कौन हैं गीता गोपीनाथ, जिन्हें बनाया गया है IMF का 'बॉस नंबर-2', भारत का बढ़ाया सम्मान
गीता गोपीनाथ पहली महिला हैं, जो आईएमएफ की चीफ इकोनॉमिस्ट बनीं थीं और अब उन्हें आईएमएफ में नंबर-दो का पद दिया गया है, जो यकीनन भारत के लिए गर्व की बात है।
वॉशिंगटन, दिसंबर 03: IMF की पहली महिला चीफ इकोनॉमिस्ट गीता गोपीनाथ ने एक बार फिर से भारत का मान पूरी दुनिया में बढ़ाया है और अब उन्हें अंतर्राष्ट्रीय मुद्गा कोष में नंबर-2 की जगह दी गई है। गीता गोपीनाथ को अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष का फर्स्ट डिप्टी मैनेजिंग डायरेक्टर घोषित किया गया है और वो जियोफ्रे ओकामोटो की जगह लेंगी।

पहली महिला अर्थशास्त्री
गीता गोपीनाथ का अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष का फर्स्ट डिप्टी मैनेजिंग डायरेक्टर बनना काफी आश्चर्यजनक है। क्योंकि, आईएमएफ के चीफ इकोनॉमिस्ट के रूप में काम करने वाली पहली महिला गोपीनाथ ने इसी साल अक्टूबर में कहा था कि, उन्होंने तीन साल की सार्वजनिक सेवा के बाद अपने कार्यकाल के बाद वो एक बार फिर से जनवरी में हार्वर्ड विश्वविद्यालय में फिर से शामिल होने की योजना बना रही हैं। लेकिन, आईएमएफ ने एक बयान में कहा कि, "आईएमएफ की वरिष्ठ प्रबंधन टीम की भूमिकाओं और जिम्मेदारियों में कुछ बदलाव किया जा रहा है।" अभी तक की परंपरा के मुताबिक, आईएमएफ की फर्स्ट डिप्टी मैनेजिंग डायरेक्टर को अमेरिका द्वारा नामित किया जाता है और उनके नाम पर आईएमएफ के मैनेजिंग डायरेक्टर मुहर लगाते हैं।

भारत का बढ़ाया मान
गीता गोपीनाथ पहली महिला हैं, जो आईएमएफ की चीफ इकोनॉमिस्ट बनीं थीं और अब उन्हें आईएमएफ में नंबर-दो का पद दिया गया है, जो यकीनन भारत के लिए गर्व की बात है। आईएमएफ ने अपने बयान में कहा है कि, ''फर्स्ट डिप्टी मैनेजिंग डायरेक्टर गीता गोपीनाथ आईएमएफ की निगरानी संबंधित नितियों की जिम्मेदारी का नेतृत्व करेंगी। इसके साथ ही आईएमएफ के उच्चतम गुणवत्ता वाले मानकों को बनाए रखने की भी जिम्मेदारी उनकी होगी। आईएमएफ ने अपने बयान में कहा है कि, पहले फर्स्ट डिप्टी मैनेजिंग डायरेक्टर ओकामोटो अगले साल की शुरूआत में अपने पद से हट जाएंगे। आईएमएफ ने बतौर चीफ इकोनॉमिस्ट गीता गोपीनाथ की भूमिका को काफी सराहा है और उनके योगदानों की पूरी दुनिया में चर्चा की गई है।
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कोरोना के दौरान निभाई बड़ी जिम्मेदारी
गीता गोपीनाथ ने कोरोना महामारी के दौर में, जब पूरी दुनिया पिछले साल लॉकडाउन से गुजर रही थी, उस वक्त उन्होंने आईएमएफ के अनुसंधान विभाग का नेतृत्व किया और दुनिया को आर्थिक मंदी से बाहर निकालने में बड़ी भूमिका निभाई। आईएमएफ ने गीता गोपीनाथ की भूमिका की चर्चा करते हुए कहा है कि, महामारी काल में गीता गोपीनाथ ने कोरोना महामारी को कैसे समाप्त किया जाए, और इसी आधार पर पूरी दुनिया में वैक्सीनेशन का लक्ष्य पूरा करने की दिशा में कैसे बढ़ा जाए, इसकी योजना बनाने में काफी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। उन्हीं की कार्ययोजना के आधार पर आईएमएफ, वर्ल्ड बैंक, डब्ल्यूटीओ और विश्व स्वास्थ्य संगठन मे एक साथ मिलकर मल्टी लेटरल टास्क फोर्स तैयार किया गया था, जिसका उद्येश्य वैक्सीन बनाने वाली कंपनियों के साथ मिलकर वैक्सीन निर्माण और वितरण में आने वाली रूकावटों को दूर करना था।

दिग्गज अर्थशास्त्री हैं गीता गोपीनाथ
गीता गोपीनाथ को विश्व में दिग्गज अर्थशास्त्री माना जाता है और उन्होंने अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर इंटरनेशनल फाइनेंस और मैक्रोइकोनॉमिक्स संबंधित रिसर्च के लिए भी जाना जाता है। गीता गोपीनाथ के कई रिसर्च इकोनॉमिक्स जर्नल्स में भी प्रकाशित हो चुकी हैं। साल 2019 में गीता गोपीनाथ को प्रवासी भारतीय सम्मान से सम्मानित किया गया था और वो साल 2019 से ही आईएमएफ में चीफ इकोनॉमिस्ट के तौर पर काम कर रही हैं।

भारत में हुआ है जन्म
गीता गोपीनाथ का आईएमएफ में नंबर-2 की कुर्सी पर पहुंचना भारत के लिए गर्व की बात है, क्योंकि उनका जन्मस्थान भारत ही है। गीता गोपीनाथ ने साल 1992 में दिल्ली के लेडी श्रीराम कॉलेज से इकोनॉमिक्स में ऑनर्स की डिग्री हासिल की थी और फिर उन्होंने दिल्ली स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स से अर्थशास्त्र में ही एमए की डिग्री हासिल की। साल 1994 में गीता गोपीनाथ अमेरिका चली गईं और उन्होंने वॉशिंगटन में स्थिति प्रिंसटन यूनिवर्सिटी से इकोनॉमिक्स से 1996-2001 में पीएचडी की डिग्री हासिल की।












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