टेंशन वाली खबर: ग्रीनलैंड समिट में पहली बार बारिश, तेजी से पिघल रही बर्फ, कई शहरों पर खतरा
नई दिल्ली, 21 अगस्त: इंसान तेजी से विकास के पथ पर आगे बढ़ रहा है, लेकिन इसकी कीमत प्रकृति को चुकानी पड़ रही। रोजाना विकसित हो रही टेक्नोलॉजी और अंधाधुंध विकास से जलवायु परिवर्तन की रफ्तार बढ़ती जा रही है। वैज्ञानिकों ने कई बार चेतावनी दी कि अगर वक्त रहते इंसानों ने जलवायु परिवर्तन रोकने के लिए ठोस कदम नहीं उठाए, तो पूरी मानव जाति को इसकी बड़ी कीमत चुकानी पड़ेगी। इसी क्रम में अब ग्रीनलैंड समिट से एक टेंशन वाली रिपोर्ट सामने आई है।

हमेशा होती थी बर्फबारी
रिपोर्ट के मुताबिक ग्रीनलैंड के ऊंचाई वाले इलाकों पर पहली बार बर्फबारी की जगह बारिश हुई। जिस वजह से करीब 9 घंटे तक तापमान शून्य से ऊपर रहा। वहां पर रिसर्च करने वाले वैज्ञानिकों ने बताया कि रिकॉर्ड में पहली बार इलाके में बारिश दर्ज की गई है, वरना कम तापमान की वजह से वहां हमेशा बर्फबारी होती है। ऐसे में इसे बड़ी चेतावनी के रूप में देखा जा रहा है।

एक दशक में तापमान तीसरी बार बढ़ा
रिपोर्ट में आगे कहा गया कि 14 अगस्त को बर्फ की चादर के 3,216 मीटर ऊंचे शिखर पर कई घंटों तक बारिश हुई। इसके अलावा पिछला हफ्ते ऐसा था, जब वहां पर बर्फ नहीं पड़ी। इस पूरी घटना को समिट स्टेशन पर रिकॉर्ड किया गया, जो 1989 में राष्ट्रीय विज्ञान फाउंडेशन की ओर से स्थापित किया गया था। इसके अलावा एक दशक में ये तीसरा मौका था, जब वहां का तापमान शून्य से ऊपर चला गया। अगर अब दोबारा बारिश होती है, तो बर्फ को काफी ज्यादा नुकसान होगा।

7 अरब टन बारिश
वहीं नेशनल स्नो एंड आइस डेटा सेंटर ने बताया कि 14 से 16 अगस्त तक ग्रीनलैंड में सात अरब टन बारिश हुई। 1950 में यहां पर रिकॉर्ड रखना शुरू किया गया था, ऐसे में ये तब से अब तक की सबसे ज्यादा बारिश है। हालांकि अधिकांश बारिश ग्रीनलैंड के दक्षिण-पूर्वी तट से समिट स्टेशन तक हुई। इसकी वजह से सतह पर बर्फ को बहुत ज्यादा नुकसान हुआ है। साथ ही वो तेजी से पिघल रही है। अनुमान के मुताबिक अगस्त के मध्य में बर्फ को नुकसान दैनिक औसत से सात गुना ज्यादा है।

ये अच्छे संकेत नहीं
मामले में एक वैज्ञानिक ने कहा कि कहीं पर भी अगर बर्फ जमा है, तो बारिश उसे पिघला देगी। ऐसे में ग्रीनलैंड में हुई बारिश अच्छे संकेत नहीं दे रही है। मौजूदा वक्त में बर्फ के पिघलने की रफ्तार पहले से ज्यादा बढ़ गई है। इसके लिए जंगलों में लगी आग, पर्यावरण प्रदूषण आदि जिम्मेदार है। अगर जल्द ही इस पर सख्ती नहीं की गई, तो इससे ग्रीनलैंड को बहुत ज्यादा नुकसान हो सकता है।

बर्फ पिघलने के ये हैं परिणाम
ग्लेशियर पर लाखों टन बर्फ जमी है। अगर वो तेजी से पिघलती रही, तो उसका पानी समुद्र और नदियों में जाएगा, ऐसे में उनका जलस्तर बढ़ना लाजमी है। जिससे समुद्र के किनारे बसे शहरों के डूबने का खतरा रहेगा। इसके अलावा ग्लेशियर पर रहने वाले जीवों पर भी इसका बुरा असर पड़ता है।












Click it and Unblock the Notifications