तालिबान, पाकिस्तान, श्रीलंका, म्यांमार, चीन... अमेरिकी सांसद ने कहा, चुनौतियों के बीच जीता है भारत
भारत में काम कर चुके पूर्व अमेरिकी राजदूत टिम रोमर ने अपने एक और ट्वीट में अमेरिका और चीन के बीच एक वक्त की दोस्ती का हवाला भी दिया है।
नई दिल्ली, अप्रैल 13: यूक्रेन युद्ध की वजह से भारत पर रूस की निंदा करने का दवाब बनाया जा रहा है और हालात यहां तक पहुंच चुके हैं, कि इस साल जून में होने वाली जी7 शिखर सम्मेलन में भारत का 'बहिष्कार' किया जा सकता है। दूसरी तरफ अमेरिका और ब्रिटेन से लगातार भारत के खिलाफ आवाजें उठ रही हैं। लेकिन, इन सबके बीच पूर्व अमेरिकी अधिकारी ने भारत का पक्ष लिया है और भारत को लेकर नजरिया बदलने की अपील की है।

भारत पर बोले पूर्व अमेरिकी अधिकारी
रूस की निंदा नहीं करने को लेकर अंतर्राष्ट्रीय दवाब से जूझते भारत के समर्थन में पूर्व अमेरिकी अधिकारी टिम रोमर आए हैं और उन्होंने कहा कि, भारत एक चुनौतीपूर्ण क्षेत्र में रहता है। टिम रोमर भारत में अमेरिका के राजदूत रह चुके हैं और इस वक्त अमेरिका के इंडियाना क्षेत्र से सांसद हैं और उन्होंने खुलकर भारत की नीति का समर्थन किया है। टिम रोमर ने अपने ट्वीट में लिखा है कि, ‘भारत एक चुनौतीपूर्ण क्षेत्र में रहता है। अफगानिस्तान में तालिबान फिर उभर आया है। पाकिस्तान में सरकार में अचानक बदल चुकी है। म्यांमार में नागरिक संघर्ष जारी है। श्रीलंका में कैबिनेट का इस्तीफा हो चुका है और देश में संघर्ष हो रहा है और एक तरफ चीन की सैनिक भारत की सीमा पर मौजूद हैं। और उस वक्त रूस अंतरराष्ट्रीय आक्रोश पैदा कर रहा है। लिहाजा, नजरिया (भारत का) देखना जरूरी है।
‘भारतीय विश्वास में निवेश जरूरी’
भारत में काम कर चुके पूर्व अमेरिकी राजदूत टिम रोमर ने अपने एक और ट्वीट में अमेरिका और चीन के बीच एक वक्त की दोस्ती का हवाला भी दिया है। उन्होंने कहा है कि, ‘एक वक्त अमेरिका और चीन के संबंधों को लेकर कहा जाता था, कि ये लोगों के लिए काफी फायदेमंद साबित होगा।' टिम रोमर ने भारत को लेकर अपने एक ट्वीट में कहा कि, ‘ (अतीत में) यह कहा गया है कि अमेरिका और चीन के बीच संबंध "भविष्य को हर आयाम में आकार देंगे। चूंकि यह संबंध नाटकीय रूप से बदल चुका है और शी जिनपिंग और कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ चायना के फैसलों के कारण, भारत रक्षा/व्यापार/प्रौद्योगिकी पर सामरिक क्षेत्र में महत्व में स्थिति रखता है। आइए पुनर्संतुलन में निवेश करें'। अमेरिकी सांसद और पूर्व राजदूत का भारत को लेकर ये काफी अहम बयान है, क्योंकि भारत के खिलाफ लगातार यूरोपीय देशों से आवाजें उठ रही हैं और जी7 में भारत को नहीं बुलाने की बात की जा रही है।

जी7 में भारत का ‘बहिष्कार’
आपको बता दें कि, इस साल जून में होने वाली जी7 की बैठक में जर्मनी बतौर मेहमान राष्ट्र भारत को आमंत्रित नहीं कर सकता है। रिपोर्ट के मुताबिक, यूक्रेन पर हमला करने वाले रूस की निंदा नहीं करने को लेकर जर्मनी पीएम मोदी से गुस्सा है और इसी नाराजगी के चलते इस बार जर्मनी भारत को बतौर गेस्ट नहीं बुला सकता है। मामले के जानकर अधिकारियों के मुताबिक, जर्मनी इस बात पर बहस कर रहा है, कि क्या प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को जून में आयोजित होने वाले सात देशों के शिखर सम्मेलन में आमंत्रित किया जाए या नहीं? जर्मनी बवेरिया में बैठक में सेनेगल, दक्षिण अफ्रीका और इंडोनेशिया को अतिथि के रूप में शामिल करने के लिए तैयार है, लेकिन भारत अभी भी विचाराधीन है। गोपनीय मामलों पर चर्चा करते हुए पहचान जाहिर नहीं करने की शर्त पर एक अधिकारी ने कहा कि, भारत यूक्रेन में युद्ध शुरू होने से पहले तैयार की गई जी7 की सूची में शामिल था, लेकिन युक्रेन युद्ध में भारत के रूख को देखते हुए अभी तक अंतिम फैसला नहीं लिया गया है।

भारत पर प्रेशर बनाने की कोशिश
अमेरिका और पश्चिमी देश चीन के खिलाफ भारत को प्रमुख ‘अस्त्र' की तरह देख रहे हैं, लिहाजा भारत को हमेशा से इन देशों ने चीन और पाकिस्तान का डर दिखाने की कोशिश की है। जबकि, इतिहास गवाह रहा है, कि चीन के विकास का रास्ता अमेरिका ने ही खोला था। वो राष्ट्रपति निक्सन थे, जो सबसे पहली बार चीन गये थे, जहां ताइवान को यूनाइटेड नेशंस से बाहर निकालने का समझौता हुआ था और अब ये अमेरिका... ताइवान को बचाने के लिए डींगे हांक रहा है, जबकि ताइवान को एक बार फिर से यूनाइटेड नेशंस का सदस्य बनाने के नाम पर चुप रहता है। वहीं, पाकिस्तान को अरबों रुपये के हथियार देकर भारत के खिलाफ अमेरिका ने ही खड़ा किया और जब अमेरिका का काम निकल गया, तो बारूद के ढेर पर बैठा पाकिस्तान अपनी अर्थव्यवस्था की बदहाली पर आंसू बहा रहा है।












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