जॉर्ज सोरोस का एंटी इंडिया एजेंडा.. बैंक ऑफ इंग्लैंड को किया तबाह, अब अडानी ग्रुप के पीछे हाथ धोकर पड़ा
George Soros Adani Row: आजादी मिलने के बाद से भारतीय लोकतंत्र ने जिस तरह से अपना विस्तार किया है और भारत ने जिस तरह से तरक्की की है, आज हम जिस तरह से स्पेस सेक्टर से लेकर अर्थव्यवस्था तक में और सॉफ्ट पावर से टेक्नोलॉजी सेक्टर में तरक्की कर रहे हैं, उससे पश्चिमी ताकतें जली भुनी रहती हैं और कुछ अरबपति ऐसे भी हैं, जो भारतीय लोकतंत्र को ही पटरी से उतारना चाहते हैं, ताकि वो भारत को एक नाकाम और नकारा देश साबित कर सके।
ऐसे ही एक कुख्यात शख्स का नाम है जॉर्ज सोरोस, जो अपने एंटी-इंडिया एजेंडे के लिए ना सिर्फ कुख्यात रहा है, बल्कि ये शख्स एंटी-इंडिया एजेंडा चलाने के लिए करोड़ों रुपये खर्च भी करता रहा है।

जॉर्ज सोरोस का एंटी-इंडिया एजेंडा समझिए
ऑर्गेनाइज्ड क्राइम एंड करप्शन रिपोर्टिंग (OCCRP) को फंड करने वाले हंगरी मूल के अमेरिकी कारोबारी और हेज फंड मैनेजर जॉर्ज सोरोस, गौतम अडानी और प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी, दोनों के खिलाफ हाथ धोकर पड़ गये हैं।
जॉर्ज सोरोस के इशारे पर काम करने वाली संस्था OCCRP ने इस साल जनवरी में हिंडनबर्ग रिपोर्ट के बाद, अब एक बार फिर से प्रधानमंत्री मोदी को अहमदाबाद स्थित व्यवसाई गौतम अडानी के करीबी सहयोगी के रूप में कनेक्ट किया है।
जबकि, इस साल की शुरूआत में अडानी विवाद पर बयान देते हुए जॉर्ज सोरोस ने कहा था, कि "नरेन्द्र मोद और अडानी करीबी सहयोगी हैं और उनका विश्वास आपस में जुड़ा हुआ है। अडानी एंटरप्राइजेज, शेयर बाजारों में धन जुटाने की कोशिश कर रहा है, लेकिन असफल रहा है। अडानी पर स्टॉक में हेरफेर का आरोप है, और उनके शेयर, ताश के पत्तों की तरह ढह गए है। मोदी इस विषय पर चुप हैं, लेकिन उन्हें विदेशी निवेशकों और संसद में सवालों का जवाब देना होगा।"
जॉर्ज सोरोस ने आगे कहा था, कि अडानी विवाद नरेन्द्र मोदी की देश की सत्ता से पकड़ को कमजोर कर देगी और भारत में "लोकतांत्रिक पुनरुत्थान" को जन्म देगी।

बैंक ऑफ इंग्लैंड को तोड़ चुके हैं जॉर्ज सोरोस
हंगरी में जन्मे 93 वर्षीय जॉर्ज सोरोस को 16 सितंबर 1992 को 'बैंक ऑफ इंग्लैंड' को तोड़ने वाला व्यक्ति' कहा जाता है, और इस घटना को 'ब्लैक बुधवार' भी कहा जाता है, जिससे ब्रिटिश सरकार को यूरोपीय एक्सचेंज रेट मैकेनिज्म से स्टर्लिंग को वापस लेने के लिए मजबूर होना पड़ा था।
जॉर्ज सोरोस ने बैंग ऑफ इंग्लैंड के खिलाफ भी कई अनर्गल आरोप लगाए थे और एक्सपर्ट्स का कहना था, कि ब्रिटिश सरकार की खुन्नस की वजह से जॉर्ज सोरोस ने बैंक ऑफ इंग्लैंड के खिलाफ अभियान छेड़ दिया था, जिसने बैंक ऑफ इंग्लैंड के डूबने में अहम भूमिका निभाई।
अमेरिका में प्रवास के बाद, सोरोस ने अपना खुद का हेज फंड 'सोरोस फंड मैनेजमेंट' लॉन्च किया। ब्लूमबर्ग बिलियनेयर इंडेक्स में उन्हें 7.16 अरब डॉलर की संपत्ति के साथ दुनिया के 329वें सबसे अमीर व्यक्ति के रूप में स्थान दिया गया है।
जॉर्ज सोरोस के गिरोह में सैकड़ों वामपंथी पत्रकार, कथित मानवाधिकार कार्यकर्ता हैं, जो अलग अलग देशों के नेताओं और अलग अलग देशों की लोकतांत्रित व्यवस्था के खिलाफ मुहिम चलाते रहते हैं। जॉर्ज सोरोस के निशाने पर भारत आज से नहीं, बल्कि सालों से रहा है।
गुरुवार को OCCRP रिपोर्ट के बाद, हिंडनबर्ग रिसर्च ने अपने आधिकारिक एक्स (ट्वीटर) हैंडल से ट्वीट किया, "आखिरकार, लूप बंद हो गया है। फाइनेंशियल टाइम्स और OCCRP की रिपोर्ट है, कि कई अडानी शेयरों में कम से कम 13% फ्री फ्लोट वाले ऑफशोर फंड को गुप्त रूप से नियंत्रित किया गया था। विनोद अडानी के सहयोगियों द्वारा, रिश्ते को छुपाया जा रहा है"।
OCCRP ने अपनी जांच के नतीजे दो विदेशी प्रकाशनों - द गार्जियन और फाइनेंशियल टाइम्स के साथ शेयर किए हैं, जहां रिपोर्ट में दावा किया गया, कि अडानी समूह में गुप्त रूप से निवेश करने वाले दो लोगों के, अदानी परिवार से करीबी संबंध हैं। रिपोर्ट में कई टैक्स हेवन्स की फाइलों, बैंक रिकॉर्ड और इंटरनल अदानी समूह के ईमेल का हवाला देते हुए आरोप लगाए गये हैं।
OCCRP की इस रिपोर्ट के बाद अडानी समूह के शेयर 5% तक गिर गए, क्योंकि जॉर्ज सोरोस समर्थित संगठित अपराध और भ्रष्टाचार रिपोर्टिंग प्रोजेक्ट (OCCRP) ने यह दावा करके समूह पर घात लगाने का प्रयास किया, कि अडानी समूह में गुप्त रूप से निवेश करने वाले दो लोगों के, अडानी परिवार से करीबी संबंध हैं।
अडानी पावर, अडानी एनर्जी सॉल्यूशंस और अडानी ग्रीन के शेयरों में 4-5% की गिरावट आई। अडानी समूह की दुधारू गाय यानि अदानी पोर्ट्स के शेयर्स में 3% की गिरावट आई, जबकि प्रमुख इकाई अडानी एंटरप्राइजेज में 3.5% की गिरावट आई।
अडानी समूह ने इस रिपोर्ट को खारिज कर दिया है और इसे OCCRP द्वारा अडानी परिवार के साझेदारों पर लगाए गए "पुनर्नवीनीकरण आरोप" बताया है। अडानी समूह ने इन समाचार रिपोर्टों के समय पर सवाल उठाया और उन्हें संदिग्ध, शरारती और दुर्भावनापूर्ण बताया।
अडानी ग्रुप की तरफ से जारी बयान में कहा गया है, कि "हम इन पुनर्चक्रित आरोपों को स्पष्ट रूप से खारिज करते हैं। ये रिपोर्टें सोरोस-वित्त पोषित संस्था द्वारा विदेशी मीडिया के एक वर्ग द्वारा समर्थित है, जो तथ्यहीन हिंडनबर्ग रिपोर्ट को फिर से फैलाने के लिए एक ठोस कोशिश प्रतीत होती है।"
अडानी ग्रुप ने आगे कहा, कि "यह प्रत्याशित था"। यानि, अडानी ग्रुप का कहना है, कि ऐसे आरोप लगाए जाते, ये पहले से ही निश्चित था।

इस रिपोर्ट के पीछे साजिश की बू क्यों?
हिंडनबर्ग की जो रिपोर्ट अडानी ग्रुप के खिलाफ आई थी, उनमें भी इन्हीं तरह के आरोप अडानी समूह के खिलाफ लगाए गये थे और अब OCCRP ने जो रिपोर्ट जारी की है, उसमें भी पुराने ही आरोप हैं, बस पैकेजिंग नई है।
वहीं, OCCRP की ये रिपोर्ट उस वक्त आई है, जब अडानी एंटरप्राइजेज के एफपीओ आने वाले हैं। साथ ही साथ, OCCRP रिपोर्ट और हिंडनबर्ग रिपोर्ट में लगाए गए आरोपों पर, सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई चल रही है।
यानि, मकसद साफ है, अडानी ग्रुप को तहस-नहस करना, क्योंकि अडानी ग्रुप के प्रमुख गौतम अडानी, पिछले साल दुनिया के तीसरे सबसे अमीर कारोबारी बन गये थे और एंटी-इंडिया एजेंडा चलाने वाले जॉर्ज सोरोस और इनके जैसे लोगों को ये बातें रास कैसे आतीं।
अडानी समूह ने आरोपों पर क्या कहा?
वहीं, अडानी ग्रुप की तरफ से कहा गया है, कि "हमें कानून की उचित प्रक्रिया पर पूरा भरोसा है और हम अपने खुलासों की गुणवत्ता और कॉर्पोरेट प्रशासन मानकों के प्रति आश्वस्त हैं। इन तथ्यों के प्रकाश में, इन समाचार रिपोर्टों का समय संदिग्ध, शरारती और दुर्भावनापूर्ण है - और हम इन रिपोर्टों को पूरी तरह से खारिज करते हैं।"
अडानी की तरफ से जारी बयान में कहा गया है, कि "ये दावे एक दशक पहले के बंद हो चुके मामलों पर आधारित हैं, जब राजस्व खुफिया निदेशालय (डीआरआई) ने ओवर-इनवॉइसिंग, विदेश में फंड ट्रांसफर, संबंधित पार्टी लेनदेन और एफपीआई के माध्यम से निवेश के आरोपों की जांच की थी।"
बयान में कहा गया है, कि "एक स्वतंत्र न्यायनिर्णयन प्राधिकारी और एक अपीलीय न्यायाधिकरण ने पुष्टि की थी, कि कोई अधिक मूल्यांकन नहीं था और जो भी लेनदेन थे, वो लागू कानून के अनुसार थे। मामला मार्च 2023 में खत्म हो गया, जब भारत के माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने हमारे पक्ष में फैसला सुनाया। लिहाजा, धन के ट्रंसफर पर इन आरोपों की कोई प्रासंगिकता या आधार नहीं है।"
अडानी समूह ने आगे कहा, "यह दुर्भाग्यपूर्ण है, कि इन प्रकाशनों ने, जिन्होंने हमें सवाल भेजे थे, हमारी प्रतिक्रिया को पूरी तरह से प्रकाशित नहीं करने का फैसला लिया। इन प्रयासों का मकसद, अन्य बातों के अलावा, हमारे स्टॉक की कीमतों को कम करके मुनाफा कमाना है और इन शॉर्ट शेलर्स के खिलाफ पहले से ही जांच चल रही है।"
अडानी ग्रुप ने आगे कहा, कि "सुप्रीम कोर्ट और सेबी, पहले से इन मामलों की निगरानी कर रहे हैं, इसीलिए चल रही कानूनी प्रक्रिया का सम्मान करना महत्वपूर्ण है।"
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