हिंदू-ईसाइयों को मिटा चुका है पाकिस्तान, 23 प्रतिशत से 4 प्रतिशत पर सिमटे.. मानवाधिकार के रखवाले कहां हैं...
Pakistan Minorities: पाकिस्तान में उन्मादी मुस्लिमों की भीड़ ने पूर्वी औद्योगिक शहर फैसलाबाद के बाहरी इलाके में ईसाई बहुल इलाके में हमला किया और दर्जनों घरों के साथ साथ पांच चर्चों को आग के हवाले कर दिया। पाकिस्तान की सरकार इस हमले के बाद उस वक्त जागी, जब अंतर्राष्ट्रीय समुदाय की तरफ से प्रतिक्रियाएं आनी शुरू हुईं।
लेकिन, अंतर्राष्ट्रीय समुदाय की प्रतिक्रिया भी पाकिस्तान को लेकर काफी एकतरफा होता है। भारत में किसी अल्पसंख्यक पर हिंसा के बाद छाती पीटने वाला अमेरिका, मातम मनाने वाला यूरोप और आसमान सिर पर उठा लेने वाले मानवाधिकार संगठन, पाकिस्तान में होने वाले हिन्दू लड़कियों के धर्म परिवर्तन, ईशनिंदा के नाम पर सालों तक कैद रखे जाने वाले अल्पसंख्यकों के नाम पर शुतुरमुर्ग की तरह अपना सिर रेत में धंसाए रखता है।
सिर्फ निंदा कर ये तमाम लोग अपने दायित्वों से इतिश्री कर लेते हैं।

पाकिस्तान में हर दूसरे दिन किसी ना किसी हिंदू नाबालिग लड़की का अपहरण किया जाता है, उनका धर्म परिवर्तन करवाया जाता है और किसी अधेड़ के साथ निकाह करवा दिया जाता है, लेकिन कोई प्रितिक्रिया नहीं दी जाती है।
हर साल पाकिस्तान में एक हजार से ज्यादा लड़कियों से बलात्कार किया जाता है, धर्म परिवर्तन कर उन्हें इस्लाम में कन्वर्ट कर दिया जाता है। मानवाधिकार आयोग की रिपोर्ट के मुताबिक कोरोना वायरस की वजह से लगाए गये लॉकडाउन ने अल्पसंख्यक लड़कियों की जिंदगी और बर्बाद करनी शुरू कर दी। लॉकडाउन के बाद पाकिस्तान में हजारों लड़कियों का जबरन धर्म परिवर्तन कराया गया है।
'एक कन्ट्री ऑफ पार्टिकुलर कन्सर्न'
साल 2021 में अमेरिकी विदेश विभाग ने पाकिस्तान को 'एक कन्ट्री ऑफ पार्टिकुलर कन्सर्न' (a country of particular concern) की श्रेणी में रखा था। जिसका मतलब होता है, वो देश जहां धार्मिक आजादी का महत्व नहीं है। जहां पर अल्पसंख्यकों पर जुल्म किए जाते हैं, उन्हें फर्जी मुकदमों में फंसा दिया जाता है, बगैर किसी आरोप के उन्हें हिरासत में रखा जाता है और अल्पसंख्यक लड़कियों को घर्म परिवर्तन कराने में जिस देश में जोर दिया जाता है।
यूएस कमीशन ऑन इंटरनेशनल रिलिजियस फ्रीडम की रिपोर्ट के आधार पर पाकिस्तान को 'अल्पसंख्यकों के लिए नर्क' ठहराया गया था। जिसे तत्कालीन पाकिस्तानी सरकार ने खारिज कर दिया था। अमेरिकन रिपोर्ट में साफ कहा गया था, कि पाकिस्तान में सिर्फ धर्म परिवर्तन के लिए अल्पसंख्यक लड़कियों को अगवा किया जाता है और फिर उनकी शादी मुस्लिमों से करवा दी जाती है। पाकिस्तान अल्पसंख्यक समुदायों के लिए रहने लायक नहीं बचा है।
लेकिन, हैरानी की बात ये थी, कि अमेरिका ने रिपोर्ट जारी करने के अलावा, पाकिस्तान के ऊपर कभी भी दबाव नहीं बनाया, कि वो अल्पसंख्यकों की हिफाजत करे।
हिन्दू लड़कियों का सबसे ज्यादा धर्मपरिवर्तन
अमेरिकन रिपोर्ट में कहा गया था, कि पाकिस्तान के दक्षिण सिंध में रहने वाले अल्पसंख्यक हिन्दुओं का सबसे ज्यादा धर्मपरिवर्तन किया जाता है। 30 दिसंबर 2020 को नेहा नाम की एक लड़की का धर्मपरिवर्तन किया गया था, जो एक क्रिश्चियन लड़की थी।
वहीं, 2021 के पाकिस्तानी स्वतंत्र मानवाधिकार आयोग की रिपोर्ट में बेहद खतरनाक खुलासे किए गये थे। पाकिस्तानी मानवाधिकार आयोग की रिपोर्ट में कहा गया था, कि अलग अलग बहानों के साथ हिन्दू लड़कियों को किडनैप कर लिया जाता है।
ज्यादातर वारदातों में देखा गया है कि गरीब हिन्दू परिवारों की बेटियों को ही अगवा किया जाता है। ये हिन्दू परिवार किसी अमीर मुस्लिम के खेत में काम करते हैं और खेत का मालिक उन्हें काफी कर्ज दिए रहता है। फिर अचानक गरीब हिन्दू की बेटी को किडनैप कर उन्हें किसी अधेड़ मुस्लिम के हाथों बेच दिया जाता है।
पाकिस्तानी मानवाधिकार आयोग की रिपोर्ट के मुताबिक ज्यादातर हिन्दू लड़कियों को शादी के लिए अगवा किया जाता है। किडनैप करने के बाद पहले उनका धर्म परिवर्तन किया जाता है और जल्द से जल्द उन्हें बेच दिया जाता है।

पुलिस, मौलवी, मजिस्ट्रेज सब शामिल
पाकिस्तान मानवाधिकार आयोग की रिपोर्ट में कहा गया था, कि लोकल स्तर पर एक पूरा का पूरा गिरोह धर्मपरिवर्तन के पीछे शामिल होता है। जिसमें मौलवी, पुलिस अधिकारियों के साथ साथ मजिस्ट्रेट भी शामिल होते हैं। किसी हिन्दू लड़की का अपहरण होने के बाद मौलवी उसके धर्मपरिवर्तन कर मुसलमान बनाते हैं। भ्रष्ट पुलिस अधिकारी मुकदमा दर्ज नहीं करते हैं और अगर मुकदमा दर्ज भी होता है तो मजिस्ट्रेट उस मुकदमे को खारिज कर देते हैं।
चाइल्ड प्रोटेक्शन एक्टिविस्ट जिबरान नासिर इस सिंडिकेट को 'माफियाराज' करार देते हुए बताते हैं कि पाकिस्तान में ''हिन्दू लड़कियों का शिकार'' किया जाता है। हिन्दू लड़कियां ज्यादातर इसलिए इनके टार्गेट पर होती हैं क्योंकि स्थानीय पुलिस से लेकर स्थानीय नेता तक को पहले धर्म की दुहाई दी जाती है और अगर कोई नेता विरोध करता है तो मौलवी उसके खिलाफ फतवा जारी करने की धमकी देते हैं।
चाइल्ड प्रोटेक्शन एक्टिविस्ट जिबरान नासिर बताते हैं, पाकिस्तान में अब सिर्फ 3.6 प्रतिशत ही अल्पसंख्यक रह गये हैं। पाकिस्तानी अल्पसंख्यकों के साथ बहुत बुरा व्यवहार किया जाता है और अगर कोई हिन्दू परिवार उस विरोध के खिलाफ थाने में जाता है तो उसके ऊपर ईश-निंदा का आरोप मढ़ दिया जाता है। पाकिस्तान में ईश-निंदा के लिए मौत की सज़ा का प्रावधान है। लिहाजा, ज्यादातर मामलों में रिपोर्ट दर्ज कराने पीड़ित परिवार नहीं जाता है।












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