G20 Summit: अफ्रीकन यूनियन को शामिल कर भारत बन गया था ग्लोबल साउथ का नायक, ब्राजील G20 के एजेंडे में क्या है?
G20 Summit Brazil: नाइजीरिया की कामयाब यात्रा के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी-20 शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए ब्राजील के रियो डी जेनेरियो पहुंच गये हैं। प्रधानमंत्री की तीन देशों की यात्रा में यह दूसरा पड़ाव है।
पिछले साल नई दिल्ली में अंतर्राष्ट्रीय कार्यक्रम की मेजबानी करने के बाद प्रधानमंत्री मोदी त्रिगुट सदस्य के रूप में जी-20 शिखर सम्मेलन के 19वें संस्करण में भाग लेंगे। प्रधानमंत्री ने ट्विटर पर लिखा, "जी-20 शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए ब्राजील के रियो डी जेनेरियो पहुंचा। मैं शिखर सम्मेलन में विचार-विमर्श और विभिन्न विश्व नेताओं के साथ उपयोगी बातचीत की प्रतीक्षा कर रहा हूं।"

ये शिखर सम्मेलन 18 और 19 नवंबर को आयोजित होने वाला है।
ट्रोइका के सदस्य के रूप में, भारत से आगामी शिखर सम्मेलन के एजेंडे को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने की उम्मीद है, क्योंकि भारत ने ब्राजील को अध्यक्षता सौंप दी है। इस बीच, ब्राजील के राष्ट्रपति लूला दा सिल्वा की सरकार, ग्लोबल साउथ प्राथमिकताओं पर शिखर सम्मेलन का ध्यान केंद्रित रखने का लक्ष्य बना रही है। ब्राजील के बाद, दक्षिण अफ्रीका अंतरराष्ट्रीय शिखर सम्मेलन के अगले संस्करण की मेजबानी करेगा।
एजेंडे में क्या है?
ब्राजील पहुंचने से पहले अपने ट्वीट में प्रधानमंत्री ने कहा, कि पिछले वर्ष भारत की सफल अध्यक्षता ने जी-20 को "लोगों का जी-20" बना दिया है और ग्लोबल साउथ की आवाज को शामिल किया है। प्रधानमंत्री मोदी ने "एक पृथ्वी, एक परिवार, एक भविष्य" के दृष्टिकोण के मुताबिक सार्थक चर्चाओं की अपनी उम्मीद जताई है।
उन्होंने कहा, कि "इस वर्ष, ब्राजील ने भारत की विरासत को आगे बढ़ाया है। मैं "एक पृथ्वी, एक परिवार, एक भविष्य" के हमारे दृष्टिकोण के अनुरूप सार्थक चर्चाओं की आशा करता हूँ। मैं इस अवसर का उपयोग कई अन्य नेताओं के साथ द्विपक्षीय सहयोग को आगे बढ़ाने पर विचारों का आदान-प्रदान करने के लिए भी करूंगा।"
प्रधानमंत्री नाइजीरिया की अपनी राजकीय यात्रा समाप्त करने के कुछ घंटों बाद रियो डी जेनेरियो पहुंचे। हालांकि यह प्रधानमंत्री मोदी की अफ्रीकी राष्ट्र की पहली यात्रा थी, लेकिन वे 17 वर्षों में देश का दौरा करने वाले पहले भारतीय प्रधानमंत्री बन गए। नाइजीरिया की अपनी यात्रा के दौरान, प्रधानमंत्री मोदी ने देश के राष्ट्रपति बोला अहमद टीनूबू के साथ बातचीत की।
वहीं, अपनी यात्रा के तीसरे और अंतिम चरण में, प्रधानमंत्री मोदी, राष्ट्रपति मोहम्मद इरफ़ान अली के निमंत्रण पर 19 से 21 नवंबर तक गुयाना का दौरा करेंगे। यह 50 से ज्यादा वर्षों में किसी भारतीय प्रधानमंत्री की गुयाना की पहली यात्रा होगी।
आपको बता दें, कि 55 देशों के अफ्रीकी संघ को G20 के स्थायी सदस्य के रूप में शामिल करना और यूक्रेन संघर्ष पर गहरे मतभेदों को दूर करते हुए नेताओं की घोषणा तैयार करना, पिछले वर्ष भारत की G20 अध्यक्षता के प्रमुख मील के पत्थर के रूप में देखा गया।
जी20 क्या है? (What is G20)
1990 के दशक में जब पूरी दुनिया आर्थिक मंदी में फंस गई थी, उस वक्त जी20 का गठन करने की मांग दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्था वाले देशों के बीच उठी और साल 1999 में जी20 का गठन कर दिया गया, जिसकी पृष्टभूमि पूरी तरह से आने वाले वक्त में वैश्विक वित्तीय संकट में फंसने से बचने और अगर फंसे, तो जल्द निकलने के लिए प्लानिंग तैयार करना था।
आर्थिक संकट ने खासकर पूर्वी एशिया और दक्षिण पूर्व एशिया को ज्यादा प्रभावित किया था, लिहाजा, इसका मकसद मध्यम आय वाले देशों को शामिल करके वैश्विक वित्तीय स्थिरता को सुरक्षित बनाना तय किया गया।
फिलहाल G20 देशों में दुनिया की 60 प्रतिशत आबादी, वैश्विक जीडीपी का 80 प्रतिशत और वैश्विक व्यापार का 75 प्रतिशत शामिल है। इसके प्रमुख सदस्य हैं, ऑस्ट्रेलिया, ब्राजील, चीन, फ्रांस, जर्मनी, भारत, जापान, कोरिया गणराज्य, रूस, सऊदी अरब, दक्षिण अफ्रीका, तुर्की, यूके, अमेरिका और यूरोपीय संघ शामिल हैं। जी20 की अध्यक्षता हर साल अलग अलग देशों को मिलती रहती है और अध्यक्ष बनने वाला देश, पुराने अध्यक्ष और अगले अध्यक्ष के साथ मिलकर जी20 का एजेंडा तय तय करता है, ताकि उसकी निरंतरता बनी रहे, जिसे 'ट्रोइका' कहा जाता है और इस वक्त ब्राजील, भारत और दक्षिण अफ्रीका ट्रोइका देश हैं।
गठन के बाद से ही जी20 देशों की हर साल दो बड़ी बैठके होंती हैं। एक बैठक जी20 देशों के विदेश मंत्रियों की होती है और दूसरी बैठक में तमाम देशों के राष्ट्राध्यक्ष शामिल होते हैं।












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