रोत है। ऐसे में यहां होने वाली बारिश का पानी इजरायल की बड़ी आबादी की जरूरत को पूरा करता है।

पानी की पर्याप्त मौजूदगी होने की वजह से गोलान में फसलों की पैदावार भी बाकी इलाकों की तुलना में अधिक होती है। ज्वालामुखी से निकली उपजाऊ राख की वजह से गोलान की जमीन इस इलाके में सबसे अधिक उपजाऊ मानी जाती है। यहां अंगूर और मेवों की खेती होती है। गोलान इजरायल का इकलौता स्की रिसोर्ट भी है।

1967 तक गोलान हाइट्स पर सीरिया का अधिकार हुआ करता था लेकिन सीरिया के साथ छह दिन के युद्ध के बाद इस पर कब्जा कर लिया था। सीरिया ने 1973 में हुए मध्य पूर्व युद्ध के दौरान गोलान हाइट्स को दोबारा हासिल करने की कोशिश की लेकिन सफल नहीं हो पाए।

साल 1981 में इजरायल ने तो गोलन हाइट्स पर एकतरफा कब्जा कर लिया, लेकिन इजरायल के इस कदम को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता नहीं दी गई। हालांकि ट्रम्प के दौर में अमेरिका ने 25 मार्च 2019 को गोलान पहाड़ी पर इजराइल की सम्‍प्रभुता को मान्‍यता दे दी थी।

इससे खुश होकर इजरायल ने विवादित गोलन हाइट्स में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के नाम पर एक नई बस्ती का नाम रखा। इस बस्ती का उद्घाटन खुद बेंजामिन नेतन्याहू ने किया था। डोनाल्ड ट्रम्प ने इसके लिए इजरायली पीएम का शुक्रिया भी अदा किया था।

समय-समय पर इस इलाके को लेकर दोनों देशों के बीच विवाद सिर उठाता रहता है। गोलान हाइट्स पर यहूदियों की 30 से ज्यादा बस्तियां हैं, जिनमें लगभग 20 हजार लोग रहते हैं। इलाके में 20 हजार सीरियाई लोग भी रहते हैं। कई रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि इजरायल यहां यहूदी लोगों को बसाकर डेमोग्राफिक चेंज कर रहा है।

सीरिया किसी भी शांति समझौते के तहत गोलन हाइट्स की वापसी सुरक्षित करना चाहता है। करीब ढ़ाई दशक पहले इजरायल के पीएम एहुद बराक ने सीरिया को गोलान का ज्यादातर हिस्सा लौटाने की पेशकश की थी, लेकिन सीरिया ने पूरा गोलान इलाका लेने की मांग करते हुए इजरायल का प्रस्ताव ठुकरा दिया था।

सीरिया 1967 से पहले की सीमा पर पूरी तरह से इजरायल की वापसी चाहता है। साल 2009 में बेंजामिन नेतन्याहू का दौर आया और उसके बाद से कभी भी शांति प्रस्ताव को लेकर इजरायल की तरफ से चर्चा तक नहीं हुई। बीच-बीच में अक्सर सीरिया की तरफ से गोलान में बरसाईं जाती हैं जिसका इजरायल जवाब देता रहता है।

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इस बीच दिसंबर 2022 में संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) ने कहा कि गोलान हाइट्स पर इजरायल का अधिकार नहीं है और उसे यहां कब्जा छोड़ना चाहिए। UNGA ने कहा कि इजरायल ने 1981 के सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 497 का पालन नहीं किया है।

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