सैन्य तख्तापलट के बाद फ्रांस ने नाइजर में फंसे भारतीय नागरिकों को निकाला, दूतावास पर हमले के बाद लिया फैसला
अफ्रीकी देश नाइजर में सैन्य तख्तापलट के बाद वहां मौजूद विदेशी नागरिकों पर संकट के बादल घिर चुके हैं। ऐसे में फ्रांसीसी सरकार ने वहां फंसे भारत समेत अन्य देशों के नागरिकों को निकालना शुरू कर दिया है।
रिपोर्ट के मुताबिक फ्रांस ने पिछले दो दिनों में भारतीय नागरिकों सहित अपने 990 से अधिक नागरिकों को निकाला है। भारत में फ्रांस के राजदूत इमैनुएल लेनैन ने ट्विटर पर कहा कि फ्रांस द्वारा निकाले गए 992 लोग में से 560 उसके नागरिक हैं, जबकि बाकी में भारतीय नागरिकों सहित कई अन्य देशों के नागरिक शामिल हैं।

राजदूत ने बताया कि अब तक फ्रांसीसी और अन्य राष्ट्रीय नागरिकों को लेकर चार उड़ानें नाइजर से रवाना हो चुकी हैं। नाइजर छोड़ने को तैयार 992 लोगों को ले जाया गया है। दिन के अंत में पांचवीं और अंतिम उड़ान निर्धारित है।
अल जज़ीरा की रिपोर्ट के अनुसार नाइजर में तख्तापलट के समर्थकों द्वारा रविवार को फ्रांसीसी झंडे जलाने और नाइजर की राजधानी नियामी में फ्रांसीसी दूतावास पर हमला करने के बाद फ्रांसीसी विदेश मंत्रालय का बयान आया है।
फ्रांसीसी विदेश मंत्रालय ने कहा हमारे दूतावास के खिलाफ हुई हिंसा को देखते हुए हम अपने अपने लोगों की निकासी शुरू कर रहे हैं। कम से कम चार यूरोपीय देशों ने घोषणा की है कि नाइजर में उनके नागरिकों को निकालने की योजना चल रही है।
वहीं, फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने कहा कि नाइजर में फ्रांसीसी हितों पर किसी भी हमले का माकूल जवाब दिया जाएगा। आपको बता दें कि बीते हफ्ते नाइजर की सेना ने मुल्क में तख्तापलट कर दिया। सेना ने नेशनल टीवी पर नाइजर के संविधान को भंग करने का ऐलान करते हुए सभी संस्थानों को निलंबित कर दिया है।
जनरल अब्दुर्रहमान त्चियानी को उन विद्रोही सैनिकों का नेता घोषित किया गया है जिन्होंने तख्तापलट करते हुए लोकतांत्रिक रूप से निर्वाचित राष्ट्रपति को हिरासत में ले लिया है। आपको बता दें कि साल 1960 में फ्रांस से आजादी मिलने के बाद नाइजर में अब तक चार बार तख्तापलट हो चुका है।
नाइजर दुनिया का सातवां सबसे बड़ा यूरेनियम उत्पादक देश है। नाइजर में यूरेनियम के खनन का आधा से भी अधिक हिस्सा फ्रांस तक पहुंचता है। नाइजर की नयी सरकार ने फ्रांस को यूरेनियम और सोना निर्यात करने पर रोक लगा दी है। हालांकि फ्रांस से कहा है कि नाइजर में सैनिक हस्तक्षेप की उसकी कोई योजना नहीं है।
हालांकि नाइजीरिया के नेतृत्व वाले पश्चिमी अफ़्रीकी देशों का समूह इकोवास के माध्यम से पश्चिमी देश नाइजर के सैनिक शासन पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहे हैं। अल्जीरिया, माली, बुर्किना फ़ासो और गिनी ने आधिकारिक रूप से कहा है कि अगर नाइजर पर हमला होगा, तो वे भी चुप नहीं बैठेंगे।
नाइजर में फ्रांस, अमेरिका और इटली के सैकड़ों सैनिक हैं। इसके साथ ही नाइजर में अमेरिका का एक बहुत बड़ा वायु सैनिक अड्डा भी है, जो ड्रोन के सबसे बड़े ठिकानों में से एक है।
अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन ने नाइजर के राष्ट्रपति मोहम्मद बजौम की तत्काल रिहाई और देश में लोकतांत्रिक व्यवस्था की बहाली की अपील की है।












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