तालिबान के आक्रमण के बीच 15 देशों के मिशन ने की शांति की अपील

नई दिल्ली, 20 जुलाई। तालिबान और अफगान सरकार के बीच सोमवार, 19 जुलाई को दोहा में शांति समझौता नहीं होने के बाद अफगानिस्तान में नाटो के प्रतिनिधि के साथ-साथ 15 देशों के राजनयिक मिशनों ने तालिबान से जंग रोकने की अपील है.

Provided by Deutsche Welle

अफगान सरकार और तालिबान के प्रतिनिधियों ने शनिवार और रविवार को कतर की राजधानी दोहा में शांति वार्ता में हिस्सा लिया, लेकिन तमाम कोशिशों के बावजूद संघर्ष विराम नहीं हो सका.

राजनयिक मिशनों का क्या कहना है?

अफगानिस्तान में लगभग 15 राजनयिक मिशनों द्वारा जारी एक बयान में कहा गया है, "तालिबान की कार्रवाई सीधे उनके इस दावे को नकारती है कि वे दोहा में शांति और बातचीत के माध्यम से संघर्षों को हल करने के लिए प्रतिबद्ध हैं."

बयान में आगे कहा गया, "ईद के मौके पर तालिबान को बेहतरी के लिए अपने हथियार डालने चाहिए और दुनिया को बताना चाहिए कि वे वास्तव में शांति प्रक्रिया के लिए प्रतिबद्ध हैं."

बयान को अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, जर्मनी और फ्रांस के साथ-साथ अन्य कई सरकारों द्वारा समर्थित किया गया है. नाटो के वरिष्ठ नागरिक प्रतिनिधि ने इस बयान का समर्थन किया है.

तालिबान का आगे बढ़ना जारी

हाल की ईद की छुट्टियों के दौरान तालिबान ने छोटी अवधि के युद्धविराम की घोषणा यह कहते हुए की थी कि वे अफगानों को शांति के साथ कुछ समय बिताना देना चाहते हैं.

अफगानिस्तान से विदेशी सैनिकों की वापसी की घोषणा के बाद से तालिबान ने सरकारी बलों पर हमलों की एक श्रृंखला शुरू करने में कोई समय बर्बाद नहीं किया है, जो अब भी जारी है. इस बीच तालिबान ने सुरक्षाबलों से कई प्रमुख क्षेत्रों पर कब्जा ले लिया है. आधे से अधिक देश अब उनके नियंत्रण में है.

सोमवार के बयान में अधिकारों के उल्लंघन की भी निंदा की गई है, जैसे हाल ही में क्षेत्रों में स्कूलों और मीडिया कंपनियों को बंद करने की कोशिशों का भी जिक्र किया गया है. तालिबान ऐसी कार्रवाइयों से इनकार कर चुका है.

सोमवार को तालिबान लड़ाकों ने काबुल के दक्षिण में स्थित उरुजगान प्रांत के देहरावुड जिले पर नियंत्रण का दावा किया था. तालिबान ने पहले ही हेरात प्रांत के 17 जिलों पर कब्जा कर लिया है, जबकि हेरात शहर की घेराबंदी की जा रही है. राष्ट्रपति अशरफ गनी ने सोमवार को हेरात की राजधानी का दौरा किया था.

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दूर-दूर तक शांति का संकेत नहीं

अफगान सरकार के प्रतिनिधियों और तालिबान के राजनीतिक नेतृत्व ने कहा है कि वे दोहा शांति वार्ता के तहत जल्द ही फिर मिलेंगे. दोनों ने यह भी आश्वासन दिया है कि वे सरकारी संपत्ति को नुकसान नहीं पहुंचाएंगे. दोहा में तालिबान के प्रवक्ता मोहम्मद नईम ने उन मीडिया रिपोर्टों से इनकार किया जिसमें कहा गया है कि तालिबान ईद के मौके पर कैदियों की रिहाई के बदले युद्धविराम के लिए सहमत हो गए हैं.

सोमवार को अफगानिस्तान के लिए अमेरिका के शांति दूत जलमय खलीलजाद ने इस्लामाबाद का दौरा किया और प्रधानमंत्री इमरान खान और पाकिस्तानी सेना के प्रमुख जनरल कमर जावेद बाजवा से मुलाकात की. अमेरिकी दूतावास के एक बयान में कहा गया, "अफगानिस्तान और तालिबान के बीच एक व्यापक राजनीतिक समझौते की तात्कालिकता पर खलीलजाद ने जोर दिया है."

खलीलजाद का पाकिस्तान दौरा ऐसे समय में हुआ है जब अफगानिस्तान ने पाकिस्तान से अपने राजदूत को वापस बुला लिया है. दोनों देशों के बीच आरोपों का नया सिलसिला छिड़ गया है. अफगान सरकार का आरोप है कि पाकिस्तान तालिबान को शरण दे रहा है.

एए/वीके (एएफपी, रॉयटर्स)

Source: DW

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