Comfort Women: वर्ल्ड वॉर-2 की बर्बरता और हजारों दुष्कर्म का कब हिसाब देगा जापान? महिलाओं का अंतहीन संघर्ष
Comfort Women: आज दूसरा विश्व युद्ध खत्म हुए कई दशक बीत चुके हैं, युद्ध तो ख़त्म हो गया लेकिन उसमें मिली गहरी चोटों के निशान आज भी ताज़ा हैं। बाद पहले विश्व युद्ध से भी पहले की है जब जापान का वर्चस्व बहुत से देशों में फैल चुका था। 1910 में जापान ने कोरिया पर अक्रमण कर दिया। इसके बाद जापान ने फिलपींस, वियतनाम और अन्य देशों को भी अपने अधीन कर लिया। जापानी सैनिक जिन देशों में युद्ध जीत जाते थे वह नरसंहार मचाया करते। लेकिन दूसरे विश्वयुद्ध के दौरान जापान की क्रूरता सिर्फ नरसंहार तक सीमित नहीं थी। जापानी सैनिक जो करते उसके लिए नरसंहार भी बहुत छोटा शब्द है क्योंकि उनकी बर्बरता इतनी क्रूर होती कि उसके आगे मौत कई गुना बेहतर थी। ये बर्बरता महिलाओं के मामले में और भयावह होती, इतनी इसके बारे में आज भी जान लें तो सिहर उठें।
क्या है 'Wednesday Rally'?
दक्षिण कोरिया में कम्फर्ट वुमन के मुद्दे पर आधारित एक लम्बे समय से विरोध प्रदर्शन चला आ रहा है। यह 8 जनवरी 1992 से चल रहा है। सियोल में पूर्व जापानी दूतावास के सामने प्रत्येक बुधवार को आयोजित होने वाले इन विरोध प्रदर्शनों में दूसरे विश्व युद्ध के दौरान जापानी सेना द्वारा यौन दासता में धकेली गईं महिलाओं के लिए जापानी सरकार से माफी और मुआवजे की मांग की जाती है।

शारीरिक भूख मिटाने के लिए 'वुमन'
दूसरे विश्व युद्ध की शुरआत में जापानी सैनिकों के शारीरिक यौन ज़रूरतों को पूरा करने के लिए गुलाम देशों से फैक्ट्री में काम कराने के बहाने, जबरदस्ती या अपहरण करके लड़कियों को जापान लाया गया। इन लड़कियों को सालों तक सेक्स स्लेव बना कर रखा गया। हर दिन जापानी सैनिकों द्वारा उन लड़कियों का यौन शोषण किया जाता था। इन लड़कियों को जहां रखा जाता था उस जगह को कम्फर्ट स्टेशन का नाम दिया गया और गुलाम लड़कियों को कम्फर्ट वुमन के नाम से जाने जाना लगा। लड़कियों को इस आधार पर चुना जाता था की वे पहले यौन तौर पर एक्टिव न रहीं हों, आम भाषा में कहें तो शारीरिक तौर पर कुवांरी हों। ऐसे में अधिकतर बच्चियां ही कंफर्ट स्टेशन पर लाई गईं, जिनकी उम्र ज्यादा से ज्यादा 20 साल और कम से कम 12 या 13 रही।
कैसे जापानी सैनिक बने जल्लाद?
कंफर्ट स्टेशन के नाम पर एक बड़े से हॉल में कई लड़कियों को बंद रखा जाता। रोजाना एक-एक लड़की से 30-40 जापानी सैनिक अपनी वासनाओं को पूरा करते। हर मामले में उनकी मर्जी के विरुद्ध उनके साथ जबरन यौन संबंध बनाए जाते। कभी-कभार सुरक्षित और ज्यादातर असुरक्षित। उतने से मन नहीं भरता तो उन्हें सिगरेट से दागा जाता, तरह-तरह की यातनाएं दी जातीं।
जान बचने की कोशिश करने पर दर्दनाक यातनाएं
जापानियों के चंगुल में फंसी ये महिलाएं और बच्चियां जब बचकर भागने की कोशिश करतीं तो उनके साथ बुरे से बुरे ढंग से यौन संबंध बनाए जाते। भागने की कोशिश करने वाली बच्चियों को सबक सिखाने के लिए हजारों दूसरी महिलाओं के सामने उन्हें बुरी तरह पीटा जाता, कीलों वाले जूतों से रौंदा जाता, मुंह पर पेशाब की जाती। सबके सामने कई सारे जापानी सैनिक उनसे बारी-बारी से संबंध बनाते। वे तड़पतीं, छटपटातीं लेकिन बेबसी इतनी कि कुछ और करतीं तो गोली मार दी जाती। इतने से मन नहीं भरता तो उनके प्राइवेट पार्ट्स पर इतनी जोर से हमले किए जाते, जिनमें या तो वे बेहोश हो जाती या उनकी जान चली जाती। ये सब इसलिए किया जाता ताकि कोई और भागने की कोशिश ना करे।
कुकर्म को छुपाने के तरीके
जापान के कुकर्म सामने ना आ पाएं इसके चलते जापानी सैनिकों ने दूसरे विश्व युद्ध खत्म होने के बाद कई दस्तावेजों को जला दिया। यूनाइटेड स्टेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ पीस के मुताबिक साल 1932 से ले कर 1945 तक जापान ने बड़े अच्छे तरीके से एक बहुत बड़ी सेक्स इंडस्ट्री खड़ी कर दी थी। कुछ विशेषज्ञों का मनना है की 1910-1945 तक लगभग दो लाख से अधिक औरतों का बलात्कार जापानी सैनिक कर चुके थे। ये सिर्फ आंकड़ें हैं, असलियत इससे भी ज्यादा बुरी हो सकती है।
HIV होने पर मार देते थे गोली?
कंफर्ट वुमन यानी आराम या राहत देने वाली महिला। युद्ध के दौरान जापानी सैनिक अपनी क्रूरता पर उतर आये। कुछ लड़कियों ने जब रेप का विरोध करना शुरू किया तब जापान ने अपनी क्रूरता की सारे हदें पार कर दीं, रेप से डरी, सहमी और चीखती हुई लड़कियों का विरोध करने पर गैंगरेप होने लगा। यह इसलिए किया जाने लगा ताकि इस डरावने मंजर से बाकी लड़कियों को सबक मिल सके। लेकिन उनकी क्रूरता यहां भी नहीं रुकी अगर कोई लड़की यौन रोग जैसे कि HIV या STD से ग्रस्त हो जाती तो उसे या तो जला दिया जाता, या बंदूक के कोने से मारकर उसकी जान ले ली जाती थी, क्योंकि सैनिक बन्दूक की गोलियां इन पर बर्बाद नहीं करने को नुकसान समझते थे।
'इंजेक्शन नंबर 606'
लड़कियां प्रेग्नेंट न हों जाएं, इसके लिए हर हफ्ते उन्हें एक इंजेक्शन दिया जाता था। इंजेक्शन नंबर 606, जो इन लड़कियों को दिया जाता था, इस इंजेक्शन के कारण थोड़े दिन में इस जहरीले केमिकल के शरीर में जाने से ढेरों साइड इफेक्ट होने लगे जैसे- वजाइनल ब्लीडिंग, पेट में लगातार दर्द, वजन कम या ज्यादा होना, उल्टियां आना तथा प्रेग्नेंट होने में कई परेशानियों'का सामना करना आदि। कुछ महिलाएं इसी इंजेक्शन नंबर 606 के चलते मारी गईं।
युद्ध खत्म पर जख्म नहीं
युद्ध खत्म होने के बाद भी यौन गुलाम सालों तक सामान्य जिंदगी नहीं जी सकीं। जापानी सैनिकों से छूटने के बाद जब अमेरिका ने कोरिया और जापान के इलाकों पर कब्जा किया तब कई अमेरिकी सैनिकों ने भी उनके साथ यही दरिंदगी आगे भी कायम रखी। जापानियों ने बहुत सी लड़कियों को जीवनभर के लिए विकलांग कर दिया, किसी की आंखें फोड़ दी गई थीं, किसी के हाथ-पैर काट दिए गए, किसी की जीभ काट दी, किसी के प्राइवेट पार्ट्स काट दिए। बहुत लड़कियां कई अन्य बीमारी से जूझती रहीं।
कंफर्ट वुमन को सुनकर UN में रोए लोग
कोरियाई महिला ह्वांग सो-गुन की टेस्टिमनी ने यूएन में शामिल लोगों को रुला दिया। उन्होंने बताया- मैं 17 साल की थी, जब कुछ सैनिक घर आए और ट्रक में बिठाकर दूर ले गए। ट्रक में मेरी उम्र की और भी लड़कियां थीं। लंबे सफर के बाद हमें एक नदी के पास बनी सूनी फैक्ट्री में छोड़ दिया गया। हर लड़की को एक छोटे-छोटे कमरे में रखा गया और हर कमरे का एक नंबर था। कई घंटों बाद एक सैनिक मेरे कमरे में आया, रेप किया और मारपीट कर चला गया। कमरे के बाहर बहुत से सैनिक थे। वे बार वे बारी-बारी से अंदर आते और रेप करके मुझे दूसरे के हवाले कर देते। उस एक रात में कितने लोग कमरे के अंदर आए, मुझे याद नहीं। विरोध करने पर गैंगरेप होता और फिर कपड़े उतारकर बर्फीली नदी में फेंक दिया जाता था। बच जाती तो दोबारा रेप किया जाता। मर जाती तो जापानी सैनिकों से बच जाती लेकिन जिंदगी से हार जाती।
जानें क्या हुआ 25 जून के प्रोटेस्ट में
दक्षिण कोरिया में 8, जनवरी 1992 से चले आ रहे है कम्फर्ट वीमेन प्रोटेस्ट को आज की तारीख (30 जून 2025) तक 33 साल 6 महीन से अधिक का समय हो गया है। ये दुनिया का अब तक सबसे लंबा चलने वाला सिंगल थीम प्रोटस्ट है। इस हफ़्ते (25 जून) को सम्पन्न की गई बुधवार की दौड़ 1,690वीं थी। इस प्रदर्शन में भाग लेने वाले लोग जापान सरकार से औपचारिक माफी व कानूनी मुआवज़ा की मांग को दोहराते रहे। इस बार भी प्रदर्शन में बुजुर्ग कम्फर्ट वुमन को देखा गया। अब कुछ ही कम्फर्ट वुमन जीवित है। जिनकी उम्र अब 90 वर्ष से भी अधिक हो चुकी है। और साधारण नागरिक और विद्यार्थी समुदाय भी लगातार साथ दे रहे हैं। मीडिया रिपोर्ट के मुतानिक इस सप्ताह की कोई खास घटना जैसे हिंसा, पुलिस हस्तक्षेप या विवाद नहीं हुआ, इसका मतलब यह एक नियमित लेकिन जरूरी, शांतिपूर्ण विरोध रहा।
इस खबर पर आपकी क्या राय है, हमें कॉमेंट में बताएं।
-
Gold Silver Rate Today: सोने चांदी में जबरदस्त गिरावट, गोल्ड 8000, सिल्वर 13,000 सस्ता, अब ये है लेटेस्ट रेट -
LPG Cylinder Price Today: आज बदल गए रसोई गैस के दाम? सिलेंडर बुक करने से पहले चेक करें नई रेट लिस्ट -
'Monalisa को दीदी बोलता था और फिर जो किया', शादी के 13 दिन बाद चाचा का शॉकिंग खुलासा, बताया मुस्लिम पति का सच -
Silver Rate Today: चांदी भरभरा कर धड़ाम! ₹10,500 हुई सस्ती, 100 ग्राम के भाव ने तोड़ा रिकॉर्ड, ये है रेट -
Gold Rate Today: सोने के दामों में भारी गिरावट,₹10,000 गिरे दाम, दिल्ली से पटना तक ये है 22k से 18k के भाव -
'शूटिंग सेट पर ले जाकर कपड़े उतरवा देते थे', सलमान खान की 'हीरोइन' का सनसनीखेज खुलासा, ऐसे बर्बाद हुआ करियर -
Bengaluru Chennai Expressway: 7 घंटे का सफर अब 3 घंटे में, एक्सप्रेसवे से बदलेगी दो शहरों की रोड कनेक्टिविटी -
VIDEO: BJP नेता माधवी लता ने एयरपोर्ट पर क्या किया जो मच गया बवाल! एयरपोर्ट अथॉरिटी से कार्रवाई की मांग -
Delhi NCR Weather Today: दिल्ली-NCR में होगी झमाझम बारिश, दिन में छाएगा अंधेरा, गिरेगा तापमान -
युद्ध के बीच ईरान ने ट्रंप को भेजा ‘बेशकीमती तोहफा’, आखिर क्या है यह रहस्यमयी गिफ्ट -
Gold Silver Price: सोना 13% डाउन, चांदी 20% लुढ़की, मार्केट का हाल देख निवेशक परेशान -
Mumbai Gold Silver Rate Today: सोने-चांदी की कीमतों में जारी है गिरावट, कहां पहुंचा रेट?












Click it and Unblock the Notifications