सोवियत यूनियन के पूर्व राष्ट्रपति मिखाइल गोर्बाचेव का 91 वर्ष की आयु में निधन
नई दिल्ली, 31 अगस्त। सोवियत यूनियन के पूर्व राष्ट्रपति मिखाइल गोर्बाचेव का 91 वर्ष की आयु में निधन हो गया है। मिखाइल गोर्बाचेव को कोल्ड वॉर को खत्म करने में अहम भूमिका निभाने के लिए याद किया जाताहै। सेंट्रल क्लीनिकल हॉस्पिटल की ओर से बयान जारी करके इस बात की जानकारी दी गई है। बयान में कहा गया है कि मिखाइल लंबी बीमारी से ग्रसित थे, जिसके बाद उनका निधन हो गया है। मिखेल को कई अहम सुधारों के लिए याद किया जाता है।

बता दें कि मिखाइल गोर्बाचेव युनाइटेड सोवियत ऑफ यूनियन सोशलिस्ट रिपब्लिक्स के आकिरी नेता था, उन्हें एक बेहद लोकप्रिय नेता के तौर पर याद किया जाता है। वह कम्युनिस्ट काल में बड़े सुधार के पक्षधर थे, देश के नागरिकों की आजादी के लिए उन्होंने कई लोकतांत्रिक सिद्धांतों को अपनाया। जब पूरे सोवियत यूनियन में लोकतंत्र के पक्ष में प्रदर्शन हो रहे थे तो गोर्बाचेव ने इसके खिलाफ ताकत का इस्तेमाल करने से परहेज किया।
गोर्बाचेव ने अभिव्यक्ति की आजादी का समर्थन किया, जोकि उनके सत्ता में आने से पहले काफी हद तक लोगों को प्राप्त नहीं था। गोर्बाचेव ने आर्थिक सुधार के कार्यक्रमों की भी शुरुआत की थी, जिसे पेरेस्ट्रोइका या फिर पुन:निर्माण के नाम से जाना जाता है, यह उस वक्त सोवियत अर्थव्यवस्था के लिए बहुत जरूरी था क्योंकि उस वक्त महंगाई बढ़ रही थी और उत्पादों की सप्लाई काफी प्रभावित थी। मीडिया को सांस्कृतिक आजादी दी गई, उस दौर के कलाकार समुदाय को भी यह आजादी मुहैया कराई गई थी।
सरकार पर राजनीतिक दल के प्रभाव को कम करने के लिए भी गोर्बाचेव ने कई सुधार किए। उनके काल में कई हजार राजनीतिक कैदियों और उनके सहयोगियों को रिहा किया गया। परमाणु असैन्यिकरण के लिए भी गोर्बाचेव को याद किया जाता है, उन्होंने अमेरिका के साथ परमाणु असैन्यिकरण समझौता किया, जिसके लिए उन्हें नोबेल शांति पुरस्कार भी दिया गया था। गोर्बाचेव के पहले पांच साल के कार्यकाल के बारे में बात करें तो यह काफी प्रभावी था। उन्होंने अफगानिस्तान से सोवियत सेना को वापस बुलाया था।












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