'यूक्रेन को नाटो में शामिल ना करने का फैसला सही था', जेलेंस्की को पूर्व जर्मन चांसलर मर्केल का जवाब
बर्लिन, 5 अप्रैल। जर्मनी की पूर्व चांसलर एंजेला मर्केल ने 2008 में यूक्रेन को नाटो में शामिल होने से रोकने के 2008 के फैसले का बचाव किया है। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने उस समय यूक्रेन को नाटो में शामिल न करने के फैसले की आलोचना की थी।

जेलेंस्की ने देर रात के अपने संबोधन में बुखारेस्ट में हुए नाटो शिखर सम्मेलन में यूक्रेन को नाटो में शामिल होने से रोकने फ्रांस-जर्मनी के नेतृत्व वाले फैसले को "गलत अनुमान" बताया था। 2008 में नाटो शिखर सम्मेलन में यूक्रेन को नाटो का हिस्सा बनने से रोक दिया गया था।
जेलेंस्की ने कहा मैं मर्केल और सरकोजी को निमंत्रण देता हूं कि वो बूचा आएं और देखें कि 14 वर्षों में रूस को छूट देने की नीति के चलते क्या हुआ है। बूचा में रूसी सैनिकों ने आम नागरिकों के मारे जाने का जिक्र करते हुए इसे "युद्ध अपराध" कहा है। यूक्रेनी राष्ट्रपति ने यह भी आरोप लगाया यूरोप के नेता रूस को खुश करने की कोशिश कर रहे थे।
मर्केल ने की फैसले की आलोचना
यूक्रेनी राष्ट्रपति की आलोचना के बाद मर्केल ने अपने प्रवक्ता के माध्यम से एक संक्षिप्त बयान में कहा कि "वह बुखारेस्ट में 2008 में नाटो शिखर सम्मेलन के संबंध में अपने फैसले पर कायम हैं।"
बयान में आगे कहा गया है कि "बूचा और यूक्रेन में अन्य स्थानों पर उजागर हुए अत्याचारों के मद्देनजर सरकार और अंतरराष्ट्रीय समुदाय द्वारा यूक्रेन के पक्ष में खड़े होने और रूस की बर्बरता और यूक्रेन के खिलाफ युद्ध को समाप्त करने के सभी प्रयासों को पूर्व चांसलर का पूरा समर्थन है।
2008 में क्या हुआ था?
बुखारेस्ट में हुए शिखर सम्मेलन में यूक्रेन में नाटो को शामिल करने को लेकर चर्चा हुई थी लेकिन उस समय इसे बहुत जल्दी पाया गया था क्योंकि उसमें पाया गया था कि उस समय राजनीतिक स्थितियां पूरी नहीं हुई थी।"
लगातार चार बार सत्ता में रहने के बाद एंजेला मर्केल ने पिछले साल के आखिर में संन्यास ले लिया था। तब उन्हें एक स्वतंत्र दुनिया की नेता के रूप में सम्मानित किया गया था।
हालांकि यूक्रेन पर रूसी हमले के बाद उनकी विरासत को लेकर फिर से चर्चा होने लगी है। आलोचकों का कहना है कि पुतिन को लेकर उनकी नीति ने जर्मनी और यूरोप को असुरक्षित छोड़ दिया था।
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