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फॉक्सकॉन-वेदांता का 20 अरब डॉलर का डील टूटा.. पीएम मोदी के सपने को लगा बड़ा झटका? जानें इनसाइड स्टोरी

Foxconn withdrawn from Vedanta: फरवरी 2022 में वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माता कंपनी फॉक्सकॉन और भारतीय समूह वेदांता ने भारत में सेमी-कंडक्टर बनाने के लिए साझेदारी की घोषणा की थी। पिछले साल सितंबर में, कंपनियों ने गुजरात के धोलेरा में एक संयंत्र स्थापित करने के लिए 19.5 अरब डॉलर का निवेश करने के लिए एक समझौते पर हस्ताक्षर किए थे, जिसका लक्ष्य था, 2024 में प्रोडक्शन शुरू कर देना।

लेकिन अब, फॉक्सकॉन ने सोमवार को घोषणा की है, कि वह इस ज्वाइंट वेंचर से बाहर हो रहा है। फॉक्सकॉन ने वेदांता ग्रुप के साथ गुजरात में सेमी-कंडक्टर फैक्ट्री लगाने की डील को रद्द कर दिया है। फॉक्सकॉन का इस डील से बाहर आना, भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के सेमी-कंडक्टर ड्रीम के लिए बहुत बड़ा झटका है।

Foxconn withdrawn from Vedanta,

फॉक्सकॉन कंपनी ने कहा है, कि वह "वेदांता की पूर्ण स्वामित्व वाली इकाई से फॉक्सकॉन नाम हटाने के लिए काम कर रही है"।

होन हाई टेक्नोलॉजी समूह (फॉक्सकॉन) ने कहा, कि "फॉक्सकॉन का इकाई से कोई संबंध नहीं है और इसके मूल नाम को बनाए रखने के प्रयासों से भविष्य के हितधारकों के लिए भ्रम पैदा होगा।"

फॉक्सकॉन ने वेदांता से क्यों तोड़ा रिश्ता?

फॉक्सकॉन ने सोमवार को कहा, कि "आपसी समझौते के अनुसार, अधिक विविध विकास के अवसरों का पता लगाने के लिए, फॉक्सकॉन ने तय किया है कि वह वेदांता के साथ संयुक्त उद्यम पर आगे नहीं बढ़ेगा।"

बयान में कहा गया है, कि एक साल से ज्यादा समय तक होन हाई टेक्नोलॉजी ग्रुप (फॉक्सकॉन) और वेदांता ने एक सेमीकंडक्टर विचार को वास्तविकता में लाने के लिए कड़ी मेहनत की है। यह एक फलदायी अनुभव रहा है जो दोनों कंपनियों को आगे बढ़ने में मजबूती प्रदान कर सकता है।

बयान में आगे कहा गया है, कि "फॉक्सकॉन भारत के सेमीकंडक्टर सेक्टर के विकास की दिशा को लेकर आश्वस्त है। हम सरकार की 'मेक इन इंडिया' महत्वाकांक्षाओं का पुरजोर समर्थन करना जारी रखेंगे और हितधारकों की जरूरतों को पूरा करने वाली विविध स्थानीय साझेदारियां स्थापित करेंगे।"

यह घटनाक्रम कुछ ही महीनों बाद आया है, जब उप आईटी मंत्री राजीव चंद्रशेखर ने रॉयटर्स को बताया था, कि जेवी एक टेक्नोलॉजी भागीदार के साथ गठजोड़ करने के लिए "संघर्ष" कर रहा है।

पिछले महीने जून में, सेबी ने एक प्रेस रिलीज जारी करते हुए नियमों का उल्लंघन करने के लिए वेदांत पर जुर्माना लगाया था, जिससे यह पता चला, कि उसने भारत में सेमीकंडक्टर बनाने के लिए फॉक्सकॉन के साथ साझेदारी की थी, क्योंकि ये सौदा वेदांत की होल्डिंग कंपनी के साथ था।

मामले से परिचित एक सूत्र ने कहा, कि भारत सरकार द्वारा चिप उत्पादन के लिए प्रोत्साहन योजना के आवेदन पर सवाल उठाए जाने के बाद फॉक्सकॉन ने वेदांता के साथ सेमीकंडक्टर संयुक्त उद्यम से हाथ खींच लिया।

सूत्र ने बताया, कि भारत सरकार से मिलने वाली सहायता को लेकर सरकार ने वेदांता के सामने कई सवाल उठाए थे और ये सवाल सेमीकंडक्टर बनाने के लागत अनुमान को लेकर था।

हालांकि, वेदांता ने कहा है, कि भारत में चिप निर्माण को लेकर वो अपने लक्ष्यों के साथ आगे बढ़ रहा है और भारत में सेमीकंडक्टर के निर्माण को लेकर वो अन्य सहयोगियों के साथ बातचीत कर रही है।

दुनिया की थी सबसे बड़ी डील

आपको बता दें, कि वेदांता और ताइवान की फॉक्सकॉन कंपनी के बीच 19.5 अरब डॉलर की ये डील, चिप उत्पादन को लेकर दुनिया की सबसे बड़ी डील थी।

भारत में चिप उत्पादन का लक्ष्य प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का ड्रीम प्रोजेक्ट माना जा रहा था और मोदी सरकार की रणनीति में भारत में चिप निर्माण सबसे प्रमुख लक्ष्य है, लिहाजा इस डील का टूटना पीएम मोदी के महत्वाकांझी सपने के टूटने जैसा है।

वहीं, कांग्रेस के नेता जयराम रमेश ने डील टूटने के बाद कहा है, कि 'इस डील के समय जिस तरह का प्रचारक किया गया था उसे याद कीजिए। गुजरात के मुख्यमंत्री ने कहा था, कि इस प्रोजेक्ट से एक लाख नई नौकरियां पैदा होंगी।'

हालांकि, भारत सरकार का कहना है, कि इससे कोई फर्क नहीं पड़ेगा।

केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने News18 को बताया, कि "दोनों कंपनियां भारत के सेमीकंडक्टर मिशन और मेक इन इंडिया के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध हैं"।

ट्विटर पर चंद्रशेखर ने कहा, कि फॉक्सकॉन के फैसले का भारत की योजनाओं पर "कोई प्रभाव नहीं" पड़ा, उन्होंने कहा कि दोनों कंपनियां देश में "मूल्यवान निवेशक" थीं।

उन्होंने कहा, कि यह सरकार का काम नहीं है कि वह "क्यों या कैसे दो निजी कंपनियां साझेदारी चुनें या नहीं चुनें, इसके बारे में कोई फैसला करे।"

डील टूटने के बाद आगे क्या होगा?

वेदांता ने कहा है, कि वह आगे बढ़ेगी और वह अपने सेमीकंडक्टर प्रोजेक्ट के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है। उसने कहा है, कि कंपनी ने "भारत की पहली फाउंड्री स्थापित करने के लिए अन्य साझेदारों को तैयार किया है"।

एक बयान में कहा गया है, कि "वेदांता ने पीएम मोदी के दृष्टिकोण को पूरा करने के लिए अपने प्रयासों को दोगुना कर दिया है"। कंपनी ने कहा, कि "हम अपनी सेमीकंडक्टर टीम को बढ़ाना जारी रखेंगे और हमारे पास एक प्रमुख इंटीग्रेटेड डिवाइस निर्माता (आईडीएम) से 40 एनएम (चिप्स) के लिए उत्पादन-ग्रेड तकनीक का लाइसेंस है।"

भारत के लिए बहुत बड़ा झटका?

कुछ लोगों का कहना है, कि यह सरकार के लिए झटका है.

काउंटरप्वाइंट के शोध उपाध्यक्ष नील शाह ने कहा, कि "इस सौदे का असफल होना निश्चित रूप से 'मेक इन इंडिया' के लिए एक झटका है।" उन्होंने कहा, कि यह वेदांता पर भी अच्छा प्रभाव नहीं डालता है और "अन्य कंपनियों के लिए आशंकाएं और संदेह पैदा करता है"। .

बहरहाल, भारत सरकार ने कहा है, कि वह चिप निर्माण के लिए निवेशकों को आकर्षित करने को लेकर आश्वस्त है। माइक्रोन ने पिछले महीने कहा था, कि वह चिप परीक्षण और पैकेजिंग इकाई में 825 मिलियन डॉलर तक का निवेश करेगा, हालांकि उसमें विनिर्माण का जिक्र नहीं था।

भारत को अभी भी उम्मीद है, कि उसका सेमीकंडक्टर बाजार 2026 तक 63 अरब डॉलर का हो जाएगा, पिछले साल 10 अरब डॉलर की प्रोत्साहन योजना के तहत संयंत्र स्थापित करने के लिए तीन आवेदन प्राप्त हुए हैं।

ये वेदांता-फॉक्सकॉन ज्वाइंट वेंचर, सिंगापुर स्थित आईजीएसएस वेंचर्स और वैश्विक कंसोर्टियम आईएसएमसी से थे, जो टॉवर सेमीकंडक्टर (टीएसईएम.टीए) को एक तकनीकी भागीदार के रूप में मानता है।

हालांकि, इंटेल द्वारा टावर का अधिग्रहण किए जाने के कारण 3 अरब डॉलर की आईएसएमसी परियोजना भी रुक गई है, जबकि आईजीएसएस द्वारा 3 अरब डॉलर की एक अन्य योजना भी रुकी हुई है, क्योंकि वह अपना आवेदन फिर से जमा करना चाहता है।

आपको बता दें, कि भारत ने कंपनियों से प्रोत्साहन योजना के लिए दोबारा आवेदन आमंत्रित किये हैं। इसके तहत भारत सरकार, भारत में चिप निर्माण को लेकर कंपनियों को कई तरह की सुविधाएं मुहैया कराने वाली है।

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