फ्रांस में मिल सकती है मर्जी से मौत चुनने की आजादी.. राष्ट्रपति की घोषणा, इस तरह के लोग चुन सकेंगे इच्छामृत्यु
France to legalise assisted dying: फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने कानूनी तौर पर 'मौत को चुनने' की आजादी की घोषणा की है और नये कानून के तहत, फ्रांस के नागरिक अपनी मौत चुन सकेंगे।
एसोसिएटेड प्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने "मृत्यु में सहायता" को वैध बनाने के लिए नए कानून की घोषणा की है, जो लाइलाज बीमारियों से पीड़ित वयस्कों को घातक दवा लेकर मौत को गले लगाने की अनुमति देगी।

फ्रांसीसी समाचार पत्रों ला क्रॉइक्स और लिबरेशन ने सोमवार को राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों का एक इंटरव्यू छापा है, जिसमें राष्ट्रपति ने कहा है, कि "नया बिल सिर्फ लाइलाज बीमारी से पीड़ित वयस्कों पर लागू होगा, जिनकी "अल्पकालिक या मध्यम अवधि" में मृत्यु होने की आशंका है और वे "असाध्य" शारीरिक स्थिति या मनोवैज्ञानकि पीड़ा का अनुभव कर रहे हैं।
फ्रांस में मर्जी से मौत चुनने की आजादी
राष्ट्रपति मैक्रों ने टर्मिनल कैंसर से पीड़ित लोगों का उदाहरण देते हुए कहा, कि "ये कानून एक निर्धारित स्थिति में ही लागू होगा, जहां डॉक्टर से इजाजत मिलना जरूरी होगा। टर्मिनल कैंसर से पीड़ित कई मरीज इच्छामृत्यु चुनने के लिए अन्य यूरोपीय देशों में चले गये।"
आपको बता दें, कि कुछ यूरोपीय देशों में इच्छामृत्यु को लेकर कानून है, जहां मरीज घातक इंजेक्शन के जरिए अपनी मौत चुन सकते हैं।
हालांकि, इच्छामृत्यु को लेकर कुछ शर्तें लागू होती हैं। समाचार एजेंसी एपी के मुताबिक, मैक्रों ने पुष्टि की है, कि सिर्फ 18 वर्ष से ज्यादा की उम्र के लोग, जो अपनी राय बनाने में सक्षम हैं, उन्हें इस प्रक्रिया में भाग लेने की अनुमति दी जाएगी, और गंभीर मनोरोग स्थितियों और अल्जाइमर रोग जैसे न्यूरोडीजेनेरेटिव विकारों वाले लोगों को इस कानून से बाहर रखा जाएगा।
फ्रांस में इच्छामृत्यु को लेकर ये बिल उस वक्त बनाया गया है, जब पिछले साल एक रिपोर्ट में संकेत दिया गया था, कि ज्यादातर फ्रांसीसी नागरिक जीवन के अंत के विकल्पों को वैध बनाने का समर्थन करते हैं। मैक्रों ने कानून के लागू होने को लेकर फिलहाल कोई तारीख तय नहीं की है और उन्होंने कहा, कि इसे पहले एक महीने लंबी विधायी प्रक्रिया से गुजरना होगा, जो मई में शुरू होगी।
आइये जानते हैं, उन यूरोपीय देशों के बारे में, जहां लोगों को अपनी मर्जी से मौत चुनने की आजादी मिली हुई है।
नीदरलैंड में इच्छामृत्यु पर सबसे पहले कानून
अप्रैल 2002 में नीदरलैंड इच्छामृत्यु को वैध बनाने वाला दुनिया का पहला देश बन गया था, जहां डॉक्टर लाइलाज स्थिति से पीड़ित रोगियों को दवाओं की घातक खुराक देते हैं। इस कानून के तहत नीदरलैंड में मरीजों को आत्महत्या करने का अधिकार दिया गया है। डच कानून में कहा गया है, कि मरीज को "सुधार की कोई संभावना नहीं के साथ असहनीय पीड़ा" होनी चाहिए और उसने "अपनी मर्जी से अच्छी तरह से विचार-विमर्श और पूरे विश्वास के साथ" मरने का अनुरोध किया हो।
2012 में नीदरलैंड ने अत्यधिक पीड़ा झेल रहे 12 वर्ष से ज्यादा उम्र के लोगों के लिए इच्छामृत्यु को अधिकृत करने के लिए कानून का संशोधन किया गया, लेकिन इसमें माता-पिता की सहमति को अनिवार्य कर दिया गया। अप्रैल 2023 में डच सरकार ने भी वर्षों की बहस के बाद 12 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए इच्छामृत्यु को मंजूरी दे दी।
बेल्जियम, लक्ज़मबर्ग, स्पेन, पुर्तगाल
इसके अलावा, बेल्जियम ने मई 2002 में इच्छामृत्यु को अपनाने वाला और आत्महत्या में सहायता करने वाला कानून बनाया और वहां नीदरलैंड की ही तरह कानून बनाया गया। लेकिन, 2014 में बेल्जियम, नीदरलैंड से भी आगे निकल गया और सभी उम्र के असाध्य रूप से बीमार बच्चों को भी अपने माता-पिता की सहमति से इस प्रक्रिया का अनुरोध करने की अनुमति दे दी गई।
बेनेलक्स देश लक्ज़मबर्ग ने 2009 में इच्छामृत्यु और सहायता मृत्यु को अपराध की श्रेणी से बाहर कर दिया, इसके बाद जून 2021 में स्पेन ने दोनों प्रथाओं को वैध कर दिया। मई 2023 में पुर्तगाल ने एक धर्मनिष्ठ चर्चवासी राष्ट्रपति मार्सेलो रेबेलो डी सूसा के कड़े विरोध के बावजूद, इच्छामृत्यु को अपराध की श्रेणी से बाहर करने वाला एक विधेयक अपना लिया। कानून ने अत्यधिक पीड़ा और असाध्य रोगों से पीड़ित लोगों के लिए इच्छामृत्यु को वैध बना दिया।












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