शेख हसीना के साथ PM मोदी की द्विपक्षीय वार्ता, जानिए बांग्लादेश के जरिए अमेरिका को क्या दिया संदेश?
India-Bangladesh G20 Summit: जी20 शिखर सम्मेलन के पहले दिन भारतीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना से द्विपक्षीय वार्ता कर अमेरिका को सीधा संदेश दिया है, कि भारत अमेरिका को बांग्लादेश की उस सरकार के साथ खड़ा है, जिसने कट्टरपंथियों को रोक कर रखा हुआ है।
अमेरिका लगातार बांग्लादेश की शेख हसीना सरकार पर निष्पक्ष चुनाव कराने की मांग के साथ प्रेशर बढ़ाने की कोशिश कर रहा है, लेकिन भारत, शेख हसीना सरकार का डायरेक्ट समर्थन कर रहा है। शेख हसीना और नरेन्द्र मोदी के बीच की ये मुलाकात इसलिए भी अहम है, क्योंकि बांग्लादेश में आगामी चुनावों को केंद्र में रखकर अमेरिका की मौजूदा भूमिका से भारत खुश नहीं है और इस मुलाकात से ये संदेश वाशिंगटन को भी दे दिया गया है।

बांग्लादेश पर भारत बनाम अमेरिका
पिछले महीने भारत ने अमेरिका को बताया था, कि वाशिंगटन की तरह भारत भी ढाका में निष्पक्ष और स्वतंत्र चुनाव चाहता है। लेकिन, अमेरिका की दखलअंदाजी भारत को पसंद नहीं है।
और अब शेख हसीना को जी20 शिखर सम्मेलन में ना सिर्फ आमंत्रित कर, बल्कि पीएम मोदी ने द्विपक्षीय वार्ता कर भारत ने ये भी संकेत दिया है, कि वो बांग्लादेश में अमेरिका को कोई गेम नहीं करने देगा।
जी20 शिखर सम्मेलन में अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन और बांग्लादेश की प्रधान मंत्री शेख हसीना नई दिल्ली में एक ही मंच साझा करेंगे। साउथ ब्लॉक (भारत के विदेश मंत्रालय की सीट) का मानना है, कि अगर बांग्लादेश में जमात-ए-इस्लामी को 'राजनीतिक रियायत' दी गई, तो निकट भविष्य में ढाका पर कट्टरवाद का कब्जा हो जाएगा।
नई दिल्ली को लगता है, कि अगर बांग्लादेश में हसीना की सरकार कमजोर हुई, तो ये न तो भारत के लिए अच्छा होगा और न ही अमेरिका के लिए। वहीं, एक्सपर्ट्स का कहना है, कि अमेरिका कट्टरपंथी संगठन जमात-ए-इस्लामी को क्यों समर्थन दे रहा है, ये समझ से परे है, क्योंकि बांग्लादेश के अंदर इस संगठन के ऊपर आतंकवाद के भी इल्जाम लगे हैं।
विदेश मंत्रालय को लगता है, कि काबुल के साथ-साथ भारत के अन्य पड़ोसियों के प्रति अमेरिका की नीति राष्ट्रीय हित के सवालों पर नई दिल्ली की परेशानी बढ़ा रही है और भारत हरगिज अपने एक और पड़ोस में किसी कट्टरपंथी ताकत को सत्ता के करीब आने देने के मूड में नहीं है।
कट्टरपंथी ताकतों को मदद देता अमेरिका
नई दिल्ली ने बाइडेन प्रशासन से कहा है, कि अगर जमात को संरक्षण दिया गया, तो भारत का सीमा पार आतंकवाद बढ़ सकता है और बांग्लादेश में चीन का प्रभाव बहुत बढ़ जाएगा, जो वाशिंगटन नहीं चाहता है।
माना जाता है, कि अमेरिका हमेशा जमात को इस्लामिक राजनीतिक संगठन दिखाने की कोशिश करता रहा है। अमेरिका ने जमात की तुलना मुस्लिम ब्रदरहुड से की है, लेकिन हकीकत में, रिपोर्ट में कहा गया है, नई दिल्ली को इसमें कोई संदेह नहीं है, कि जमात कट्टरपंथी कट्टरपंथी संगठनों और पाकिस्तान के हाथों में है।

बाइडेन प्रशासन ने केवल बांग्लादेश के लिए एक अलग वीजा नीति की घोषणा की है, जो शेख हसीना सरकार के लिए एक धमकी है, कि अगर उसने अमेरिका की बात नहीं मानी, तो बांग्लादेशी नेताओं का वीजा बैन किया जा सकता है।
भारत के राजनयिक खेमे का मानना है कि अमेरिकी प्रशासन ने अपने देश के कानूनों को लागू करके और उस देश के लिए एक अलग वीजा नीति अपनाकर बांग्लादेश की आंतरिक राजनीति में सीधे हस्तक्षेप किया है।
हाल ही में बांग्लादेश अवामी लीग के पांच सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने नई दिल्ली का दौरा किया और बीजेपी के शीर्ष नेतृत्व और केंद्र सरकार के मंत्रियों के साथ बैठकें कीं थी।
वहीं, उन्होंने यह भी संदेश दिया, कि पूर्व प्रधानमंत्री बेगम खालिदा जिया की राजनीतिक पार्टी बीएनपी और जमात का गठबंधन, क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखने के लिहाज से खतरनाक है।
प्रतिनिधिमंडल के नेता, बांग्लादेश के कृषि मंत्री अब्दुर रज्जाक ने भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर के साथ इस बाबत बैठक भी की है।
उस बैठक के ठीक बाद उन्होंने कहा था, "हमने भारत से कहा है, कि क्षेत्रीय स्थिरता दोनों देशों के लिए महत्वपूर्ण है। प्रधान मंत्री शेख हसीना के नेतृत्व वाली सरकार, बांग्लादेश की धरती का इस्तेमाल भारत विरोधी गतिविधियों के लिए नहीं करने देने के लिए प्रतिबद्ध है।"
वहीं, कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में कहा गया है, कि बांग्लादेश को लेकर भारत फिर से अमेरिका से बात करने वाला है और प्रधानमंत्री शेख हसीना से पीएम मोदी ने द्विपक्षीय बैठक कम से कम एक संकेत तो दे ही दिया है।












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