France: इस्‍लामी चरमपंथ से निबटने के लिए राष्‍ट्रपति मैंक्रो के बिल को मिली मंजूरी

पेरिस। फ्रांस के राष्‍ट्रपति इमैनुएल मैंक्रो को कैबिनेट की तरफ से उस बिल के लिए मंजूरी मिल गई है जिसके जरिए चरमपंथी इस्‍लाम पर नियंत्रण लगाया जाना है। फ्रांस में पिछले कुछ दिनों में हुए आतंकी हमलों के बाद मैंक्रो सरकार ने इस बिल को तैयार किया है। हालांकि कुछ लोगों का मानना है कि बिल फ्रांस में बसे मुसलमान समुदाय को डराने का काम करेगा।

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बदला गया बिल का नाम

इस बिल को पहले 'एंटी-सेपरटिज्‍म' यानी 'अलगाववाद विरोध बिल' कहा गया था। मैंक्रो ने इस शब्‍द का प्रयोग उन चरमपंथी इस्‍लामी ताकतों के लिए किया था जो मुख्‍य समाज से आते हैं। लेकिन आलोचना के बाद इसका नाम बदलकर अब 'ड्राफ्ट लॉ टू स्‍ट्रेंथन रिपब्लिकन वैल्‍यूज' यानी संवैधानिक मूल्‍यों को ताकत देने वाला बिल कर दिया गया है। बिल में ज्‍यादातर बातें असाम्प्रदायिकता और अभिव्‍यक्ति की आजादी से जुड़ी हैं। बुधवार को फ्रांस के राष्‍ट्रपति जीन कास्‍टेक्‍स ने इस बिल का बचाव किया। उन्‍होंने कहा कि इस बिल में जो भी बातें दी गई हैं उनका मकसद किसी की धार्मिक आजादी को निशाना बनाना नहीं है बल्कि चरमपंथी इस्‍लामिक विचारधारा को कमजोर करना है। कास्‍टेक्‍स ने बिल को एक ऐसे कानून के तौर पर बताया है जो आजादी के कानून और धार्मिक रुढ़िवाद के नाम पर गुलामी से बचाता है। यह कानून पहले अक्‍टूबर में आना था और इतिहास के टीचर सैमुअल पैट की हत्‍या से पहले इसे लाए जाने की तैयारी थी। पैटी का 18 साल के चेचेन मूल के युवा ने सिर कलम करके हत्‍या कर दी थी। पैगंबर मोहम्‍मद के कार्टून को क्‍लास में फ्रीडम ऑफ स्‍पीच को बताने के लिए पैटी ने बच्चों को दिखाया था। उनकी हत्‍या के बाद फ्रांस में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए और सोशल मीडिया पर भी इस्‍लाम विरोधी कैंपेन चलाए गए। इनकी वजह से बिल को नई प्रेरणा मिली।

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