भारत का पड़ोसी देश बना रहा है समुद्र में दुर्लभ ‘तैरने वाला शहर’, हिंद महासागर में उतार डाला ‘स्वर्ग’
हिंद महासागर में ये प्रोजेक्ट प्रॉपर्टी डेवलपर डच डॉकलैंड्स और मालदीव सरकार के बीच एक ज्वाइंट प्रोजेक्ट है। इस प्रोजेक्ट के पीछे कोई तूफानी सोच या फिर भविष्य को ध्यान में रखते हुए उठाया गया कदम नहीं है, बल्कि...
माले, जून 20: भारत का पड़ोसी देश हिंद महासागर में अथाह पानी के ऊपर एक 'तैरते हुए शहर' का निर्माण कर रहा है और अब यह शहर अपना आकार भी लेने लगा है। फ़िरोज़ा लैगून में मालदीव की राजधानी माले से नाव के जरिए सिर्फ 10 मिनट में इस तैरते हुए शहर में पहुंचा जा सकता है, जो 20 हजार लोगों के रहने के लिए पर्याप्त है। जैसे जैसे ये शहर आकार लेता जा रहा है, ये स्वर्ग सरीखा खूबसूरत दिखता जा रहा है। इस शहर को देखने के बाद हर कोई यहां आकर एक बार जरूर रहना चाहेगा।

ब्रेन कोरल के समान पैटर्न में डिज़ाइन
भारत का पड़ोसी देश मालदीव हिंद महासागर में 'प्लोटिंग सिटी' यानि 'तैरने वाले शहर' का निर्माण कर रहा है, जिसे ब्रेन कोरल के समान पैटर्न में डिज़ाइन किया गया है। इस शहर में घरों के अलावा रेस्तरां, दुकान और स्कूलों सहित 5,000 तैरती हुई चीजें होंगी। जिनके बीच में नहरें बह रही होंगी। इस महीने पहली इकाइयों का अनावरण किया जाएगा, और साल 2024 की शुरुआत में यहां पर रहने के लिए लोगों को ट्रांसफर किया जाने लगेगा। रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2027 तक पूरे शहर को बना लिया जाएगा।

क्यों बनाया जा रहा ‘तैरता हुआ शहर’?
हिंद महासागर में ये प्रोजेक्ट प्रॉपर्टी डेवलपर डच डॉकलैंड्स और मालदीव सरकार के बीच एक ज्वाइंट प्रोजेक्ट है। इस प्रोजेक्ट के पीछे कोई तूफानी सोच या फिर भविष्य को ध्यान में रखते हुए उठाया गया कदम नहीं है, बल्कि इसे समुद्र में पानी के बढ़ते हुए लेवल की कठोर वास्तविकता के व्यावहारिक समाधान के रूप में बनाया जा रहा है। 1190 निचले द्वीपों से बना मालदीव द्वीपसमूह, जलवायु परिवर्तन के लिहाज से विश्व के सबसे असुरक्षित देशों में से एक है। इसका अस्सी प्रतिशत भूमि क्षेत्र समुद्र तल से महज एक मीटर से भी कम है, और सदी के अंत तक, जब समुद्री जल स्तर के एक मीटर तक बढ़ने का अनुमान लगाया गया है, उस वक्त कर आशंका इस बात को लेकर है, कि पूरा देश ही जलमग्न हो जाएगा। लिहाजा, अपना अस्तित्व बचाए रखने के लिए मालदीव 'तैरते हुए शहर' का निर्माण कर रहा है।

मालदीव के लोगों के लिए नई आशा
समुद्र में बन रहे इस तैरते हुए शहर की सबसे खास बात ये है, कि ये शहर समुद्र के जलस्तर बढ़ने के साथ उठ सकता है। लिहाजा, मालदीव के आधे मिलियन से अधिक लोगों के लिए यह "नई आशा" है। वाटरस्टूडियो के संस्थापक कोएन ओल्थुइस ने, जिन्होंने समुद्र में बनने वाले इस शहर की वास्तुकला और शहर का डिजाइन किया है, उन्होंने सीएनएन से बात करते हुए कबहा कि, 'यह साबित कर सकता है कि पानी पर किफायती आवास, बड़े समुदाय और सामान्य शहर भी सुरक्षित हैं। वे (मालदीव के) जलवायु शरणार्थियों से जलवायु इनोवेटर्स बन जाएंगे'।

फ्लोटिंग आर्किटेक्चर का हब
नीदरलैंड में जन्मे और पले-बढ़े, जहां लगभग एक तिहाई जमीन समुद्र तल से नीचे जा चुकी है, कोएन ओल्थुइस अपना पूरा जीवन में पानी के करीब ही बिताया है। उन्होंने कहा कि उनकी मां के परिवार में जहाज बनाने वाले थे और उनके पिता आर्किटेक्ट और इंजीनियरों के घर से आते थे, इसलिए दोनों को मिलान स्वाभाविक ही लग रहा था। साल 2003 में, ओल्थुइस ने वाटरस्टूडियो की स्थापना की थी, जो एक आर्किटेक्चर फर्म है जो पूरी तरह से पानी पर निर्माण के लिए समर्पित है। उस समय जलवायु परिवर्तन के संकेत मिलने लगे थे, लेकिन इसे इतना बड़ा मुद्दा नहीं माना गया कि आप इस कंसेप्ट के साथ एक कंपनी का निर्माण कर दें। उन्होंने कहा कि, तब सबसे बड़ी समस्या थी अंतरिक्ष। शहरों का विस्तार हो रहा था, लेकिन नए शहरी विकास के लिए उपयुक्त जमीन समाप्त हो रही थी।

अब बन गया फ्लोटिंग आर्किटेक्चर का मार्केट
जलवायु परिवर्तन ने दुनिया के सैकड़ों पूर्ण विकसित शहरों के अस्तित्व को खतरे में डाल दिया है, जिसमें अमेरिका के न्यूयॉर्क, चीन के शंघाई और भारत के मुंबई जैसे शहर हैं, लिहाजा फ्लोटिंग आर्किटेक्चर के लिए एक विशाल बाजार बन चुका है। फ्लोटिंग आर्किटेक्चर का काम करने वाले कोएन ओल्थुइस ने सीएनएम को बताया कि, पिछले दो दशकों में, वाटरस्टूडियो ने दुनिया भर में 300 से अधिक फ़्लोटिंग घरों, कार्यालयों, स्कूलों और स्वास्थ्य देखभाल केंद्रों को डिजाइन किया है। नीदरलैंड फ्लोटिंग आर्किटेक्चर का केंद्र बन गया है, फ्लोटिंग पार्कों का घर, एक फ़्लोटिंग डेयरी फार्म, और एक फ़्लोटिंग ऑफिस बिल्डिंग, जो ग्लोबल सेंटर ऑन एडेप्टेशन (जीसीए) के मुख्यालय भी फ्लोटिंग आर्किटेक्चर के तौर पर ही हैं। जो जलवायु अनुकूलन समाधानों को स्केल करने पर केंद्रित है। जीसीए के सीईओ पैट्रिक वेरकूइजन, फ्लोटिंग आर्किटेक्चर को बढ़ते समुद्र के स्तर के लिए व्यावहारिक और आर्थिक रूप से स्मार्ट समाधान दोनों के रूप में देखते हैं।

‘फ्लोटिंग सिटी’ की क्या है खासियत?
फ्लोटिंग सिटी प्रोजेक्ट के जरिए मालदीव अपने दो लक्ष्यों को हासिल करना चाहता है। पहला लक्ष्य 20 हजार लोगों के रहने के लिए समुद्र में शहर का निर्माण करना है। इसके साथ ही दूसरा लक्ष्य फ्लोटिंग शहरों के लिए अन्य योजनाएं शुरू की गई हैं, जैसे बुसान, दक्षिण कोरिया में ओशिनिक्स सिटी और डच कंपनी ब्लू 21 द्वारा विकसित बाल्टिक सागर पर तैरते द्वीपों की एक श्रृंखला, लेकिन कोई भी इस पैमाने और समय सीमा के साथ प्रतिस्पर्धा नहीं करता है। वाटरस्टूडियो का शहर अपने इंद्रधनुषी रंग के घरों, विस्तृत बालकनियों और समुद्र के सामने के दृश्यों के साथ स्थानीय लोगों को आकर्षित करने के लिए बनाया गया है। यहां रहने वाले लोग नावों पर घूमेंगे, या वे रेतीली सड़कों पर चल सकते हैं, साइकिल चला सकते हैं या इलेक्ट्रिक स्कूटर या बग्गी चला सकते हैं।

तैरते शहर में घरों की कीमत
मालदीव की राजधानी माले दुनिया के सबसे घनी आबादी वाले शहरों में से एक है, जिसमें 200,000 से अधिक लोग लगभग आठ वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में रहते हैं। और कीमतें हुलहुमले (भीड़ को कम करने के लिए पास में बनाया गया एक मानव निर्मित द्वीप) में रहने के लिए कई तरह के घरों का निर्माण किया गया है। एक स्टूडियो घर के लिए डेढ़ लाख डॉलर खर्च करना होगा, वहींस एक परिवार के घर के लिए 250,000 लाख डॉलर से घर शुरू होता है।
कैसे बनाया गया तैरता हुआ शहर?
पहले मॉड्यूलर इकाइयों का निर्माण स्थानीय शिपयार्ड में किया जाता है, फिर उसे तैरते हुए शहर में ले जाया जाता है। एक बार स्थिति में आने के बाद, वे एक बड़े पानी के नीचे कंक्रीट के पतवार से जोड़ दिए जाते हैं, जो टेलिस्कोपिक स्टील स्टिल्ट्स पर सीबेड से मिल जाते हैं जो इसे लहरों के साथ धीरे-धीरे उतार-चढ़ाव करते हैं। इसके साथ ही समुद्र में उठने वाली लहरों को रोकने के लिए प्रवाल भित्तियों का निर्माण किया गया है, ताकि, यहां रहने वाले लोग जब घर में हों, उन्हें ये महसूस ना हो, कि वो समुद्र किनारे मौजूद हैं।












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