इको-फ्रेंडली हवाई यात्रा होगी बेहद महंगी
पेरिस 26 अक्टूबर। जानकारों का कहना है कि भारी दबाव के चलते जहाज निर्माण उद्योग भी इको-फ्रेंडली बनने की ओर रुख कर रहा है. इसके लिए ऐसे हवाई जहाज बनाने के लिए प्रयोग किए जा रहे हैं जो ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन को कम करेंगे. इन प्रयोगों पर विमानन उद्योग अरबों डॉलर खर्च कर रहा है. विशेषज्ञों का कहना है कि पर्यावरण के अनुकूल विमानों की कीमत बहुत अधिक होगी और भविष्य में हवाई यात्रा एक बार फिर अमीरों और पैसों वालों को समर्पित होगी.

एविएशन इंडस्ट्री पर बढ़ता दबाव
यूरोपीय संघ भी इस क्षेत्र पर लगातार दबाव बना रहा है. अब यूरोपीय संघ ने हवाई यात्रा के लिए इस्तेमाल होने वाले ईंधन पर टैक्स लगाने का संकेत दिया है. दुनिया भर का वायु उद्योग 2050 तक पर्यावरण के अनुकूल प्रौद्योगिकी के साथ वाणिज्यिक विमान पेश करने के लिए प्रतिबद्ध है.
इंटरनेशनल एयर ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन (आईएटीए) की 290 सदस्य एयरलाइंस हैं और वे दुनिया के 82 प्रतिशत ट्रैफिक के मालिक हैं. एजेंसी का अनुमान है कि पर्यावरण के अनुकूल वाणिज्यिक एयरलाइनों की लागत 1.5 ट्रिलियन डॉलर से अधिक हो सकती है.
आईएटीए का कहना है कि गैर-पारंपरिक ईंधन के उपयोग के सभी प्रयास सफल होने की उम्मीद है. संगठन के अनुसार, वर्तमान में विभिन्न संभावनाओं पर शोध चल रहा है, जिसमें खाना पकाने का तेल और शैवाल का उपयोग शामिल है.
विशेषज्ञों का मानना है कि इससे हवाई यात्रा और महंगी हो जाएगी, जबकि मौजूदा किराए को कम करने की जरूरत है ताकि हर कोई यात्रा कर सके.
फ्रांस के परिवहन मंत्री जीन-बैप्टिस्ट जेबारी का कहना है कि सभी को ऊर्जा और जलवायु परिवर्तन की इस प्रक्रिया में अपनी भूमिका निभानी चाहिए, जिसमें एयरलाइंस और ग्राहक या यात्री शामिल हैं. जेबारी के मुताबिक हवाई किराए में बढ़ोतरी कुछ समय के लिए तो तय है, लेकिन फिर फर्क दिखना शुरू हो जाएगा. उनके मुताबिक इस बात की प्रबल संभावना है कि कोरोना महामारी के कारण कई एयरलाइंस दिवालिया हो जाएंगी.
बढ़ती कीमतें, बड़ा बदलाव
पर्यवेक्षकों के अनुसार पर्यावरण के अनुकूल ईंधन के उपयोग से इस क्षेत्र में महत्वपूर्ण परिवर्तन हो सकते हैं और साथ ही एयरलाइन उद्योग को भी बाधित कर सकता है. कहा जाता है कि पर्यावरण के अनुकूल ईंधन के कारण मध्यम वर्ग भी हवाई यात्रा नहीं कर पाएगा. अनुमान है कि हवाई यात्रा में भी कमी आएगी.
इंटरनेशनल एयर ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन को उम्मीद है कि 2050 तक हवाई यात्रा की मात्रा 10 अरब तक पहुंच जाएगी. एयर इंडस्ट्री के जानकारों का कहना है कि कोरोना महामारी के चलते इस समय हवाई किराए में गिरावट आ रही है.
एए/वीके (एएफपी)
Source: DW
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